सुप्रीम कोर्ट ने 132 साल पुरानी सेंट्रल विस्टा लाइब्रेरी को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स पर स्वत: संज्ञान मामले में सोमवार को सुनवाई की. कोर्ट ने केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल कर ये बताने को कहा कि नए सेंट्रल विस्टा प्लान में 135 साल पुरानी सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी (CSL) के लिए कितनी जगह तय की गई है.
सेंट्रल सेक्रेटेरियट लाइब्रेरी में लगभग 8.5 लाख किताबें मौजूद हैं. सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत इस ऐतिहासिक धरोहर को दूसरी जगह ले जाने की तैयारी चल रही है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा है कि जो नई जगह उपलब्ध कराई जाएगी, क्या वह इन 8.5 लाख किताबों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त होगी. इसके अलावा आरके पुरम में डिब्बों में रखी करीब 2 लाख अतिरिक्त किताबों को भी रखने के लिए पर्याप्त स्थान की व्यवस्था होनी चाहिए.
केंद्र ने कोर्ट में रखा पक्ष
अदालत की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी ने स्पष्ट किया कि सेंट्रल विस्टा प्लान में लाइब्रेरी के लिए जगह निर्धारित की गई है. हालांकि, अदालत ने जोर देकर कहा कि इस संबंध में पूरी और स्पष्ट जानकारी विस्तृत हलफनामे के जरिए रिकॉर्ड पर रखी जाए.
कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट्स पर लिया संज्ञान
135 साल पुरानी इस प्रतिष्ठित लाइब्रेरी की शिफ्टिंग और पुस्तकों की सुरक्षा को लेकर छपी मीडिया रिपोर्ट्स पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष अदालत ने ये सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट अब हलफनामे के जरिए ये देखना चाहता है कि लाखों किताबों को रखने के लिए पर्याप्त जगह का पुख्ता बंदोबस्त हुआ है या नहीं.
क्या है मामला
आपको बता दें कि शास्त्री भवन को तोड़ने की योजना है. इसके बाद सेंट्रल विस्टा लाइब्रेरी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल ये है कि लाइब्रेरी में रखी किताबों और पुराने दस्तावेजों को सुरक्षित तरीके से कहां ले जाया जाएगा. इंडियन एक्सप्रेस की एक हालिया रिपोर्ट में भी इस मुद्दे को उठाया गया था. रिपोर्ट के मुताबिक, संस्कृति मंत्रालय ने भी लाइब्रेरी को दूसरी जगह ले जाने को लेकर चिंता जताई थी.