scorecardresearch
 

सुप्रीम कोर्ट का फर्जी जज बन डराया, महाठगी का आरोपी सुकेश चंद्रशेखर दोषी करार, आज सजा पर सुनवाई

महाठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को तीस हजारी कोर्ट ने दोषी करार दिया है. सुकेश चंद्रशेखर को दी जाने वाली सजा की अवधि पर गुरुवार को सुनवाई होगी.

Advertisement
X
सुकेश चंद्रशेखर को दी जाने वाली सजा की अवधि पर 27 अगस्त 2026 को सुनवाई होगी. (Photo: ITG)
सुकेश चंद्रशेखर को दी जाने वाली सजा की अवधि पर 27 अगस्त 2026 को सुनवाई होगी. (Photo: ITG)

तीस हजारी कोर्ट ने महाठगी के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को वर्ष 2017 के एक भ्रष्टाचार मामले में जमानत पाने के लिए खुद को सुप्रीम कोर्ट का सेवारत जज बताकर निचली अदालत की विशेष जज को डराने और प्रभावित करने के मामले में दोषी करार दिया है. 

अदालत सुकेश चंद्रशेखर को दी जाने वाली सजा की अवधि पर 27 अगस्त 2026 को सुनवाई करेगी. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट हर्षिता मिश्रा की अदालत ने अपने 121 पन्नों के फैसले में सुकेश की इस हरकत को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सीधा हमला और सबसे बेतुका नाट्य रूपांतरण करार दिया है. 

निर्णय में कोर्ट ने कहा है कि सुकेश ने सिर्फ अदालत की गरिमा ये मर्यादा की लक्ष्मण रेखा ही पार नहीं की, बल्कि वह न्यायिक संस्थागत अतिक्रमण के दायरे में कूद गया. कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को भारतीय दंड संहिता की धारा 170 जिसमें लोक सेवक का स्वांग रचने का अपराध, धारा 189 जिसमें लोक सेवक को क्षति पहुंचाने की धमकी देना और धारा 507 जिसमें गुमनाम संचार द्वारा आपराधिक धमकी देने का दोषी पाया है. 

सुकेश चंद्रशेखर भ्रष्टाचार के एक मामले में पुलिस हिरासत में था. उसने वहां तैनात पुलिस कांस्टेबल मनजीत के मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट मामलों की विशेष जज पूनम चौधरी के आधिकारिक लैंडलाइन और मोबाइल नंबर पर फोन किया था. फोन पर सुकेश ने पहले खुद को सुप्रीम कोर्ट के एक सेवारत जज का प्राइवेट सेक्रेटरी बताया, फिर खुद सुप्रीम कोर्ट का जज बनकर बात की.

Advertisement

उसने गृह मंत्रालय और कॉलेजियम का हवाला देते हुए जज पूनम चौधरी पर खुद को तुरंत जमानत देने का दबाव बनाया. बात न मानने पर गंभीर व्यावसायिक परिणाम भुगतने और करियर तबाह करने की धमकी भी दी. विशेष जज ने फोन आने के बाद सीधे सुप्रीम कोर्ट से संपर्क किया और संबंधित जज के वास्तविक निजी सचिव से बात की. तब पुष्टि हुई कि ऐसा कोई फोन कॉल सुप्रीम कोर्ट से नहीं किया गया था. 

कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली पुलिस की जांच को बहुत ही सतही और उदासीन बताया. अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि वह कांस्टेबल मनजीत की भूमिका की फिर से जांच करे कि सुकेश को उसका फोन कैसे मिला, उसका पासवर्ड किसे पता था और समय रहते इसकी रिपोर्ट क्यों नहीं की गई.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement