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इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति के बहाने बंगाल और केंद्र फिर आमने-सामने, किस ओर है नेताजी का परिवार?

जिस छत्र के नीचे सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाई जानी है वहां पर 1938 से 1968 तक किंग जॉर्ज पंचम की प्रतिमा लगी थी. पिछले 6 दशक से यहां किसी और की प्रतिमा नहीं लगाई गई थी. 23 जनवरी से इस जगह का इतिहास भी बदलने वाला है.

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इंडिया गेट पर लगेगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा इंडिया गेट पर लगेगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा
स्टोरी हाइलाइट्स
  • इंडिया गेट पर लगेगी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा
  • नेताजी के परिवार ने जताई खुशी, टीएमसी नाराज

दिल्ली के इंडिया गेट पर 'नेताजी' की प्रतिमा स्थापित करने के मोदी सरकार के फैसले का सुभाष चंद्र बोस के परिवार ने स्वागत किया है. इंडिया टुडे से बात करते हुए बोस परिवार के वरिष्ठ सदस्य, सुगाता बोस ने कहा, "मैं इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा स्थापित करने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा की गई घोषणा का स्वागत करता हूं.

उन्होंने कहा,  'मैं केवल इतना कहूंगा की महान और सच्चे लोगों के विरासत को बचाए रखने के लिए स्मारकों की आवश्यकता होती है."

राजधानी दिल्ली में नेताजी की प्रतिमा स्थापना के प्रभाव की ओर इशारा करते हुए उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि यह प्रतिमा सभी भारतीयों को हर एक के लिए समानता सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करेगी, चाहे वे किसी भी धार्मिक या भाषाई समुदाय के हों."

इंडिया गेट पर नेताजी की प्रतिमा स्थापित करने का केंद्र सरकार का फैसला ऐसे समय में आया है जब बंगाल सरकार और केंद्र नेताजी की 125 वीं जयंती के मौके पर बंगाल की झांकी के मुद्दे पर आमने-सामने हैं. बता दें कि बंगाल के झांकी को गणतंत्र दिवस परेड से बाहर रखा गया है. 

इस पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सुगाता बोस ने कहा, "नेताजी और आजाद हिंद फौज पर बंगाल की झांकी को केंद्र को स्वीकार करना चाहिए था, यह नेताजी की 125वीं जयंती और आजादी के 75 साल पूरे होने का मौका है."

बोस परिवार के एक अन्य सदस्य चंद्र कुमार बोस ने कहा, 'हमारी लंबी समय से मांग थी कि जिनके वजह से देश को आजादी मिली उस महान नेता नेताजी सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा दिल्ली में इंडिया गेट के सामने लगाई जानी चाहिए. अब खुशी की बात है कि सरकार ने फैसला लिया है.'

चंद्र कुमार बोस उच्च स्तरीय नेताजी समिति के सदस्यों में से एक थे, उन्होंने कहा, "यह वह भारत नहीं है जिसके लिए नेताजी सपना देख रहे थे, यदि आप उन्हें सही मायने में सम्मान देना चाहते हैं तो आपको विभाजनकारी राजनीतिक चालों के खिलाफ लड़ना होगा"

केंद्र सरकार के फैसले से टीएमसी नाराज

हालांकि ऐसा लगता है कि प्रधानमंत्री के इस कदम के बाद भी तृणमूल कांग्रेस काफी नाखुश है. बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 23 जनवरी को नेताजी की होलोग्राम प्रतिमा का अनावरण करेंगे.
 
कोलकाता के मेयर फिरहाद हाकिम ने इसपर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "केंद्र सरकार पागल है,  वे नेताजी की झांकी की अनुमति नहीं देंगे, बल्कि अमर ज्योति को हटाकर कुछ और रखेंगे.' 

उन्होंने कहा, नेताजी की झांकी और ममता बनर्जी के अनुरोध को अनदेखा करके केंद्र सरकार ने गलती की है. अब उस गलती को सुधारने के लिए वे एक और बड़ी गलती कर रहे हैं, क्यों?"

नेताजी का सबसे बड़ा सम्मान

ये सवाल हमेशा से उठता रहा है कि देश को आजादी मिलने के बाद नेताजी सुभाष चंद्र बोस को वो सम्मान क्यों नहीं मिला जो बाकी लोगों को मिला. इस पर कई राजनीतिक चर्चाएं भी हुईं लेकिन इस तरह की कोई पहल कभी नहीं की गई.

अब इंडिया गेट पर सुभाष चंद्र बोस की प्रतिमा लगाए जाने का ऐलान उनको दिए गए सबसे बड़े सम्मान के तौर पर देखा जा रहा है.

23 जनवरी को अनावरण

यहां जो प्रतिमा स्थापित की जाएगी वो 28 फीट ऊंची और करीब 6 फीट चौड़ी होगी. हालांकि 23 जनवरी को पीएम मोदी यहां पर होलोग्राफिक तकनीक से बनी प्रतिमा का ही अनावरण करेंगे. ये व्यवस्था तब तक रहेगी जब तक ग्रेनाइट की प्रतिमा यहां स्थापित ना हो जाए.

बता दें कि मोदी सरकार 23 जनवरी यानी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के दिन को पराक्रम दिवस के तौर मनाती आ रही है. इसी वजह से इस दिन को खासतौर से चुना गया है.

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