scorecardresearch
 

Beat Report: सोशल मीडिया पर आपकी एक तस्वीर बन सकती है साइबर अपराधियों का हथियार

आज के दौर में सोशल मीडिया का इस्तेमाल आम हो गया है, लेकिन अगर आप इसके उपयोग से पहले जरूरी जानकारी नहीं रखते या सावधानियां नहीं अपनाते, तो आपकी प्रोफाइल पर मौजूद जानकारियों का गलत इस्तेमाल किया जा सकता है.

Advertisement
X
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि AI-मॉर्फिंग और डीपफेक अपराधों में सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हो रही हैं. (Photo: Pexels/ITG)
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि AI-मॉर्फिंग और डीपफेक अपराधों में सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हो रही हैं. (Photo: Pexels/ITG)

सोशल मीडिया के दौर में लोग अपनी जिंदगी के हर छोटे-बड़े पल को तस्वीरों और वीडियो के माध्यम से शेयर कर रहे हैं. फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और अन्य प्लेटफॉर्म पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करना अब आम बात हो गई है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी एक साधारण फोटो किसी साइबर अपराधी के हाथों में पहुंचकर आपके खिलाफ ब्लैकमेल, फर्जी पहचान, मानसिक उत्पीड़न और आर्थिक ठगी का हथियार बन सकती है?

इसी बढ़ते खतरे को देखते हुए गृह मंत्रालय (MHA) के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने देशवासियों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी जारी की है. I4C ने कहा है कि साइबर अपराधी अब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तस्वीरों का इस्तेमाल करके एआई‑जेनरेटेड मॉर्फ़्ड कंटेंट, फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइल और ऑनलाइन धोखाधड़ी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं. ऐसे मामलों में महिलाओं, युवाओं और सोशल मीडिया पर अधिक सक्रिय लोगों को विशेष रूप से निशाना बनाया जा रहा है.

AI और डीपफेक टेक्नोलॉजी ने बढ़ाई चुनौती

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डीपफेक तकनीक ने डिजिटल दुनिया में कई सकारात्मक बदलाव लाए हैं, लेकिन इसके दुरुपयोग ने गंभीर सुरक्षा चुनौतियां भी पैदा कर दी हैं. आज इंटरनेट पर ऐसे कई टूल उपलब्ध हैं जिनकी मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर को बदलकर नकली फोटो और वीडियो तैयार किए जा सकते हैं. 

Advertisement

इन तस्वीरों में व्यक्ति को ऐसी परिस्थितियों में दिखाया जाता है जो वास्तविकता से बिल्कुल अलग होती हैं. कई मामलों में अपराधी महिलाओं की तस्वीरों को मॉर्फ करके अश्लील सामग्री तैयार करते हैं और फिर पीड़ितों को ब्लैकमेल करते हैं.

I4C का कहना है कि साइबर अपराधी अब केवल हैकिंग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे सोशल इंजीनियरिंग, AI आधारित मॉर्फिंग और डिजिटल प्रतिरूपण (Impersonation) के जरिए लोगों को निशाना बना रहे हैं.

कैसे शुरू होता है पूरा साइबर जाल?

I4C द्वारा शेयर किए गए एक मामले से पता चलता है कि साइबर अपराधी किस तरह योजनाबद्ध तरीके से लोगों को फंसाते हैं.

पहला चरण: सोशल मीडिया पर दोस्ती की कोशिश

अपराधी इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धार्मिक, सामाजिक या भावनात्मक बातचीत के जरिए लोगों से संपर्क बनाते हैं. वे भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं और धीरे-धीरे व्यक्ति की निजी जानकारी हासिल करते हैं.

दूसरा चरण: तस्वीरों का संग्रह

अगर कोई व्यक्ति संपर्क बढ़ाने से इनकार करता है, तब भी अपराधी उसके सोशल मीडिया प्रोफाइल पर उपलब्ध सार्वजनिक तस्वीरों को डाउनलोड कर लेते हैं. चूंकि अधिकांश लोग अपनी प्रोफाइल को सार्वजनिक रखते हैं, इसलिए तस्वीरों तक पहुंच आसान हो जाती है.

तीसरा चरण: AI टूल्स का दुरुपयोग

इसके बाद अपराधी इंटरनेट पर उपलब्ध AI आधारित टूल्स और वेबसाइट्स का इस्तेमाल कर तस्वीरों को मॉर्फ करते हैं. कुछ ही मिनटों में नकली फोटो और वीडियो तैयार कर लिए जाते हैं.

Advertisement

चौथा चरण: फर्जी प्रोफाइल बनाना

मॉर्फ की गई तस्वीरों का उपयोग करके अपराधी पीड़ित के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम अकाउंट, फेसबुक प्रोफाइल, यूट्यूब चैनल या अन्य सोशल मीडिया पहचान तैयार कर लेते हैं.

पांचवां चरण: ब्लैकमेल और उत्पीड़न

फर्जी प्रोफाइल पर मॉर्फ की गई सामग्री अपलोड करके पीड़ित और उसके परिवार को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है. कई मामलों में पैसे की मांग, बदनामी की धमकी और ऑनलाइन उत्पीड़न भी किया जाता है.

महिलाओं को बनाया जा रहा निशाना

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि AI-मॉर्फिंग और डीपफेक अपराधों में सबसे अधिक महिलाएं प्रभावित हो रही हैं. अपराधी महिलाओं की तस्वीरों का इस्तेमाल करके फर्जी अश्लील सामग्री बनाते हैं. नकली सोशल मीडिया अकाउंट तैयार करते हैं, ब्लैकमेल करते हैं, विवाह और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं, मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी पैदा करते हैं. ऐसे अपराध केवल डिजिटल नहीं बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी छोड़ते हैं.

क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे अपराध?

विशेषज्ञों के अनुसार कई कारण इन अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं.

1. सार्वजनिक प्रोफाइल
अधिकांश लोग अपनी सोशल मीडिया प्रोफाइल को Public रखते हैं.

2. प्राइवेसी सेटिंग्स की जानकारी का अभाव
कई उपयोगकर्ताओं को यह पता ही नहीं होता कि उनकी तस्वीरें कौन देख सकता है और डाउनलोड कर सकता है.

Advertisement

3. AI टूल्स की आसान उपलब्धता
कुछ क्लिक में तस्वीरों को मॉर्फ करने वाले टूल्स इंटरनेट पर आसानी से उपलब्ध हैं.

4. डिजिटल जागरूकता की कमी
लोग सोशल मीडिया के जोखिमों को गंभीरता से नहीं लेते.

5. फर्जी पहचान बनाना आसान
नकली ईमेल, फोन नंबर और सोशल मीडिया प्रोफाइल बनाना आज पहले से कहीं अधिक आसान हो गया है.

I4C ने जारी की महत्वपूर्ण एडवाइजरी
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने नागरिकों से कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां अपनाने की अपील की है.

  • टू‑फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) तुरंत सक्रिय करें
  • प्राइवेसी सेटिंग्स की नियमित जांच करें
  • अनजान लिंक और वीडियो कॉल से सावधान रहें
  • संदिग्ध वीडियो कॉल स्वीकार न करें.
  • अनजान लोगों से निजी जानकारी शेयर न करें.
  • फ़ेक प्रोफ़ाइल्स को तुरंत रिपोर्ट करें
  • पर्सनल फ़ोटोज सोच-समझकर शेयर करें


बच्चों और युवाओं के लिए भी बड़ा खतरा

आज बड़ी संख्या में बच्चे और किशोर सोशल मीडिया का उपयोग कर रहे हैं. साइबर अपराधी उनकी तस्वीरों और वीडियो का भी दुरुपयोग कर सकते हैं.

अभिभावकों को चाहिए कि बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखें. प्राइवेसी सेटिंग्स समझाएं. अजनबियों से बातचीत के जोखिम बताएं. डिजिटल सुरक्षा के बारे में नियमित चर्चा करें.

Deepfake केवल व्यक्तिगत नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मुद्दा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत बदनामी के लिए नहीं बल्कि, फर्जी राजनीतिक संदेश फैलाने, सांप्रदायिक तनाव पैदा करने, अफवाहें फैलाने, संस्थाओं की साख को नुकसान पहुंचाने, जैसे गंभीर उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है.

Advertisement

इसी कारण AI-आधारित साइबर अपराधों को राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा की बड़ी चुनौती माना जा रहा है.

साइबर अपराध का शिकार होने पर क्या करें?

अगर आप AI-मॉर्फिंग, फर्जी प्रोफाइल, ऑनलाइन ब्लैकमेल या किसी साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो जाते हैं, तो घबराने की बजाय तुरंत कार्रवाई करें.

तुरंत उठाएं ये कदम:

  • स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें.
  • लिंक, यूआरएल और चैट सेव करें.
  • संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रिपोर्ट करें.
  • परिवार और पुलिस को जानकारी दें.
  • राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर तुरंत कॉल करें.
  • cybercrime.gov.in पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें.

समय पर शिकायत करने से अपराधियों तक पहुंचने और डिजिटल सामग्री हटाने की संभावना काफी बढ़ जाती है. डिजिटल युग में आपकी तस्वीरें आपकी पहचान हैं, लेकिन यही तस्वीरें साइबर अपराधियों के लिए हथियार भी बन सकती हैं. AI और डीपफेक तकनीक ने साइबर अपराध के स्वरूप को पहले से अधिक जटिल और खतरनाक बना दिया है. 

ऐसे में डिजिटल सतर्कता, मजबूत प्राइवेसी सेटिंग्स, दो-स्तरीय सुरक्षा (2FA) और संदिग्ध गतिविधियों की तत्काल रिपोर्टिंग ही सबसे बड़ा बचाव है. याद रखें कि सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक सार्वजनिक तस्वीर, अगर गलत हाथों में पहुंच जाए, तो वह आपकी प्रतिष्ठा, मानसिक शांति और आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. डिजिटल दुनिया में सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement