जम्मू कश्मीर की स्टेट इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (SIA) ने वंधामा नरसंहार और जाने-माने कश्मीरी पंडित टीका लाल टपलू की हत्या के मामलों में जांच शुरू कर दी है. सरला भट और सर्वानंद कौल के मामलों के बाद अब एजेंसी इन मामलों की जांच करने वाली है.
25 जनवरी 1998 को श्रीनगर के पास गांदरबल जिले और वंधामा गांव में 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या की गई थी. 1998 में गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर चार बच्चों और नौ महिलाओं समित 23 कश्मीरी पंडितों का नरसंहार हुआ था. सूत्रों की मानें तो SIA ने कुछ दिन पहले कश्मीर के कई इलाकों में छापेमारी की. जांच एजेंसी उन आतंकियों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स की पहचान कर रही है जो इसमें शामिल थे.
साल था 1998. दिन था गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या. श्रीनगर के पास गांदरबल जिले में वंधामा गांव में आतंकी पहुंचे. यहां उन्होंने कश्मीरी पंडितों के घरों को निशाना बनाया. उस रात आतंकियों ने चार बच्चों और 9 महिलाओं समेत कुल 23 कश्मीरी पंडितों की बेरहमी से हत्या कर दी थी. हमला मुस्लिम त्योहार शब-ए-कद्र की रात किया गया था.
टीका लाल टपलू कश्मीर के जाने-माने कश्मीरी पंडित नेता और जम्मू-कश्मीर भाजपा के उपाध्यक्ष थे. 13 सितंबर 1989 को आतंकियों ने श्रीनगर में उनके घर के पास उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी. टीका लाल टपलू के अंतिम संस्कार में वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी और केदार नाथ साहनी भी शामिल हुए थे. टीका टपलू की शव यात्रा में भी आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों पर पथराव किया था.
सूत्रों के मुताबिक, SIA ने जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या की भी जांच तेज कर दी है. जस्टिस नीलकंठ गंजू वह जज थे जिन्होंने JKLF आतंकी मकबूल भट को मौत की सजा सुनाई थी. जस्टिस नीलकंठ गंजू की हत्या JKLF के आतंकियों ने की थी. बताया जाता है कि वे आतंकियों की हिटलिस्ट में थे. आतंकियों ने उनके घर में बम फेंका था.
4 नवंबर 1989 को श्रीनगर की हरि सिंह स्ट्रीट पर JKLF के आतंकियों ने जस्टिस नीलकंठ गंजू की गोली मारकर हत्या कर दी थी. हत्या के बाद उनका शव घंटों तक सड़क पर पड़ा था. आतंकियों ने धमकी दी थी कि कोई भी उनके शव को न उठाए, इसलिए कोई जल्दी शव के पास नहीं जाना चाह रहा था. नीलकंठ गंजू की हत्या के मामले में भी SIA ने जांच तेज कर दी है.