जातिगत आरक्षण में बदलाव की मांग को लेकर चल रहे विरोध के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अजय आलोक के बयान ने सियासी बहस तेज कर दी है. अजय आलोक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2019 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी EWS को 10% आरक्षण देकर सामान्य वर्ग की चिंताओं को दूर किया. उन्होंने OBC आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और रोहिणी आयोग के जरिए OBC में सब-कैटेगरी की कोशिशों का भी जिक्र किया.
अजय आलोक ने UGC के इक्विटी नियमों और आरक्षण विरोधी आंदोलन को लेकर कहा कि इसे जातिगत विभाजन बढ़ाने और हिंदू समाज को कमजोर करने की कोशिश के तौर पर देखा जाना चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि जब रोहिणी आयोग ने पाया कि कई पिछड़ी जातियों तक आरक्षण का लाभ पर्याप्त रूप से नहीं पहुंचा, तो बहस उन समुदायों तक लाभ पहुंचाने पर क्यों नहीं होनी चाहिए.
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आरक्षण सुधार आंदोलन ने किया पलटवार
अजय आलोक के बयान पर आरक्षण सुधार की मांग कर रहे कार्यकर्ताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी. 'रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन' से जुड़े लोगों ने सवाल उठाया कि अगर आरक्षण सामान्य वर्ग को प्रभावित करता है, तो फिर सामान्य वर्ग के लोगों को इसके पुनर्विचार की मांग करने का अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए.
कार्यकर्ताओं ने अजय आलोक के पुराने बयानों का हवाला देते हुए पूछा कि अगर किसी समुदाय से जुड़े मुद्दे पर सिर्फ उसी समुदाय को बोलने का अधिकार है, तो उन्होंने ट्रिपल तलाक और निकाह हलाला जैसे मुद्दों पर अपनी राय क्यों रखी.
UGC नियमों से शुरू हुआ विवाद
UGC के 2026 इक्विटी नियमों को लेकर भी विवाद चल रहा है. इन नियमों का मकसद उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना था, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों और कुछ संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में इन नियमों पर रोक लगाते हुए कुछ प्रावधानों को पहली नजर में अस्पष्ट और दुरुपयोग की आशंका वाला बताया था.
इसके बाद आरक्षण व्यवस्था में बदलाव, आर्थिक आधार को अधिक महत्व देने और क्रीमी लेयर जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन तेज हुआ. 21 अगस्त को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हजारों लोगों ने प्रदर्शन किया और आरक्षण व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई.
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BJP के लिए बढ़ी राजनीतिक चुनौती
मामला अब राजनीतिक रूप भी ले रहा है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान और रामदास आठवले आरक्षण खत्म करने की मांग का विरोध कर चुके हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी मांगें बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने की बात कही है.
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा बीजेपी के लिए खासा संवेदनशील हो सकता है. ऐसे में अजय आलोक के बयान ने पार्टी के सामने सामान्य वर्ग की नाराजगी और आरक्षण को लेकर उसकी पारंपरिक सामाजिक न्याय की राजनीति के बीच संतुलन की चुनौती बढ़ा दी है.