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Beat Report: बाड़मेर HRRL रिफाइनरी हादसे में NIA जांच शुरू, सुरक्षा व्यवस्था और स्पार्क अरेस्टर पर उठे सवाल

राजस्थान के बाड़मेर में HRRL की क्रूड डिस्टलेशन यूनिट के पास हुई दुर्घटना की जांच केंद्र की जांच एजेंसियां कर रही हैं. NIA की टीम और खुफिया विभाग के अधिकारी घटनास्थल पर जांच कर रहे हैं. रिफाइनरी में सुरक्षा के लिए CISF के करीब 100 जवान तैनात हैं. स्पार्क अरेस्टर जैसे फायर सेफ्टी उपकरणों की भी जांच की जा रही है.

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बाड़मेर की रिफायनरी में जबरदस्त आग लगी थी. (Photo- ITGD)
बाड़मेर की रिफायनरी में जबरदस्त आग लगी थी. (Photo- ITGD)

राजस्थान के बाड़मेर में HPCL राजस्थान रिफायनरी लिमिटेड (HRRL) की क्रूड डिस्टलेशन यूनिट के पास हुई घटना को केंद्र की जांच एजेंसियां हल्के में नहीं ले रही हैं. इस घटना की गंभीरता को देखते हुए एक टीम बनी है जो हादसे की जानकारी जुटाने के लिए काम कर रही है.

उधर NIA सूत्रों ने आजतक को जानकारी दी है कि एक NIA की टीम जयपुर से बाड़मेर भेजी गई है. ये टीम शुरुआती दौर में तमाम तथ्यों की छानबीन कर रही है. सूत्रों ने ये भी बताया कि इस टीम में खुफिया विभाग के अधिकारियों के साथ-साथ एनआईए की फोरेंसिक एक्सपर्ट और साइबर एक्सपर्ट से जुड़े हुए हैं. 

सुरक्षा महकमा के सूत्रों ने ये भी बताया है कि इस रिफाइनरी की सुरक्षा तीन लेयर में CISF के कमांडोज करते हैं. CISF गेट पर एक्सेस कंट्रोल देती है और इस रिफाइनरी के अंदर गाड़ियों के जाने की इजाजत न के बराबर होती है. 

रिफाइनरी में सिर्फ दो से तीन गाड़ियां ही जाती हैं, जिनकी जरूरत होती है.  इनमें फायर सेफ्टी डिवाइस भी लगा होता है. गाड़ियों में किसी भी तरीके का इंजन स्टार्ट होते समय स्पार्क ना हो इसलिए स्पार्क अरेस्टर लगा होता है. इन तमाम चीजों की भी सुरक्षा एजेंसियां इस वक्त तहकीकात कर रही हैं.

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सूत्रों की माने तो अभी रिफाइनरी में शिफ्ट वाइज CISF के करीब कुल 100 जवानों को तैनात किया गया. ये लगातार सिक्योरिटी कर रहे हैं और जांच एजेंसियों की टीम हर एक पहलू की जांच कर रही है. फायर विंग CISF के पास नहीं है. ये रिफायनरी HPCL मैनेज करती है.

स्पार्क अरेस्टर रिफाइनरी के अंदर कैसे काम करता है?

रिफाइनरी के अंदर वाहनों (जैसे ट्रक, टैंकर, फोर्कलिफ्ट) में स्पार्क को कंट्रोल करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला स्पार्क अरेस्टर एक जरूरी फायर सेफ्टी डिवाइस है. इसका काम इंजन के एग्जॉस्ट सिस्टम (साइलेंसर) से निकलने वाली गर्म चिंगारियों या कार्बन के कणों को रिफाइनरी के ज्वलनशील वातावरण में फैलने से पहले ही बुझाना या फंसाना है.

रिफाइनरी में स्पार्क अरेस्टर जलते हुए कार्बन कण को साइलेंसर से बाहर नहीं निकलने देता. ये चिंगारी को बुझाकर रिफाइनरी में आग या विस्फोट की संभावना को खत्म करता है. ज्यादातर स्पार्क अरेस्टर अपकेंद्री बल (Centrifugal Principle) पर काम करते हैं. 

जब एग्जॉस्ट गैसें अरेस्टर के अंदर से गुजरती हैं, तो ये गर्म कणों को अंदर की दीवारों से टकराकर घुमाता है, जिससे वो ठंडे होकर राख बन जाते हैं. ये आमतौर पर स्टेनलेस स्टील की मजबूत जाली या एक मेटल बॉक्स होता है, जिसे साइलेंसर के आखिर में बोल्ट या वेल्डिंग के जरिए लगाया जाता है.

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रिफाइनरी, तेल और गैस भंडारण और दूसरे विस्फोटक-संवेदनशील क्षेत्रों में जाने वाले वाहनों के लिए स्पार्क अरेस्टर लगाना जरूरी है. 

पीएम मोदी का कार्यक्रम टला

बता दें कि सोमवार को HRRL रिफाइनरी में क्रूड डिस्टलेशन यूनिट के पास हुई दुर्घटना हो गई थी. इसकी वजह से प्रधानमंत्री का 21 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित रिफाइनरी उद्घाटन कार्यक्रम भी स्थगित कर दिया गया. पीएम मोदी को बालोतरा जिले के पचपदरा में देश की पहली ग्रीन फील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी से पेट्रोकेमिकल परिसर को राष्ट्र को समर्पित करने वाले थे. पेट्रोलियम मंत्रालय की मानें तो उद्घाटन की नई तारीख की घोषणा जल्द की जाएगी.

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