महाराष्ट्र की सियासत में 'ऑपरेशन टाइगर' पर गहराते संकट के बीच शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत डैमेज कन्ट्रोल करने के लिए आए थे, लेकिन पार्टी में टूट के संकेत के देने के साथ कई राज खोल गए. संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉफ्रेंस करते हुए कहा कि पार्टी से बेइमानी करने वालों को छोड़ेंगे नहीं. उन्होंने कहा कि जिन्हें दूसरी पार्टी में जाना है, वह पहले इस्तीफा दें.
शिवसेना (यूबीटी) के 9 लोकसभा सांसद 2024 में जीतकर आए हैं,जिसमें से 6 सांसदों के टूट की संभावना जतायी जा रही है. 'ऑपरेशन टाइगर' के तहत उद्धव ठाकरे का साथ छोड़कर एकनाथ शिंदे के साथ जाने के कयास लगाए जा रहे हैं. ऐसे में उद्धव ठाकरे ने रविवार को अपने आवास मातोश्री पर सभी सांसदों की बैठक बुलाई थी, जिसमें क्या-क्या हुआ है, इन सारी बातों का खुलासा संजय राउत ने दिल्ली में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान किया.
संजय राउत ने बताया कि अभी मानता हूं कि हमारे सभी सांसद साथ हैं. उन्होंने कहा कि हमने सांसदों से बात की है. मातोश्री में एक बैठक में 5 सांसद मौजूद थे, जबकि बाकी सांसद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े थे. इस दौरान सभी सांसदों ने पार्टी साथ रहने की कसम खाई थी, लेकिन उसके बाद कोई पार्टी छोड़ रहा है, उसे छोड़ेंगे नहीं?
उद्धव ने पहले अपने सांसदों की ली हाजरी
ऑपेरशन टाइगर की चर्चा के बीच उद्धव ठाकरे ने रविवार को शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसदों की मीटिंग बुलाई थी, जिसमें पार्टी के चार लोकसभा के सांसद पहुंचे थे और पांच सांसद गैर हाजिर रहे हैं. अरविंद सावंत, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और संजय पाटिल ही पहुंचे थे.
वहीं, पांच लोकसभा सांसद भाऊसाहेब वाकचौरे,ओमप्रकाश राजे निंबालक,नागेश बापूराव पाटिल अष्टिकर और संजय देशमुख मातोक्षी की मीटिंग में नहीं पहुंचे थे. कहा जाता है कि ये सांसद वर्चुअल मीटिंग में जुड़े थे और पांचवें सांसद संजय जाधव ने फोन पर बातचीत कर हाजिरी लगाई. इस तरह से उद्धव ने सभी सांसदों की हाजिरी ली थी.
'उद्धव के सामने सांसद ने खाई थी कसम'
संजय राउत ने बुधवार को दिल्ली में प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान बताया कि रविवार को मातोश्री में हुई बैठक में पांच सांसद पहुंचे थे और बाकी सांसद वर्चुअल जुड़े थे. इस दौरान कुछ सांसदों ने साईं बाबा, तो कुछ सांसदों ने मां भवानी और कुछ ने अपनी मां और बेटे की की शपथ (कसम) ली थी कि पार्टी को नहीं छोड़ेंगे. इसके बाद भी अगर कोई दंगा देता है तो उसको छोड़ेंगे नहीं.
संजय राउत ने कहा कि सभी 9 सासंद हमारी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए हैं. उद्धव ठाकरे ने उन्हें जिताने के लिए दिन-रात एक कर दिया. हमने उन्हें जितना हो सका, संसाधन दिए. हमारे सांसद शिवसेना के चुनाव चिह्न मशाल पर चुने गए थे, जिसके नेता उद्धव ठाकरे हैं. वे पीएम मोदी के नाम पर नहीं जीते हैं. ऐसे में अगर अब कोई पाला बदलता है, तो हम किसी को नहीं छोड़ेंगे, अगर जिन्हें जाना है, वो इस्तीफा देकर जा सकते हैं. इससे साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा टला नहीं है.
उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बरकरार
यूबीटी में बगावत की अटकलों के बीच दिल्ली में संजय राउत के आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अरविंद सावंत और चीफ व्हिप अनिल देसाई और नासिक के सांसद राजाभाऊ मौजूद थे. इस तरह शिवेसना (यूटीबी) के 9 में से 3 लोकसभा सांसद ही पहुंचे थे, 6 सांसद नहीं थे. इसके मतलब साफ है कि उद्धव की पार्टी में टूट का खतरा बना हुई है.
दिलचस्प बात यह है कि उद्धव ठाकरे जिस दिन रविवार को मातोश्री में बैठक कर रहे थे, उसी दिन शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय देशमुख ने दिल्ली में एकनाथ शिंदे खेमे के मंत्री प्रताप राव जाधव से मुलाकात कर रहे थे. प्रताप जाधव ने आजतक से बात में कहा है कि शिवसेना (यूबीटी) के सभी सांसद हमारे दोस्त हैं, हमने साथ में काम किया है. इनमें कुछ सांसद अपनी पार्टी नेतृत्व से खुश नहीं है.
प्रताप जाधव कहते हैं कि शिवसेना (यूबीटी) के सांसद उसी तरह से पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं, जैसे टीएमसी के सांसद थे. शिंदे के अगुवाई वाली ही शिवसेना असली शिवसेना हैं, जो बालासाहेब ठाकरे के सिद्धांतों पर काम कर रही है. यूबीटी के सभी सांसदों का हमारी पार्टी में स्वागत है. संजय राउत के बात भी जाहिर होता है कि उनके कुछ सांसद बागी रुख अख्तियार कर चुके हैं. इस तरह उद्धव की पार्टी में टूट तय है, लेकिन ये बात सामने नहीं आ रही है कि कितने सांसदों ने उद्धव का छोड़कर शिंदे के साथ जाने का फैसला किया है?
चार साल पहले भी राउत दावा ही करते रहे...
साल 2022 में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे से सत्ता और पार्टी दोनों ही छीन ली थी.चार साल पहले पार्टी में बड़ी फूट पड़ी थी, जब 40 विधायक अलग हो गए थे. उस समय उद्धव ठाकरे ही राज्य के मुख्यमंत्री थे. इसके बाद भी शिंदे ने शिवसेना के 40 विधायकों को लेकर गोवा के रास्ते असम निकल गए थे. शिवसेना नेता संजय राउत ने उस समय भी ट्वीट कर बागी विधायकों पर तंज कसा था.
संजय राउत ने कहा था कि कब तक छिपोगे गुवाहाटी में, आना पड़ेगा चौपाटी में. संजय राउत ने इससे पहले भी बागी विधायकों को लेकर कार्रवाई की चेतावनी दी थी. इस तरह राउत सिर्फ धमकी ही देते रहे और सत्ता और सियासत दोनों ही गंवा दी थी. अब फिर से उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) सांसदों के टूट का खतरा मंडराने लगा है और संजय राउत चेतावनी देते नजर आ रहे हैं.
शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे के 6 लोकसभा सांसदों ने डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना को अपना समर्थन दे सकते हैं. पार्टी के ये सांसद संजय जाधव , संजय देशमुख, नागेश पाटिल अष्टिकर , ओमराजे निंबालकर, भाऊसाहेब वाकचौरे और संजय दीना पाटिल हो सकते हैं?