प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से टेलीफोन पर बातचीत की. बातचीत के दौरान ईरानी राष्ट्रपति ने पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों और आगे की स्थिति को लेकर प्रधानमंत्री मोदी को जानकारी दी. प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में बनी समझ का स्वागत किया और कहा कि भारत लगातार यह मानता रहा है कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए ही होना चाहिए.
प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास जारी रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया. इसके साथ ही उन्होंने समुद्री मार्गों पर आवागमन और व्यापार की स्वतंत्रता सुरक्षित बनाए रखने की अहमियत भी दोहराई. हालिया क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद ईरान के साथ भारत उच्चस्तरीय राजनीतिक संपर्क और बहुपक्षीय मंचों के जरिए लगातार करीबी कूटनीतिक संवाद बनाए हुए है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के बीच हुई बातचीत को भी इसी कड़ी में देखा जा रहा है. इस बीच, ईरान ने प्रधानमंत्री मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था. अयातुल्ला खामेनेई की हालिया संघर्ष के दौरान अमेरिका-इजरायल के हमले में मौत हो गई थी.
भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा अंतिम संस्कार समारोह में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे. ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, सार्वजनिक श्रद्धांजलि समारोह 4 जुलाई को स्थानीय समयानुसार सुबह 6 बजे तेहरान के इमाम खुमैनी ग्रैंड प्रेयर ग्राउंड्स में शुरू होगा. इसी समय से आम लोगों के लिए भी स्थल खोल दिया जाएगा.
युद्ध के दौरान भी भारत ने ईरान से बनाए रखा संपर्क
पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच संघर्ष के दौरान क्षेत्रीय तनाव लगातार बढ़ता रहा, लेकिन भारत ने ईरान के साथ अपने कूटनीतिक संपर्क बनाए रखे. उच्चस्तरीय राजनीतिक संवाद, रणनीतिक बैठकों और मानवीय सहयोग के जरिए नई दिल्ली ने तेहरान के साथ कई स्तरों पर बातचीत जारी रखी. संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से दो बार बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच क्षेत्रीय हालात, शांति, स्थिरता और संवाद की जरूरत पर चर्चा हुई.
विदेश मंत्री एस जयशंकर भी अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची के लगातार संपर्क में रहे. संघर्ष के दौरान दोनों नेताओं के बीच पांच से अधिक बार बातचीत हुई. इन चर्चाओं में क्षेत्रीय हालात, भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और तनाव कम करने के प्रयासों पर फोकस रहा. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने भारत भी आए. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और विदेश मंत्री जयशंकर के साथ द्विपक्षीय वार्ता की. ईरान के उप विदेश मंत्री डॉ. सईद खतिबजादेह भी रायसीना डायलॉग में हिस्सा लेने नई दिल्ली पहुंचे, जहां वह प्रमुख वक्ताओं में शामिल रहे.
इसके अलावा ईरान ने अपनी सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि को भारत में आयोजित BRICS राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक में भेजा. इस दौरान ईरानी प्रतिनिधि ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवाल के साथ क्षेत्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मुद्दों पर द्विपक्षीय चर्चा की. क्षेत्रीय संघर्ष के बावजूद ईरान ने भारत द्वारा आयोजित BRICS ऊर्जा मंत्रियों की बैठक समेत कई बहुपक्षीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेना जारी रखा, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग की निरंतरता दिखाई दी.