प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर 12 वर्ष पूरा करने पर देश की जनता को नमन किया है इसके साथ ही धीमी विकास दर के लिए उन्होंने कांग्रेस को फटकार लगाई है. पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस राज में धीमी विकास की रफ्तार को बड़ी चतुराई से 'हिंदू ग्रोथ रेट' का नाम दे दिया गया. पीएम मोदी ने कहा कि ये कार्यशैली कांग्रेस की थी, दायित्व कांग्रेस का था, असफलता कांग्रेस की थी लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया. जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट.
दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि "2014 के पहले के कई दशक बहुत अस्थिरता और उथल-पुथल से भरे हुए थे. इसका देश को बहुत नुकसान भी उठाना पड़ा लेकिन अब देश की जनता एक स्थिर सरकार का काम भी देख रही है और उसकी निर्णायक क्षमताओं की प्रशंसक भी है. मैं आज देश की महान जनता को नमन करता हूं, जनता-जनार्दन का आभार व्यक्त करता हूं."
पीएम मोदी ने NDA शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और उपमुख्यमंत्रियों को संबोधित करते हुए कहा कि साल 2014 में जब NDA की जीत हुई थी तब मैंने कहा था कि आज देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ है. इस आशा का इस उम्मीद का संरक्षण हम सभी का बहुत बड़ा दायित्व था. देश के लोगों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद अपने भरोसा हमें सौंपा था. मुझे आज संतोष है गर्व है कि NDA परिवार के तौर पर हमने देश के विश्वास को हमेशा और मजबूत किया है."
विफलता कांग्रेस की, कलंक हिन्दू आबादी के नाम...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने NDA के 12 वर्षों की सफलता को गिनाते हुए कहा कि देश कांग्रेस के कुचक्र से आजाद हुआ है. कांग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीन भावना के गर्त में गिरा दिया था.
उन्होंने आगे कहा, "देश को यह एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है, भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है और बड़ी ही चतुराई से धीमी विकास को एक नाम दिया था, 'हिंदू ग्रोथ रेट' यानी कार्यशैली कांग्रेस की, दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की लेकिन कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया जबकि असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था कांग्रेस ग्रोथ रेट. इस कांग्रेस ग्रोथ रेट में न सुशासन था, न नीति, न नीयत और ना निर्णय."
2004 की NDA की हार को याद करते हुए आगे PM मोदी ने कहा कि, "पहली बार अटल जी के नेतृत्व में NDA सरकार आई तब जाकर हमें एक झलक दिखी कि विकास में गति कैसे आती है लेकिन दुर्भाग्य से 2004 में देश फिर से अस्थिरता के बवंडर में और कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया. विकास तो दूर की बात है, देश को कांग्रेस ने एक के बाद एक हजारों करोड़ों रुपये के घोटालों में घसीट दिया. देश का भाग्य फिर तब बदला जब 2014 में NDA की सरकार बनी. देश ने देखा कि जब नीयत, नीति और निर्णय तीनों एक साथ काम करते हैं तो विकास की गति कैसी होती है..."
ये 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'NDA ग्रोथ रेट' का अंतर है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सवाल ये है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये 'कांग्रेस ग्रोथ रेट' और 'NDA ग्रोथ रेट' का अंतर है. एक व्यवस्था लोगों को इंतजार कराती थी. आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है. एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी. आज की व्यवस्था कहती है, काम अभी होगा, समय पर होगा और बड़े पैमाने पर होगा और इसलिए 2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है, ये उस भारत की कहानी है जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना तय किया है..."
पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना के समय में जब हर तरह हाहाकार मचा हुआ था तो भारत ने उस हालत का सफलता से मुकाबला किया और आगे बढ़ा. पीएम मोदी ने कहा कि जब दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं तो भारत 7.7 प्रतिशत से आगे बढ़ रहा है. ये सफलता इतनी आसान नहीं है. कल के विकसित भारत की गारंटी है आज का आकांक्षी भारत.
हिन्दू विकास दर क्या है?
हिन्दू विकास दर भारतीय अर्थव्यवस्था की उस धीमी वृद्धि को कहा जाता है जो स्वतंत्रता के बाद लगभग 1950 से 1980 के दशक तक चली. इस अवधि में भारत की औसत वार्षिक जीडीपी वृद्धि दर तीन से साढ़े 3 प्रतिशत के आसपास रही, जबकि प्रति व्यक्ति आय वृद्धि 1.3 प्रतिशत से भी कम थी.
समाजवादी नीतियां, लाइसेंस राज, अत्यधिक सरकारी नियंत्रण, नौकरशाही और बंद अर्थव्यवस्था को धीमी विकास दर की वजह बताई जाती है. इन नीतियों ने उद्यमिता को कुचल दिया प्रतिस्पर्द्धा की भावना पनपने नहीं दी, उत्पादकता बढ़ने नहीं दी. 1990-91 के आर्थिक आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत इस दर को पार कर गया और तेज विकास की राह पर बढ़ा.