किसी से पूछिए कि वह अपनी मां के लिए क्या कर सकता है? कोई कहेगा कि उनके साथ वक्त बिताऊंगा, कोई कहेगा कि उनकी हर ख्वाहिश पूरी करूंगा. लेकिन बिहार के पटना में रहने वाले 20 साल के मोनू बिथोराबाला ने अपनी मां के लिए जो किया, उसकी कहानी थोड़ी अलग है. मोनू ने मां की सेहत के लिए भगवान शिव से एक मन्नत मांगी. फिर उस मन्नत को पूरा करने के लिए घर से निकल पड़ा. संकल्प लिया कि देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन करेगा, वो भी पैदल नहीं बल्कि दौड़ते हुए.
15 मार्च 2026 को शुरू हुआ मोनू का यह सफर अब तक 9 हजार किलोमीटर से ज्यादा लंबा हो चुका है. आठ महीने में मोनू सात ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुका है. अब गुरुवार 5 नवंबर को वह उज्जैन पहुंचा. यहां बाबा महाकाल के दर्शन किए. यह उसकी यात्रा का आठवां ज्योतिर्लिंग है.
मोनू ने बताया कि कुछ साल पहले उसकी मां की तबीयत खराब रहने लगी थी. उनका लंबे समय तक इलाज चला, लेकिन कुछ महीने बीतते ही फिर उनकी सेहत बिगड़ जाती थी. परिवार बार-बार अस्पताल और इलाज के चक्कर काटता था. एक वक्त ऐसा भी आया जब मोनू को लगा कि कहीं मां का साथ हमेशा के लिए न छूट जाए. मां की यह हालत देखकर वह काफी परेशान था.
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तभी उसने अपने गांव से करीब 50 किलोमीटर दूर बाबा सिद्धेश्वर के मंदिर जाकर प्रार्थना की. मोनू ने भगवान शिव से मां की सेहत ठीक रहने की मन्नत मांगी. मोनू के मुताबिक, इसके बाद करीब एक साल तक मां की तबीयत में कोई बड़ी परेशानी नहीं आई. इस अनुभव ने मन में एक संकल्प पैदा किया. उसने तय किया कि वह देश के सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन दौड़कर करेगा.
झारखंड से शुरू हुई यात्रा, अब तक 9 हजार KM का सफर
मोनू ने 15 मार्च 2026 को झारखंड के बाबा बैद्यनाथ धाम से अपनी यात्रा शुरू की थी. इसके बाद से वह लगातार अलग-अलग राज्यों और रास्तों से गुजरते हुए ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर रहा है. आठ महीने में वह 9 हजार किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर चुका है. अब तक सात ज्योतिर्लिंगों के दर्शन कर चुका मोनू उज्जैन पहुंचा है. यहां बाबा महाकाल के दर्शन किए. उज्जैन पहुंचने से पहले मोनू इंदौर रोड स्थित शनि मंदिर भी गया. वहां उसने दर्शन और पूजा की. इसके बाद वह उज्जैन में अपनी यात्रा के अगले पड़ाव पर पहुंचा.
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मोनू का कहना है कि 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा पूरी करने में उसे अभी करीब नौ महीने और लग सकते हैं. यानी मां के लिए शुरू हुआ यह सफर अभी कई महीनों तक जारी रहेगा. इस दौरान उसे अलग-अलग रास्तों, मौसम और सफर की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मोनू अपने संकल्प को पूरा करने में जुटा है.
सोशल मीडिया पर भी उसकी यात्रा के वीडियो आ रहे हैं. मोनू अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर सफर से जुड़ी जानकारी और वीडियो शेयर करता रहता है. मोनू की उम्र 20 साल है. उस उम्र में उसने अपनी मां के लिए ऐसा संकल्प लिया और हजारों किलोमीटर का सफर दौड़कर तय किया. इस वजह से कुछ लोग उसे कलयुग का श्रवण कुमार कह रहे हैं.