दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शन के दौरान मंच पर नारे थे और राजनीतिक बयान भी थे, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा किसी नेता की नहीं हुई. भीड़ में खड़ा एक साधारण-सा युवक अचानक कैमरे के सामने आया और कुछ मिनटों में वायरल होकर सबका ध्यान अपनी ओर खींच ले गया. यह युवक था मोहम्मद इरफान. न उसने कभी न किताबें पढ़ीं, ना संविधान पढ़ा और न किसी विश्वविद्यालय में गया. फिर भी लोकतंत्र, संविधान, टैक्स, मजदूरों के अधिकार और इंसानी गरिमा पर उसने इतनी सहजता से बात की कि लाखों लोग उसका वीडियो बार-बार देखने लगे. लोगों को सबसे ज्यादा हैरानी इस बात की हुई कि जो व्यक्ति रोज बर्फ बेचकर करीब 500 रुपये कमाता है, वह आखिर इतनी गहरी बातें कहां से सीखकर आया.
इरफान की वो कहानी जो हर कोई जानना चाह रहा
सीजेपी का प्रदर्शन चल रहा था. प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद वहां मौजूद लोगों से बातचीत की जा रही थी. 'द लल्लनटॉप' के पत्रकार रजत पांडे उस दिन प्रदर्शन को कवर करने पहुंचे थे. उन्हें उम्मीद थी कि बाकी आंदोलनों की तरह यहां भी राजनीतिक बयान और नारेबाजी देखने को मिलेगी. इसी दौरान नीली टी-शर्ट पहने एक युवक 'द लल्लनटॉप' के कैमरे के सामने आया और अपनी बात रखना शुरू किया. कुछ ही मिनटों की बातचीत में उसने लोकतंत्र, संविधान, मजदूरों की जिंदगी, सम्मान और समाज जैसे विषयों पर अपने विचार रखे. उसकी भाषा कठिन नहीं थी, लेकिन बात सीधी दिल तक पहुंच रही थी. यही वजह रही कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया. देखते ही देखते लाखों लोग यह जानना चाहते थे कि आखिर यह मोहम्मद इरफान कौन है.
आजतक से बातचीत में रजत पांडे ने कहा कि इरफान की बातें सुनते समय उनके रोंगटे खड़े हो गए थे. उनके मुताबिक लोग अक्सर विचारों की बातें करते हैं, लेकिन इरफान जो कह रहे थे, वह उनकी अपनी जिंदगी का अनुभव था. शायद यही वजह थी कि वह बिना रुके लगातार बोलते रहे. रजत पांडे ने इसे अपने पत्रकारिता जीवन के सबसे यादगार इंटरव्यू में से एक बताया.
पढ़ाई नहीं की, फिर इतनी जानकारी कैसे?
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही था कि आखिर मोहम्मद इरफान ने इतनी जानकारी कहां से हासिल की. इरफान खुद बताते हैं कि वह कभी नियमित स्कूल नहीं गए. उन्होंने प्राथमिक शिक्षा भी पूरी नहीं की. वह मोबाइल पर टाइप तक नहीं कर पाते. उनका कहना है कि वह केवल अपनी बस्ती के आंगनवाड़ी केंद्र तक ही पढ़ पाए थे. इसके बाद जिंदगी की जिम्मेदारियों ने उन्हें पढ़ाई से दूर कर दिया. यही वजह है कि लोग यह जानकर और भी हैरान हुए कि जिस व्यक्ति ने कभी स्कूल की कक्षा नहीं देखी, वही संविधान और लोकतंत्र पर इतनी सहज भाषा में बात कर रहा है.
गूगल, यूट्यूब और इंटरनेट बने शिक्षक
मोहम्मद इरफान अपनी सीखने की कहानी भी बड़े दिलचस्प अंदाज में बताते हैं. वह कहते हैं कि उनका विश्वविद्यालय कोई कॉलेज नहीं बल्कि गूगल, यूट्यूब और इंटरनेट है. चूंकि वह टाइप नहीं कर सकते, इसलिए गूगल के वॉयस सर्च का इस्तेमाल करते हैं. जो जानना होता है, उसे बोलकर खोजते हैं. फिर यूट्यूब पर वीडियो सुनते हैं और अलग-अलग लोगों की बातें समझने की कोशिश करते हैं. धीरे-धीरे उन्होंने संविधान, लोकतंत्र, श्रम कानून, सामाजिक न्याय और सार्वजनिक नीतियों के बारे में जानकारी जुटाई.
भगत सिंह की पंक्तियां भी सुनाईं
वायरल इंटरव्यू के दौरान इरफान ने केवल संविधान की बात नहीं की. उन्होंने भगत सिंह की कविताओं की पंक्तियां भी सुनाईं. उनके विचारों में लोकतंत्र, समानता और इंसानी गरिमा का जिक्र बार-बार आया. यही वजह रही कि सोशल मीडिया पर लोगों ने उनकी तुलना किसी राजनीतिक विश्लेषक से नहीं, बल्कि ऐसे आम नागरिक से की जिसने अपनी जिंदगी के अनुभवों से सोच विकसित की.
दिल्ली की पुनर्वास कॉलोनी में रहता है यह चर्चित चेहरा
मोहम्मद इरफान दिल्ली की सावदा जेजे पुनर्वास कॉलोनी में रहते हैं. सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद 'द लल्लनटॉप' की टीम उनके घर भी पहुंची. वहां एक अधूरा मकान मिला, जिसकी छत का काम अभी पूरा नहीं हुआ था. घर के कई हिस्से निर्माणाधीन थे. मेहमानों के आने से पहले इरफान ने घर में परफ्यूम छिड़का. वजह पूछने पर उन्होंने बताया कि घर के पास बंधे जानवरों की गंध से कहीं मेहमानों को परेशानी न हो.
बर्फ बेचकर चलाते हैं परिवार
जिस व्यक्ति की बातें पूरे देश में सुनी जा रही हैं, उसकी रोजमर्रा की जिंदगी आज भी संघर्ष से भरी है. इरफान बर्फ बेचने का काम करते हैं. उनका कहना है कि रोज करीब 500 रुपये की कमाई होती है. इसी से परिवार चलता है. वह कहते हैं कि अगर घर में किसी की तबीयत खराब हो जाए तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि इलाज का खर्च कहां से आएगा. उनके मुताबिक गरीबी केवल कम आय नहीं होती. असली चुनौती यह होती है कि क्या कोई अपने बच्चों को पढ़ा सकता है, सम्मान से रह सकता है और मुश्किल समय का सामना कर सकता है.
मजदूरों की बात सबसे ज्यादा क्यों करते हैं?
इरफान का कहना है कि वह किसी राजनीतिक पहचान के लिए आंदोलन में नहीं गए थे. उनके अनुसार देश में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की समस्याओं पर बहुत कम चर्चा होती है. वह कहते हैं कि मजदूर विरोध इसलिए नहीं कर पाता क्योंकि अगर एक दिन काम नहीं करेगा तो घर में चूल्हा नहीं जलेगा. इसी वजह से उन्होंने मजदूरों की मजदूरी, काम के घंटे और जीवन स्तर का मुद्दा उठाया. उनका मानना है कि आठ घंटे काम करने वाले मजदूर को सम्मानजनक वेतन मिलना चाहिए.
राहुल गांधी पहुंचे घर
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी खुद मोहम्मद इरफान के घर पहुंचे. दिल्ली की सावदा जेजे कॉलोनी में स्थित उनके घर पर राहुल गांधी ने उनसे लंबी बातचीत की. इस दौरान उन्होंने इरफान और उनके परिवार को संसद आने का निमंत्रण भी दिया. एक साधारण दिहाड़ी मजदूर के घर देश के बड़े राजनीतिक नेता का पहुंचना भी चर्चा का विषय बन गया. इरफान ने बताया कि राहुल गांधी ने मुलाकात के दौरान अपनी बहन और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी से भी फोन पर उनकी बात कराई. उनके मुताबिक उन्होंने प्रियंका गांधी से मजदूरों और गरीब परिवारों की समस्याओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि उनकी सबसे बड़ी चिंता देश के असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों की है, जिनकी आवाज अक्सर राष्ट्रीय बहस का हिस्सा नहीं बन पाती.
मोहम्मद इरफान का कहना है कि राहुल गांधी से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने लिए किसी तरह की व्यक्तिगत मदद नहीं मांगी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अगर कुछ करना है तो गरीबों, मजदूरों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने की दिशा में काम होना चाहिए. इरफान के मुताबिक उनकी लड़ाई किसी व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं बल्कि उन लोगों के लिए है जिनकी आवाज अक्सर दब जाती है.