हमने बेटे को देश को दे दिया है... पहले जब वह बाहर जाता था तो डर लगता था, अब लगता है कि वह लोगों की आवाज बन गया है. यह कहते-कहते मोहम्मद इरफान की मां की आंखें भर आती हैं. दूसरी ओर 77 वर्षीय पिता मुस्कुराते हुए कहते हैं, अच्छा लगता है कि बेटे का नाम हो रहा है. मैंने कभी उसे डांटा नहीं, बस यही कहता था कि कोई काम-धंधा कर लिया करो. मन का राजा है वो.
दिल्ली की सावदा जेजे पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले मोहम्मद इरफान का वीडियो आज हर कोई देख रहा है. जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान 'द लल्लनटॉप' के कैमरे के सामने उनकी कुछ मिनट की बातचीत ने उन्हें सोशल मीडिया का चर्चित चेहरा बना दिया. लेकिन इस वायरल चेहरे के पीछे संघर्ष, त्याग और परिवार की ऐसी कहानी है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस युवक को लोग आज संविधान, लोकतंत्र और मजदूरों के अधिकारों पर बोलते हुए सुन रहे हैं, उसने अपनी जिंदगी के सबसे बड़े फैसलों में भी परिवार को खुद से आगे रखा. यहां तक कि अपनी तय हो चुकी सगाई भी इसलिए तोड़ दी कि पहले छोटे भाई और बहनों की जिम्मेदारी पूरी हो सके.
पहले भाई-बहनों का घर बसाओ, फिर मेरी शादी करना
इरफान की मां बताती हैं कि परिवार ने उनकी शादी तय कर दी थी. सगाई भी हो गई थी. लेकिन तभी इरफान ने साफ कह दिया कि वह अभी शादी नहीं करेंगे. उन्होंने कहा,पहले छोटे भाई की शादी कर दीजिए. पहले बहनों की जिम्मेदारी पूरी कर लीजिए. मेरी शादी बाद में होगी. परिवार ने उन्हें समझाने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने अपना फैसला नहीं बदला. आखिरकार सगाई टूट गई. बाद में परिवार ने छोटे बेटे की शादी कर दी और अब दोनों बेटियों की जिम्मेदारी पूरी करने की तैयारी कर रहा है. मां कहती हैं कि बेटे ने कभी अपने बारे में पहले नहीं सोचा. हमेशा यही कहा कि परिवार की जिम्मेदारी पहले पूरी होनी चाहिए.
बेटे को देश को दे दिया
इरफान की मां कहती हैं, पहले हम मना करते थे कि वहां मत जाओ, यहां मत जाओ, लेकिन वह अपनी बात पर अड़ा रहता था. अब हमने उसे देश को दे दिया है. हमें अपने लिए कुछ नहीं चाहिए, बस देश में इंसाफ होना चाहिए. गरीबों को इंसाफ मिले, मजदूरों को इंसाफ मिले. इरफान के 77 वर्षीय पिता अब कम सुन पाते हैं, लेकिन बेटे का नाम सुनते ही चेहरे पर मुस्कान आ जाती है. वह कहते हैं, अच्छा लगता है कि बेटे का नाम हो रहा है. मैंने कभी उसे डांटा नहीं. बस यही कहता था कि कोई काम कर लिया करो. वह मन का राजा है. जो सही लगता है, वही करता है. पिता बताते हैं कि परिवार ने बेहद कठिन दौर देखा है, लेकिन बच्चों को कभी गलत रास्ते पर नहीं जाने दिया.
फल बेचे, माली का काम किया, झुग्गियां बनाईं, अब बर्फ बेच रहे हैं
इरफान का परिवार आज भी आर्थिक रूप से मजबूत नहीं है. उनके माता-पिता बताते हैं कि परिवार चलाने के लिए उन्होंने हर तरह का काम किया. कभी फल बेचकर घर चलाया. कभी माली का काम किया. कभी झुग्गियां बनाईं. जब झुग्गियां टूट गईं तो परिवार पर ऐसा संकट आया कि घर चलाने के लिए गहने तक बेचने पड़े. आज परिवार बर्फ बेचकर अपनी रोजी-रोटी चला रहा है. मां कहती हैं कि मुश्किलें बहुत आईं, लेकिन बच्चों को कभी गलत रास्ता नहीं अपनाने दिया. ईमानदारी से मेहनत करना ही सिखाया.
जिस वीडियो ने बदल दी जिंदगी
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन के दौरान 'द लल्लनटॉप' के पत्रकार रजत पांडे लोगों से बातचीत कर रहे थे. इसी दौरान नीली टी-शर्ट पहने इरफान कैमरे के सामने आए. बातचीत शुरू हुई तो कुछ मिनटों में ही उन्होंने लोकतंत्र, संविधान, मजदूरों के अधिकार, टैक्स और इंसानी गरिमा जैसे विषयों पर अपने विचार रखे. उनकी भाषा बिल्कुल सरल थी, लेकिन बात सीधे लोगों तक पहुंची. वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और देखते ही देखते लाखों लोग जानना चाहते थे कि आखिर यह मोहम्मद इरफान कौन हैं.
'रजत के बिना मैं अधूरा हूं'
वायरल होने के बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी खुद इरफान के घर पहुंचे. मुलाकात के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के कारण कई लोगों को बाहर रोक दिया गया. उसी समय इरफान ने सुरक्षाकर्मियों से कहा, रजत को अंदर आने दीजिए... मैं रजत के बिना अधूरा हूं. उन्होंने फिर आवाज लगाई, रजत, अंदर आ जाओ भाई.
राहुल गांधी से क्या कहा
राहुल गांधी ने इरफान और उनके परिवार से मुलाकात की. इस दौरान उन्होंने संसद आने का निमंत्रण भी दिया. इरफान की प्रियंका गांधी से भी फोन पर बात कराई गई. इरफान का कहना है कि उन्होंने इस मुलाकात में अपने लिए कोई मदद नहीं मांगी. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि अगर कुछ करना है तो गरीबों और मजदूरों के लिए किया जाए.