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केरल को 7% ग्रोथ की जरूरत, रोजगार के लिए बढ़ाना होगा निवेश: केएम चंद्रशेखर

चंद्रशेखर ने कहा कि केरल को अपने आर्थिक लक्ष्यों तक पहुंचने में समय और प्रयास लगेगा. इसके लिए राज्य के सभी लोगों, निजी क्षेत्र और अन्य हितधारकों के सामूहिक प्रयास की जरूरत होगी.

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केरल में 7% आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य (Photo-ITG)
केरल में 7% आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य (Photo-ITG)

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ 2026 में केरल राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय कैबिनेट सचिव केएम चंद्रशेखर ने कहा कि राज्य को रोजगार के नए अवसर पैदा करने और आर्थिक गति बनाए रखने के लिए हर साल 7% की आर्थिक विकास दर हासिल करने का लक्ष्य रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि इसके लिए राज्य में निवेश को बड़े स्तर पर बढ़ाने की जरूरत होगी.

चंद्रशेखर के मुताबिक, केरल की अर्थव्यवस्था के सामने कई चुनौतियां हैं. इनमें बढ़ता सार्वजनिक कर्ज, कम पूंजीगत व्यय, सेवाक्षेत्र की धीमी वृद्धि और बेरोजगारी प्रमुख हैं. उन्होंने कहा कि राज्य को आर्थिक नियोजन के पारंपरिक तरीके में बदलाव करते हुए ऐसे लक्ष्यों पर ध्यान देना होगा, जिनके नतीजों को मापा जा सके.

16 लाख करोड़ से 28 लाख करोड़ रुपये की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य

चंद्रशेखर ने कहा कि केरल का लक्ष्य मौजूदा कीमतों पर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद यानी GSDP को करीब 16 लाख करोड़ रुपये से बढ़ाकर 28 लाख करोड़ रुपये करना है. इसके लिए करीब 7% सालाना आर्थिक विकास दर हासिल करनी होगी. उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य अवास्तविक नहीं है, क्योंकि केरल ने 2004-05 से 2012-13 के बीच करीब 8% की वृद्धि दर्ज की थी. उन्होंने कहा कि देश भी 8% सालाना आर्थिक विकास दर की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहा है.

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हालांकि, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर निवेश की जरूरत होगी. चंद्रशेखर के अनुसार, केरल को हर साल अपने GSDP के करीब 28% के बराबर निवेश की जरूरत होगी, जबकि वर्तमान में पूंजीगत व्यय करीब 1.34% है.

निजी क्षेत्र और प्रवासी केरलवासियों की बढ़ेगी भूमिका

चंद्रशेखर ने कहा कि केवल राज्य सरकार के संसाधनों के जरिए इतना निवेश जुटाना संभव नहीं होगा. इसके लिए निजी क्षेत्र, स्थानीय निकायों, सहकारी संस्थाओं, प्रवासी केरलवासियों, सार्वजनिक-निजी भागीदारी और केंद्र सरकार से मिलने वाली राशि को एक साथ जोड़ना होगा.

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को बड़ी भूमिका निभानी होगी. साथ ही केरल को केंद्र से मिलने वाली धनराशि का अधिक प्रभावी तरीके से इस्तेमाल करने और केंद्रीय योजनाओं से अधिक फंड हासिल करने की क्षमता बढ़ानी होगी. राज्य की योजना प्रक्रिया में भी बदलाव किया जा रहा है. इसके तहत SMART मॉडल पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें योजनाएं विशिष्ट, मापने योग्य, हासिल करने योग्य, परिणाम आधारित और समयबद्ध होंगी.

कर्ज समस्या नहीं, उसका इस्तेमाल महत्वपूर्ण

केरल के बढ़ते कर्ज पर चंद्रशेखर ने कहा कि कर्ज लेना अपने आप में समस्या नहीं है. असली सवाल यह है कि कर्ज से जुटाई गई राशि का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि कर्ज का इस्तेमाल ऐसे क्षेत्रों में होना चाहिए, जहां से आय पैदा हो और भविष्य में कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त संसाधन तैयार हों. उनके मुताबिक, अगर कर्ज का इस्तेमाल राजस्व खर्च या ऐसे क्षेत्रों में किया जाता है, जहां से कोई आर्थिक रिटर्न नहीं मिलता, तो यह समस्या बन सकता है.

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उन्होंने बताया कि केरल का कर्ज उसके GSDP का करीब 35% है, जो राज्यों में सबसे अधिक है. हालांकि, उन्होंने कहा कि कर्ज को कम करने के लिए अचानक बड़े कदम उठाने के बजाय धीरे-धीरे सुधार की जरूरत है.

बेरोजगारी कम करना बड़ी चुनौती

चंद्रशेखर ने बेरोजगारी को केरल की सबसे बड़ी आर्थिक चुनौतियों में शामिल किया, उन्होंने राज्य में बेरोजगारी दर 29.8%, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर 12.5% होने का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य अगले पांच सालों में बेरोजगारी दर को आधा करना है. इसके लिए केरल को पारंपरिक औद्योगिकीकरण से आगे बढ़कर ऐसे क्षेत्रों पर ध्यान देना होगा, जिनमें बड़े पैमाने पर रोजगार और निवेश की क्षमता हो.

मेडिकल डिवाइस से AI और पर्यटन तक इन सेक्टर पर नजर

चंद्रशेखर ने रोजगार और निवेश बढ़ाने की क्षमता वाले कई क्षेत्रों का उल्लेख किया, इनमें मेडिकल डिवाइस, सोना, फर्नीचर, एविएशन, स्पेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाई-वैल्यू टूरिज्म, स्पोर्ट्स और क्रिएटिव इकोनॉमी शामिल हैं. उन्होंने बताया कि केरल में पहले से करीब 110 मेडिकल डिवाइस यूनिट मौजूद हैं, इसके अलावा राज्य में स्टार्टअप और छोटे उद्योगों का भी विस्तार हुआ है. उन्होंने कहा कि कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए केरल ने SERAL योजना और Invest Kerala सिंगल-विंडो सिस्टम जैसे कदम भी उठाए हैं.

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