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कोई 12वीं पास तो कोई कंपाउंडर... सूरत में 8 फर्जी डॉक्टर पकड़े गए, 10 साल से चला रहे थे क्लीनिक

सूरत के पांडेसरा इलाके में बिना मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज करने वाले 8 कथित फर्जी डॉक्टरों को गिरफ्तार किया गया है. सूरत एसओजी और हेल्थ डिपार्टमेंट ने इलाके के 8 क्लीनिकों पर छापेमारी की. पुलिस का कहना है कि ये लोग लंबे समय से खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज कर रहे थे. इनमें कुछ आरोपी सिर्फ 12वीं पास हैं, जबकि कुछ ने बीएससी तक पढ़ाई की है.

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एसओजी और स्वास्थ्य विभाग ने लिया एक्शन. (Photo: Screengrab)
एसओजी और स्वास्थ्य विभाग ने लिया एक्शन. (Photo: Screengrab)

सूरत के पांडेसरा इलाके में कुछ क्लीनिक चल रहे थे. बाहर से सब कुछ सामान्य दिखता था. मरीज आते थे, इलाज कराते थे और दवाइयां लेकर चले जाते थे. लेकिन पुलिस को शक था कि इन क्लीनिकों में इलाज करने वाले लोगों के पास डॉक्टर बनने की जरूरी डिग्री ही नहीं है. इसके बाद पुलिस ने एक ऐसा तरीका अपनाया, जिससे पूरा मामला सामने आ गया.

डमी मरीजों को क्लीनिक भेजा गया. जांच के बाद पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने एक साथ कार्रवाई की. पांडेसरा के 8 अलग-अलग क्लीनिकों पर छापेमारी हुई और 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस के मुताबिक, ये लोग बिना मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे. इनमें कोई 12वीं तक पढ़ा था, कोई बीएससी कर चुका था और कुछ पहले कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके थे. कुछ लोग तो करीब 10 साल से यह काम कर रहे थे.

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मामला सूरत के पांडेसरा इलाके का है. पुलिस को सूचना मिली थी कि इलाके में कुछ लोग बिना वैध मेडिकल योग्यता के डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज कर रहे हैं. सूचना गंभीर थी, इसलिए पुलिस ने सीधे छापेमारी करने के बजाय पहले इसकी पुष्टि करने का फैसला किया. इसके लिए संबंधित क्लीनिकों में डमी मरीज भेजे गए.

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डमी मरीजों के जरिए यह जांच की गई कि वहां मरीजों का इलाज कौन कर रहा है और उसकी मेडिकल योग्यता क्या है. पुलिस के मुताबिक, जांच में आरोप सही पाए गए. इसके बाद एसओजी और जिला स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के लिए तीन टीमें बनाईं.

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टीमों ने पांडेसरा इलाके में एक साथ 8 अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई की. छापेमारी के दौरान 8 लोगों को पकड़ा गया. पुलिस का आरोप है कि ये सभी बिना मान्य मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे. यानी जिन लोगों के सामने मरीज अपनी बीमारी लेकर पहुंच रहे थे, उनके पास डॉक्टर के रूप में इलाज करने की जरूरी मान्यता नहीं थी. जांच के दौरान आरोपियों की पढ़ाई और पुराने काम की जानकारी भी सामने आई.

पुलिस के मुताबिक, कुछ आरोपी सिर्फ 12वीं पास हैं. कुछ ने बीएससी की पढ़ाई की है. वहीं कुछ लोग पहले कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर असिस्टेंट के तौर पर काम कर चुके थे. इसी के बाद उन्होंने खुद को डॉक्टर के तौर पर पेश करना शुरू कर दिया.

अब इस मामले की सबसे बड़ी बात सामने आती है. पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए आरोपी पिछले करीब 2 साल से लेकर 10 साल तक बिना मान्य मेडिकल डिग्री के मरीजों का इलाज कर रहे थे. यानी यह कथित प्रैक्टिस कुछ दिन या कुछ महीने पुरानी नहीं थी. क्लीनिकों में मरीज आते रहे और वहां इलाज भी होता रहा. पुलिस की कार्रवाई के बाद इन क्लीनिकों से दवाइयां, इंजेक्शन, सिरप और दूसरी मेडिकल सामग्री बरामद की गई. कुल 98,825 रुपये का मुद्देमाल जब्त किए जाने की बात पुलिस ने कही है.

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों में पार्थ देवनाथ का नाम भी है. पुलिस के मुताबिक, पार्थ देवनाथ को लेकर एक और गंभीर आरोप सामने आया है. एक परिवार की ओर से आरोप लगाया गया है कि उसने पहले 14 साल के एक किशोर का इलाज किया था और इलाज के बाद किशोर की मौत हो गई. हालांकि इस मामले में अभी जांच जारी है. किशोर की मौत को लेकर पांडेसरा पुलिस स्टेशन में आकस्मिक मौत की रिपोर्ट यानी ADR दर्ज है. इसलिए फिलहाल यह जांच का विषय है कि किशोर की मौत की परिस्थितियां क्या थीं और उसके इलाज का उससे कोई संबंध था या नहीं.

पुलिस ने कहा- मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं

सूरत एसओजी के डीसीपी राजदीप सिंह नकुम ने बताया कि एसओजी और स्वास्थ्य विभाग ने संयुक्त रूप से पांडेसरा में 8 कथित फर्जी डॉक्टरों को पकड़ा है. डमी मरीज भेजकर पहले जांच की गई और उसके बाद कार्रवाई की गई. डीसीपी के मुताबिक, किसी आरोपी की पढ़ाई 12वीं तक है, कोई बीएससी कर चुका है और कुछ पहले कंपाउंडर या ऑपरेशन थिएटर में काम कर चुके हैं. पुलिस का कहना है कि इन लोगों के पास मरीजों का इलाज करने के लिए कोई मान्यता प्राप्त मेडिकल डिग्री नहीं थी.

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अब पुलिस यह भी जांच कर रही है कि ये लोग इतने लंबे समय तक क्लीनिक कैसे चलाते रहे और इनके यहां कितने मरीज इलाज के लिए आते थे. पांडेसरा में हुई इस कार्रवाई के बाद बिना जरूरी योग्यता के मेडिकल प्रैक्टिस करने वालों में हड़कंप मचा है. फिलहाल पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. वहीं 14 वर्षीय किशोर की मौत से जुड़े मामले की जांच भी जारी है.

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