scorecardresearch
 

जम्मू-कश्मीर में छिपे थे 600 अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये! 150 बंगाल लाए गए, होंगे डिपोर्ट

जम्मू-कश्मीर में कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से रह रहे 150 बांग्लादेशी नागरिकों पर बड़ा एक्शन लिया गया है. इन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया के तहत पश्चिम बंगाल भेजा गया है. 

Advertisement
X
600 बांग्लादेशी नागरिक गैर कानूनी तरीके से जम्मू-कश्मीर में रह रहे थे. (Representational Image)
600 बांग्लादेशी नागरिक गैर कानूनी तरीके से जम्मू-कश्मीर में रह रहे थे. (Representational Image)

जम्मू-कश्मीर में प्रशासन ने 150 गैर-कानूनी बांग्लादेशी नागरिकों को डिपोर्ट करने की कार्रवाई की है, जिन्हें पश्चिम बंगाल भेजा गया है. यह कार्रवाई गृह मंत्रालय द्वारा सीमावर्ती इलाकों में गैर-कानूनी प्रवास और डेमोग्राफी बदलाव की जांच के लिए गठित हाई लेवल कमेटी के गठन के बाद हुई है. 

अधिकारियों ने बताया कि जम्मू-कश्मीर पुलिस की मदद से प्रशासन ने पूरी कश्मीर घाटी में एक सर्वे किया था, जिसमें करीब 600 बांग्लादेशी नागरिक कथित तौर पर गैर-कानूनी तरीके से रहते हुए पाए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों को श्रीनगर पुलिस की देखरेख वाले एक कैंप में रखा गया था. अब इन्हें यहां से उनके देश वापस भेजने के लिए बागडोगरा ले जाया जा रहा है. 

सोमवार को इन 150 लोगों को भारतीय वायु सेना के स्पेशल विमान से बागडोगरा लाया गया था. इन्हें BSF के जवानों को सौंप दिया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, बांग्लादेशियों के एक और ग्रुप को डिपोर्ट करने की प्रक्रिया के तहत बुधवार को बंगाल भेजा जाएगा. 

यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सीमावर्ती इलाकों में रह रहे गैर कानूनी प्रवासियों की पहचान और डेमोग्राफी चेंज पर एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया है. गृह मंत्रालय ने 26 मई को इस कमेटी का गठन किया था. इस कमेटी का मकसद गैर-कानूनी प्रवासन और अन्य वजहों से होने वाले डेमोग्राफी बदलाव का अध्ययन कर उसके उपाय सुझाना है. एक साल के अंदर यह कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंपेगी. 

Advertisement

यह भी पढ़ें: ‘भाग सकते हो, छिप नहीं सकते’....जम्मू कश्मीर के डोडा में बड़े ऑपरेशन के बाद सुरक्षा बलों ने दी चेतावनी

अधिकारियों के मुताबिक, गृह मंत्रालय द्वारा बनाई गई कमेटी ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पिछले 15 सालों के दौरान जिलों, इंडस्ट्रियल क्लस्टर और सीमावर्ती जिलों में धार्मिक डेमोग्राफी में हुए स्पष्ट बदलावों की जानकारी मांगी थी. 

पिछले दो महीनों में भेजी गई चिट्ठी में कमेटी ने साल दर साल बदलाव दिखाने वाला टाइम सीरीज डेटा, दूसरे प्रशासनिक आंकड़े, धार्मिक जनसंख्या में उभरते प्रमुख रुझानों पर राज्य सरकारों का आकलन और 2011 से आदिवासी आबादी की धार्मिक संरचना से जुड़ा डेटा भी मागा था. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement