मिडल ईस्ट में जारी जंग का असर अब सीधे भारतीय आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है. आजतक द्वारा पिछले 90 दिनों के अमेजन (Amazon) प्राइस हिस्ट्री के विश्लेषण से पता चलता है कि घरेलू सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. यही हाल विमानन क्षेत्र का भी है. 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमलों के बाद हवाई किराए आसमान छू रहे हैं.
जब 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू हुआ, तो इसकी अवधि अनिश्चित थी, लेकिन इसके आर्थिक प्रभाव को लेकर कोई अनिश्चितता नहीं थी. कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद थी. महंगाई के दबाव के शुरुआती संकेत मिलने की आशंका थी. भारतीय उपभोक्ताओं को इसकी कीमत चुकानी पड़ने की उम्मीद थी. और अब यही हो भी रहा है.

कच्चे तेल से जुड़ी समस्याओं के कारण कई उत्पाद महंगे होते जा रहे हैं. भारत पश्चिम एशिया से जिन चीज़ों का आयात करता है, जिनमें भारतीय निर्माताओं द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला कच्चा माल भी शामिल है, वे सभी अब महंगी हो गई हैं. LPG पर निर्भरता कम करने वाले वैकल्पिक साधनों की कीमतों में भी उछाल आया है.

आजतक की ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) टीम ने Amazon पर रोजमर्रा के सामानों की कीमतों और Google Flights के जरिए हवाई किराए के रुझानों पर नजर रखी. इस दौरान कई प्रमुख श्रेणियों में कीमतों में स्पष्ट और व्यवस्थित बढ़ोतरी देखने को मिली. घरेलू उपकरण (विशेष रूप से गैस के विकल्प), इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटिंग उपकरण, भवन निर्माण और घर की मरम्मत का सामान और किराने का ज़रूरी सामान (जिसमें आयातित सूखे मेवे और खाने का तेल भी शामिल है).

यह रुझान ऊर्जा की लागत, आयात पर निर्भरता और वैकल्पिक साधनों को अपनाने के व्यवहार को दर्शाता है. इससे पता चलता है कि किस तरह एक दूरदराज के इलाके में चल रहा संघर्ष धीरे-धीरे भारत में रोज़मर्रा के उपभोग को प्रभावित कर रहा है.
विश्लेषण से पता चलता है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल में आने वाले उत्पादों की कीमतों में न केवल सामान्य बढ़ोतरी हुई है, बल्कि उनमें स्पष्ट रूप से उछाल आया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही बाधित होने से कच्चे तेल की प्रति बैरल कीमत बढ़ी है. इसका उत्पादन पर भी बुरा असर पड़ा. इसके साथ ही पैनिक खरीदारी के चलते भी कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी होने का डर है.

रोजमर्रा का सामना हो रहा महंगा
रिपोर्ट के मुताबिक, एक इंफ्रारेड कुकटॉप की कीमत 2,899 रुपये से बढ़कर 4,598 रुपये हो गई है. वहीं, ओमान का खजूर 797 रुपये से बढ़कर 951 रुपये तक पहुंच गया है. निर्माण क्षेत्र में भी असर दिख रहा है, जहां प्लाईवुड की कीमत 2,143 रुपये से बढ़कर 3,257 रुपये हो गई है. पैकेज्ड पानी, कुकिंग ऑयल और एल्यूमीनियम उत्पादों में भी लगातार महंगाई देखी जा रही है.

हवाई किराए में भी आया उछाल
आजतक के Google हवाई किराया ट्रेंड्स के विश्लेषण से पता चलता है कि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों तरह के रूट पर टिकट की कीमतों में साफ और शुरुआती उछाल आया है. इससे संकेत मिलता है कि यह आखिरी मिनट में अचानक बढ़ने के बजाय, पहले से तय की गई कीमतों में बढ़ोतरी है. घरेलू सेक्टरों के लिए, तुलना आमतौर पर किराए की रेंज के निचले स्तर से की गई है. यह एक सावधानी भरा आधार है जिसे जान-बूझकर इसलिए चुना गया है ताकि कीमतों में बढ़ोतरी को बढ़ा-चढ़ाकर न दिखाया जाए. जिन किरायों की जांच की गई है, वे 15 अप्रैल के लिए हैं - यानी दो हफ़्ते से भी ज़्यादा पहले की बुकिंग.
आमतौर पर इस समय बुकिंग करने पर कीमतें स्थिर या मध्यम रहती हैं. इसके बावजूद, कीमतों में काफ़ी बढ़ोतरी पहले से ही दिख रही है. नई दिल्ली से बेंगलुरु, नई दिल्ली से चेन्नई और नई दिल्ली से मुंबई जैसे मुख्य रूट पर, जो किराया आमतौर पर 4,600 रुपये से 5,300 रुपये के बीच शुरू होता है, वह अब बढ़कर 6,600 रुपये से लेकर 8,000 रुपये से भी ज़्यादा हो गया है. यह लगभग 44 प्रतिशत से लेकर 65 प्रतिशत से भी ज़्यादा की भारी बढ़ोतरी को दिखाता है.

लंबी दूरी वाले रूट पर कीमतों में बढ़ोतरी और भी ज़्यादा है. बेंगलुरु से दुबई, हैदराबाद से दुबई और कोच्चि से दुबई जैसे रूट पर किराया लगभग 36-49 प्रतिशत तक बढ़ गया है. कोलकाता से दोहा वाला रूट सबसे अलग है, जहां कीमतों में लगभग 97 प्रतिशत का भारी उछाल आया है. यहां किराया लगभग 18,000 रुपये से बढ़कर 35,000 रुपये से भी ज़्यादा हो गया है.
बहुत लंबी दूरी वाले सेक्टर्स में भी ऐसा ही दबाव देखने को मिल रहा है. टोक्यो से माल्टा का किराया लगभग 69,000 रुपये से बढ़कर 1,10,000 रुपये से ज़्यादा हो गया है, जो लगभग 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. वहीं मुंबई से न्यूयॉर्क का किराया लगभग 39,000 रुपये से बढ़कर 53,000 रुपये से ज़्यादा हो गया है. इस बढ़ोतरी का समय यह संकेत देता है कि एयरलाइंस पहले से ही कीमतों का अंदाज़ा लगाकर चल रही हैं.