दिल्ली में सोमवार को हुई इंडिया ब्लॉक की बैठक में विपक्षी एकता के साथ-साथ गठबंधन के भीतर मौजूद मतभेद भी खुलकर सामने आए. सूत्रों के मुताबिक, कई सहयोगी दलों ने कांग्रेस के नेतृत्व और गठबंधन के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए. कुछ नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस नेताओं द्वारा सहयोगी दलों के खिलाफ की गई कथित बयानबाजी और समन्वय की कमी पर नाराजगी जताई.
सूत्रों के अनुसार, इस मुद्दे को सबसे पहले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने उठाया, जिसके बाद वामपंथी दलों समेत कई अन्य नेताओं ने भी इसी तरह की चिंताएं व्यक्त कीं. कुछ नेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि अगर इंडिया ब्लॉक की बैठक साल में केवल एक बार होगी तो प्रभावी राजनीतिक समन्वय कैसे संभव होगा. उन्होंने अधिक नियमित बैठकों की मांग की. इस पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन पूरी तरह एकजुट है, लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियों और स्थानीय नेताओं की राय को भी ध्यान में रखना पड़ता है.
बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी पर भी चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के उभार पर भी चर्चा हुई. कई नेताओं का मानना था कि यह आंदोलन ऐसे मुद्दे उठा रहा है जो आम जनता के बीच असर पैदा कर रहे हैं और इसलिए इसे समर्थन दिया जाना चाहिए. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके की मराठी पहचान की सराहना की और कहा कि असहमति के लिए लोकतंत्र में हमेशा जगह होती है, लेकिन अब उस राजनीतिक स्पेस को सीजेपी भर रही है. बता दें कि सीजेपी ने नीट पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रही है. इसे लेकर 7 जून को सीजेपी ने जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किया.
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इंडिया ब्लॉक की बैठक में जुटे 25 विपक्षी दल
लोकसभा चुनाव 2029 से पहले भाजपा के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने के उद्देश्य से 25 विपक्षी दलों के नेता नई दिल्ली में एकत्र हुए. बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सभी नेताओं ने खुलकर अपनी बात रखी. शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और झारखंड मुक्ति मोर्चा नेता हेमंत सोरेन बैठक में वर्चुअली शामिल हुए.
हर 2 महीने में होगी इंडिया ब्लॉक की बैठक
इंडिया ब्लॉक ने फैसला किया कि गठबंधन की बैठक अब हर दो महीने में होगी. अगली बैठक 8 अगस्त को हैदराबाद में आयोजित की जाएगी, हालांकि इसकी अंतिम तारीख बाद में तय होगी. खड़गे ने बताया कि संसद के मानसून सत्र के दौरान भी विपक्षी दलों के बीच समन्वय बैठकें जारी रहेंगी. गठबंधन ने मतदाता सूची संशोधन में कथित अनियमितताओं को लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखने का फैसला भी किया है.
इसके अलावा, नीट पेपर लीक और सीबीएसई रिवैल्यूएशन विवाद के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराई गई. विपक्षी दलों ने देश की आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, महंगाई, किसानों की समस्याओं और वंचित वर्गों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार से सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की.
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चर्चा में रही DMK और AAP की गैरमौजूदगी
बैठक में डीएमके और आम आदमी पार्टी की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय रही. सूत्रों के अनुसार, दोनों दलों ने कांग्रेस के साथ मतभेदों के कारण बैठक में हिस्सा नहीं लिया. डीएमके ने तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के प्रति कांग्रेस के समर्थन पर नाराजगी जताते हुए बैठक से दूरी बनाई. डीएमके नेताओं ने सार्वजनिक रूप से कांग्रेस पर दशकों पुराने गठबंधन को राजनीतिक लाभ के लिए कमजोर करने का आरोप लगाया.
वहीं, आम आदमी पार्टी औपचारिक रूप से इंडिया ब्लॉक का हिस्सा होने के बावजूद पंजाब में कांग्रेस के साथ सीधी चुनावी प्रतिस्पर्धा में है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. जून 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले हुई बैठक के बाद यह इंडिया ब्लॉक की पहली औपचारिक बैठक थी. हालिया विधानसभा चुनावों के बाद बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच इस बैठक को विपक्षी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.