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'मैं मोहम्मद अली हूं, पाकिस्तान के मौलाना...', आयुष मलिक की जुबानी, धर्मांतरण की पूरी कहानी

शामली धर्मांतरण केस में पहली बार आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उसने बताया कि कैसे फिजियोथेरेपिस्ट चांदनी से उसकी मुलाकात हुई, कैसे वह इस्लामिक वीडियो सुनने लगा और क्यों उसने खुद को मोहम्मद अली के रूप में स्वीकार किया.

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यूपी के शामली में फिजियोथैरेपी से शुरू हुई दोस्ती, धर्मांतरण और निकाह तक पहुंचा मामला. (Photo: ITG)
यूपी के शामली में फिजियोथैरेपी से शुरू हुई दोस्ती, धर्मांतरण और निकाह तक पहुंचा मामला. (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के शामली में सामने आए चर्चित धर्मांतरण केस के केंद्र में मौजूद आयुष मलिक उर्फ मोहम्मद अली ने पहली बार अपनी कहानी विस्तार से बताई है. परिवार जहां इसे सुनियोजित ब्रेनवॉश और धर्मांतरण का मामला बता रहा है, वहीं आयुष का दावा है कि उसने किसी दबाव में नहीं बल्कि अपनी समझ के आधार पर इस्लाम को अपनाया.

आयुष मलिक का कहना है कि सरकारी दस्तावेजों में उसका नाम आज भी आयुष मलिक ही है, लेकिन उसने अपने लिए मोहम्मद अली नाम चुना है. उसने कहा, "मोहम्मद अली नाम मैंने रखा है. दस्तावेजों में अभी भी आयुष मलिक ही हूं." जब उससे पूछा गया कि वह मोहम्मद अली कैसे बना, तो उसका जवाब था कि यह कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था. 

उसके मुताबिक इस्लाम की ओर उसका सफर धीरे-धीरे शुरू हुआ और समय के साथ उसका विश्वास मजबूत होता गया. उसने बताया कि वो लंबे समय से यूट्यूब पर इस्लामिक विषयों से जुड़े वीडियो देखता था. खास तौर पर पाकिस्तान के प्रसिद्ध इस्लामिक स्कॉलर डॉ. इसरार अहमद के भाषणों का उस पर असर पड़ा. वो कई इस्लामिक विद्वानों को सुनता था. 

हालांकि, उसने इस आरोप को खारिज किया कि किसी ने उसका धर्म परिवर्तन करवाया. उसके शब्दों में, "वो धर्म परिवर्तन नहीं करवाते थे, धर्म की बात करते थे. यदि कोई सुनकर प्रभावित हो जाए तो उसे धर्म परिवर्तन करवाना नहीं कहा जा सकता." आयुष मलिक का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत किसी मौलवी या धार्मिक संस्था से नहीं हुई. 

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ayush malik religious conversion

आयुष ने कहा कि धर्म परिवर्तन किसी एक जगह या किसी व्यक्ति के जरिए नहीं होता, बल्कि यह व्यक्ति के भीतर होने वाली प्रक्रिया है. उसने कहा, "धर्म परिवर्तन कहीं नहीं होता. अंदर से होता है. इसमें किसी मौलवी का काम नहीं होता. यदि सीखने की इच्छा हो तो इंसान खुद सीख सकता है." उसने अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी साझा किया. 

उसने बताया कि एक समय वो मानसिक तनाव और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गुजर रहा था. इसी दौरान उसने कुछ धार्मिक बातें सुनीं और उन्हें अपनाने की कोशिश की. उसका दावा है कि इससे उसे मानसिक शांति मिली और उसका डर कम हुआ. इस बदलाव ने उसे इस्लाम धर्म के प्रति गंभीर बना दिया. चांदनी कुरैशी से अपनी मुलाकात को लेकर भी उसने विस्तार से बताया.

आयुष मलिक ने बताया कि उसके कंधे में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके इलाज के लिए वह एक फिजियोथेरेपी सेंटर जाता था. वहीं उसकी मुलाकात चांदनी से हुई, जो फिजियोथेरेपिस्ट थी. बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ और दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आ गए. उसका कहना है कि उसे बाद में पता चला कि चांदनी मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती है.

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हालांकि, परिवार इस पूरी कहानी को अलग नजरिए से देखता है. आयुष के पिता आरोप लगा रहे हैं कि चांदनी कुरैशी और उसके परिवार ने सुनियोजित तरीके से उसका ब्रेनवॉश किया. पहले दोस्ती बढ़ाई गई, फिर उसे इस्लामिक विचारधारा से प्रभावित किया गया. आखिरकार उसका धर्म परिवर्तन कराया गया. इस पूरे मामले के पीछे संपत्ति से जुड़े हित भी हो सकते हैं.

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पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि साल 2022 में फिजियोथेरेपी सेंटर में हुई मुलाकात के बाद दोनों के बीच लगातार संपर्क बना रहा. इसके बाद में दोनों ने एक ही जिम जॉइन किया, जहां चांदनी ट्रेनर थी. इसी दौरान दोनों के रिश्ते और करीब आए. दिलचस्प बात यह है कि आयुष जहां अपने फैसले को व्यक्तिगत आस्था और विश्वास से जोड़कर देखता है.

वहीं उसके परिवार का कहना है कि कुछ साल पहले तक वह धार्मिक गतिविधियों में विशेष रुचि नहीं रखता था. परिवार के अनुसार पिछले कुछ महीनों में उसके रहन-सहन, पहनावे और धार्मिक व्यवहार में तेजी से बदलाव आया. अब यह मामला केवल एक व्यक्ति के धर्म बदलने का नहीं रह गया है, बल्कि इसमें धर्मांतरण और संपत्ति विवाद जैसे कई पहलू जुड़ गए हैं. 

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