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'तमिलनाडु के एपस्टीन' वीरमणि के खिलाफ जांच तेज, मामला CBI को सौंपने की मांग

मद्रास हाई कोर्ट में वीरमणि के खिलाफ नाबालिग लड़कियों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले की जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग की गई है. सीनियर एडवोकेट एनएल राजा ने कथित वीडियो लीक का हवाला देते हुए यह मांग रखी. कोर्ट ने कहा कि औपचारिक याचिका दायर होने पर सुनवाई की जा सकती है, जबकि मामले में पहले से SIT जांच कर रही है.

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मद्रास हाई कोर्ट में वीरमणि केस की जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग.
मद्रास हाई कोर्ट में वीरमणि केस की जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग.

नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में वीरमणि के खिलाफ मामले की जांच CBI को ट्रांसफर करने की मांग को लेकर मद्रास हाई कोर्ट में मेंशन किया गया है.सीनियर एडवोकेट एनएल राजा ने यह मांग रखते हुए नाबालिग लड़कियों से जुड़े वीडियो कथित तौर पर लीक होने का हवाला दिया और जांच को CBI को ट्रांसफर करने की मांग की.

एडवोकेट ने यह भी बताया कि इस मामले में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को कंपल्सरी वेट पर रखा गया है. चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि अगर औपचारिक याचिका दायर की जाती है तो मामले को सुनवाई के लिए लिया जा सकता है.

बेंच ने कहा कि मामले में पहले ही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम का गठन किया जा चुका है और जांच जारी है. बेंच ने कहा कि पुलिस को अपनी जांच जारी रखने का मौका दिया जाना चाहिए. इस बीच, नाबालिग लड़कियों से जुड़े वीडियो कथित तौर पर जारी होने को लेकर जस्टिस लक्ष्मी नारायणन के सामने अलग से मेंशन किया गया. जस्टिस लक्ष्मी नारायणन ने कहा कि अगर याचिका दायर की जाती है तो वह दोपहर में मामले की सुनवाई के लिए तैयार हैं.

कब आया था मामला सामने

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यह मामला पहली बार अक्टूबर 2025 में सामने आया था, जब एक एनजीओ के जरिए चेन्नई पुलिस को एक पेन ड्राइव सौंपी गई थी. इसमें कथित तौर पर एक नाबालिग के साथ यौन शोषण का फुटेज था. इसके बाद वीरामणि के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई. शुरुआती जांच करीब पांच महीने तक चली. इसके बाद पुलिस ने पर्याप्त सबूत नहीं होने और फुटेज में दिखाई दे रही लड़की की पहचान नहीं कर पाने का हवाला देते हुए क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की. जांचकर्ताओं ने वीडियो सबूत में कमियों, मूल फुटेज बरामद नहीं होने और पड़ोसियों से पुष्टि नहीं होने का भी हवाला दिया.

एक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर आगे की जांच का आदेश दिया. इसके बाद मामले की जांच में नया मोड़ आया. दोबारा शुरू हुई जांच में उस जगह की पहचान की गई, जहां कथित तौर पर यौन शोषण हुआ था. कुछ ही हफ्तों में वीडियो में दिख रही पीड़िता और अन्य कथित पीड़ितों का भी पता लगा लिया गया.

एक से ज्यादा नाबालिगों को बनाया निशाना

विस्तारित जांच में अब तक सात से ज्यादा ऐसी महिलाओं की पहचान की गई है, जो कथित घटनाओं के समय नाबालिग थीं. जांचकर्ताओं के मुताबिक, ये सभी आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से आती थीं. पुलिस ने आरोप लगाया है कि बाद में वीरामणि की सहयोगी बनी शांति ने चेन्नई के अलग-अलग हिस्सों से 12 से 16 साल की लड़कियों की पहचान करने में मदद की. इन लड़कियों को टेयनमपेट स्थित एक किराए के घर में ले जाया जाता था, जो जांच में एक अहम जगह के तौर पर सामने आया है.

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जिन आरोपों की जांच की जा रही है, उनके मुताबिक वीरामणि और दो अन्य लोगों ने नाबालिगों के यौन शोषण के सिलसिले में इस घर का इस्तेमाल किया. लड़कियों को पैसे और उपहार दिए जाते थे.

पहले की जांच की भी हो रही जांच

वीरामणि भारत के ग्रेनाइट उद्योग की प्रमुख हस्तियों में से एक हैं और GEM ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन हैं. जांचकर्ता अब चेन्नई के उस किराए के घर की जांच कर रहे हैं, जिसका इस्तेमाल कथित तौर पर वीरामणि ने अपराध के लिए किया था. इसके साथ ही दोबारा शुरू हुई जांच के दौरान जुटाए गए अन्य सबूतों की भी जांच की जा रही है. मामले की शुरुआती जांच को लेकर भी नई जांच चल रही है. इसमें यह देखा जा रहा है कि पहले की जांच में कोई चूक हुई थी या किसी ने जांच को रोकने या कमजोर करने की कोशिश की थी.

वीरामणि के खिलाफ आरोप बढ़ने के बाद तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने मामले का संज्ञान लिया और नए सिरे से जांच के आदेश दिए. उन्होंने पुलिस को जांच में किसी भी तरह की चूक नहीं होने देने और मामले में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया.

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