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पानी भरते ही ढही टंकी, 740 नल कनेक्शन का दावा भी फेल, जल जीवन मिशन में भ्रष्टाचार का खुलासा

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत किए गए निर्माण कार्यों में भारी भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने PHE विभाग के तीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है.

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पांच सालों में भी नहीं पूरी हुई परियोजना (Photo: ITG)
पांच सालों में भी नहीं पूरी हुई परियोजना (Photo: ITG)

मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में जल जीवन मिशन के तहत हुए काम में कथित भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. दरअसल, नईगढ़ी ब्लॉक के खटखरी गांव में करीब 30 फीट ऊंची पानी की टंकी पहली बार पानी भरते ही ढह गई. इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने PHE विभाग के तीन इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज की है.

9 महीने का काम 5 साल में भी नहीं हुआ पूरा

यह मामला साल 2021-22 में शुरू हुई जल जीवन मिशन की योजना से जुड़ा है. नईगढ़ी ब्लॉक के कई गांवों में ओवरहेड टैंक, संपवेल, पाइपलाइन और घरेलू नल कनेक्शन के लिए 'मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी' को करीब 3 करोड़ 85 लाख रुपये का ठेका दिया गया था. 9 महीने का काम 5 सालों में भी पूरा नहीं हो पाया. वहीं, काम की लागत का पूरा पैसा 3 करोड़ 85 लाख रुपए भी निकाल लिए गए.

EOW की जांच में आरोप लगाए गए कि कई जगह काम पूरा हुए बिना ही विभाग की ओर से भुगतान कर दिया गया. जांच के दौरान मौके पर योजना के दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में भी अंतर पाया गया. खटखरी गांव में बनाई गई ओवरहेड टंकी मार्च 2026 में पहली बार पानी भरे जाने के बाद ही ढह गई. टंकी के आसपास मलबा बिखर गया. जानकारी के मुताबिक, पास में सो रहा एक JCB चालक बाल-बाल बच गया.

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ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं. ग्रामीणों ने सवाल किया कि टंकी में निर्धारित मानकों का उल्लंघन हुआ और निर्माण में कथित तौर पर कम क्षमता वाले सरियों का इस्तेमाल किया गया. 

यह भी पढ़ें: भ्रष्टाचार का मलबा और छात्रों की मजबूरी... सत्य निकेतन हादसे के बाद ऑपरेशन 'हॉस्टल डेथ' में बड़ा खुलासा

740 नल कनेक्शन का दावा, मौके पर नहीं मिली फिटिंग

EOW की जांच में योजना के कई हिस्सों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने का दावा किया गया है. करह उर्फ खैरागढ़ गांव में रिकॉर्ड के मुताबिक 740 घरेलू नल कनेक्शन दिए जाने थे. लेकिन जब मौके पर जांच की गई तो घरों में नल की टोंटी और फिटिंग नहीं मिली.  वहीं, रिकॉर्ड में पांच मोटर पंप लाए जाने का प्रावधान था लेकिन निरीक्षण के दौरान सिर्फ एक ही मोटर मिली. कंक्रीट स्टैंड पोस्ट भी नहीं बनाए गए थे. 

इसके अलावा, जांच के दौरान शिवराजपुर और जुड़मनिया में ओवरहेड टैंक और संपवेल का काम अधूरा मिला. मुख्य पाइपलाइन भी कई जगह अधूरी पड़ी हुई मिली. वहीं कुछ अन्य गांवों में पाइपलाइन गांव की सीमा तक तो पहुंची, लेकिन घरों तक कनेक्शन नहीं दिए गए. 

EOW का आरोप है कि इन कमियों के बावजूद विभागीय स्तर पर काम की निगरानी और भुगतान की प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरती गई. ठेकेदार शिवेंद्र तिवारी, कार्यपालन यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी जनार्दन प्रसाद द्विवेदी, सहायक यंत्री संजय पांडेय औक एपी तिवारी को दोषी पाए जाने के बाद भ्रष्टाचार के विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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