पितृपक्ष के बाद बैक-टू-बैक बड़े त्योहारों की दस्तक होगी. इस कड़ी में छठ महापर्व भी आएगा. छठ पूजा का पर्व चार दिनों तक चलता है. इस दौरान छठी मैया और सूर्य देव की उपासना करने का विधान बताया गया है. छठ के महापर्व में व्रती कठिन नियमों का पालन करते हैं. छठ पर्व का शुभारंभ नहाए-खाए के साथ होता है. इसके बाद खरना की रस्म निभाई जाती है. महापर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य और चौथे व अंतिम दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. आइए इस साल छठ पर्व का पूरा कार्यक्रम देखते हैं.
नहाय-खाय: 13 नवंबर 2026
छठ पूजा का पहला दिन 13 नवंबर को होगा. इसे नहाए-खाए कहा जाता है. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है. इस दिन व्रती तड़के स्नान करके पूजा की तैयारियों में जुट जाते हैं. इसके बाद सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है. पूजा के बाद सात्विक भोजन ग्रहण किया जाता है. इस दिन लौकी की सब्जी, चने की दाल और चावल खाने की परंपरा बताई गई है.
खरना: 14 नवंबर 2026
छठ पर्व का दूसरा दिन 14 नवंबर को रहेगा. इसे खरना कहा जाता है. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. खरना के दिन शाम के समय गुड़ की खीर का प्रसाद बनाया जाता है. पूजा के बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं. इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होता है. इस दौरान व्रती अन्न और जल का सेवन नहीं करते हैं.
संध्या अर्घ्य: 15 नवंबर 2026
छठ पूजा का तीसरा दिन 15 नवंबर को होगा. इस दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है. इसे संध्या अर्घ्य कहा जाता है. व्रती छठ घाट पर पहुंचते हैं. पानी में खड़े होकर अस्त होते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. इस दौरान फल, ठेकुआ और जल से सूर्य देव को अर्घ्य देने की परंपरा है. 15 नवंबर को सूर्यास्त शाम 5 बजकर 45 मिनट पर होगा.
उषा अर्घ्य: 16 नवंबर 2026
छठ महापर्व का अंतिम दिन 16 नवंबर को होगा. इस दिन उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा. इसे उषा अर्घ्य कहा जाता है. व्रती सुबह घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं. 16 नवंबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 47 मिनट पर होगा. उषा अर्घ्य देने के बाद व्रती अपने 36 घंटे के व्रत का पारण करते हैं.
छठ पूजा 2026 का पूरा शेड्यूल
13 नवंबर: नहाए-खाए
14 नवंबर: खरना
15 नवंबर: संध्या अर्घ्य, सूर्यास्त- शाम 5:45 बजे
16 नवंबर: उषा अर्घ्य, सूर्योदय- सुबह 6:47 बजे