
विवादों के बीच दिल्ली में शनिवार को दोपहर तीन बजे निर्वाचन सदन में चुनाव आयोग की बैठक हुई. इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी मौजूद रहे. चुनाव आयोग ने प्रेस रिलीज जारी करते हुए यह साफ किया है कि हाल के महीनों में बिहार, बंगाल समेत अन्य राज्यों में SIR को लेकर जो फैसले हुए वह सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे.
चुनाव आयोग द्वारा जारी प्रेस रीलिज के मुताबिक, इस बैठक में दिल्ली और महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियों की समय सीमा बढ़ाने के साथ ही, कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. SIR के दौरान जिन लोगों को नाम मैप नहीं होने या रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण नोटिस भेजा गया है, BLO उनके घर जाकर जरूरी दस्तावेज जमा करेंगे. साथ ही, इन दस्तावेजों को ECINET पर अपलोड किया जाएगा. ताकि ERO उनके आधार पर फैसला ले सकें.
ऐसे लोगों को सुनवाई के लिए ERO या AERO के ऑफिस बुलाने की जरूरत नहीं होगी. सिर्फ खास मामलों में ही सुनवाई होगी और यह ज्यादातर ऑनलाइन ही होने वाली है. DEO (ज़िला चुनाव अधिकारी) जरूरत के हिसाब में नाइट शेल्टर में रहने वाले लोगों, मजदूरों, गरीबों और बेघर लोगों के लिए पर्याप्त हेल्प डेस्क या स्पेशल कैंप लगाएंगे.
SIR के लिए फ़ॉर्म 6 के साथ लगे घोषणा-पत्र को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है. SIR-के अलावा बाकी समय के लिए, नियमों (मतदाता पंजीकरण नियम 1960) के अनुसार लागू फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा.
यह भी पढ़ें: ज्ञानेश कुमार को हटाना इतना आसान नहीं! नोटिस से राष्ट्रपति के आदेश तक, ऐसा है CEC को हटाने का पूरा प्रोसेस
सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक कमेटी, जिसमें IIT/IIIT का एक स्वतंत्र एक्सपर्ट भी शामिल होगा, ECINET की समीक्षा करेगी. यह कमेटी दोबारा जांच करेगी कि क्या यह सिस्टम कानूनों और नियमों के प्रावधानों का पालन करता है और फिर कमीशन को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.
पिछले कुछ महीनों में राज्य के CEOs से मिले इनपुट के आधार पर पोर्टल में कई अपग्रेड किए गए हैं. जरूरत पड़ने पर फील्ड अधिकारियों को और सुविधाएं दी जाएंगी. अब IT मॉड्यूल और पोर्टल से जुड़ी नई योजनाओं पर आयोग की मंजूरी से पहले अधिकारियों की कमेटी (COO) में चर्चा होगी.
दिल्ली और महाराष्ट्र में समय सीमा बढ़ी
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख 30 अक्टूबर, 2026 तक कर दी गई है. वहीं, इसके निपटारी की समय-सीमा 30 नवंबर, 2026 तक कर दी गई है. साथ ही महाराष्ट्र में भी दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा 12 अक्टूबर, 2026 तक बढ़ा दी है. वहीं, निपटारे की समय सीमा 10 नवंबर तक कर दी गई है.
वोटर लिस्ट में नाम छूटा तो ऐसे जुड़वाएं
बिहार और पश्चिम बंगाल समेत 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. आयोग ने साफ कहा है कि कोई भी व्यक्ति जिसका नाम SIR के दौरान या उसके बाद वोटर लिस्ट में छूट गया है, वह संबंधित ERO के पास आवेदन करके अपना नाम शामिल करा सकते हैं. बता दें, इसमें युवा और पहली बार वोट देने वाले लोग शामिल हैं.
इसके लिए CEO को इसके लिए ज़रूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. CEO, DEO और ERO इन वोटरों के नाम लिस्ट में शामिल करने के लिए तुरंत एक खास अभियान शुरू करेंगे.
यह भी पढ़ें: 'ज्ञानेश कुमार को चुनाव में मैच फिक्सिंग की जिम्मेदारी सौंपी गई', राहुल गांधी का केंद्र पर बड़ा हमला
गोवा के CEO ने संबंधित BLOs को निर्देश दिया है कि वे उन मतदाताओं के घर-घर जाकर उनके फ़ॉर्म एकत्रित करें जिनका नाम अभी तक नहीं जुड़ा है. 97 में से 81 मतदाताओं ने नाम जुड़वाने के लिए पहले ही फ़ॉर्म 6 भर दिया है.
सर्वसम्मति से हुआ था फैसला
चुनाव आयोग ने अपनी प्रेस रिलीज में कहा कि हाल के महीनों में आयोग ने देश भर में SIR समेत कई फैसले लिए हैं. आयोग के मुताबिक, SIR को लेकर पहला आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था. इसकी शुरुआत बिहार से हुई. इसके बाद पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए भी आदेश जारी किए गए. आयोग ने कहा कि ये सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे. सुप्रीम कोर्ट ने भी 27 मई 2026 को अपने आदेश में SIR को सही ठहराया था.

आयोग ने बताया कि सर्वसम्मति से 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल 27 अक्टूबर 2025 को जारी किया गया था. इसके बाद 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 14 मई 2026 को शेड्यूल जारी हुआ. आयोग ने कहा कि मतदाताओं की अंतिम संख्या का पता तीसरे चरण के बचे हुए 12 राज्यों में वोटर लिस्ट के अंतिम प्रकाशन के बाद ही चेलगा.
CEC पर विपक्ष हमलावर
खास बात तो यह है कि यह बैठक ऐसे समय में हुई जब हाल ही में एक अंग्रेजी अखबार की एक रिपोर्ट सामने आई थी. इस रिपोर्ट के आने के बाद से विपक्ष CEC ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है और उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है. INDIA ब्लॉक CEC ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने के लिए एक महाभियोग लाने की भी तैयारी कर रहा है. इस संंबंध में 30 सितंबर को INDIA ब्लॉक की एक बैठक भी होने वाली है. बता दें, इससे पहले भी ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए मार्च 2026 में लोकसभा और राज्यसभा में 130 और 63 सांसदों के हस्ताक्षर वाले नोटिस दिए गए थे. हालांकि इसे 6 अप्रैल को खारिज कर दिया गया था.
बीते दिन CEC के इस्तीफे की मांग करते हुए कांग्रेस, RJD समेत कई विपक्षी पार्टियों ने देश भर में विरोध प्रदर्शन किया था. कांग्रेस ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, असम समेत कई राज्यों में विरोध किया. वहीं, पटना में RJD ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए पुतले फूंके.
यह भी पढ़ें: CEC ज्ञानेश कुमार पर आर-पार के मूड में विपक्ष, इस तारीख को होगी 'इंडिया' ब्लॉक की अहम बैठक
क्यों हुआ विवाद
दरअसल, अंग्रेजी अखबार की इस रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर आधिकारिक तौर पर आपत्ति जताई थी, जो उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए थे.
चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों में वोटर रजिस्ट्रेशन फ़ॉर्म 6 में बदलाव, वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया और वोटर लिस्ट डेटाबेस पर सेंट्रलाइज़्ड कंट्रोल से जुड़े मुद्दे शामिल थे.