इस समय चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के अलावा अगर किसी नाम की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वह है- सीमा खन्ना. सीमा खन्ना निर्वाचन आयोग की सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक हैं. उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.
इस समय मीडिया, राजनीति और सामाजिक गलियारों में चुनाव आयोग की सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक डॉ. सीमा खन्ना बहुत ज्यादा चर्चा में हैं. वे चुनाव आयोग के पूरे डिजिटल और IT सिस्टम की देखरेख करती हैं. सीमा खन्ना साल 2025 में नेशनल इन्फर्मेटिक्स सेंटर (NIC) से प्रतिनियुक्ति पर चुनाव आयोग में आई थीं.
कांग्रेस, टीएमसी और सीजेपी समेत तमाम विपक्षी दलों ने ज्ञानेश कुमार और सीमा खन्ना को घेरा है. विपक्ष का आरोप है कि सीमा खन्ना ने ERO और ब्लॉक-लेवल अधिकारियों को अंधेरे में रखकर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के लिए सॉफ्टवेयर के बैक-एंड से छेड़छाड़ की.
सीमा खन्ना पर क्यों लग रहे आरोप
चुनाव आयोग ने जनवरी 2026 में ECINet लॉन्च किया था. यह आयोग के कई ऐप्स और डेटाबेस को एक साथ जोड़ता है. कहा गया कि इस डिजिटल सिस्टम का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है. लेकिन इस मामले में विवाद तब शुरू हुआ तब आरोप लगा कि इस सॉफ्टवेयर के जरिए डेटाबेस का पूरा एक्सेस दिल्ली स्थित IT विभाग पर केंद्रित हो गया. बता दें, सीमा खन्ना इसी विभाग की प्रमुख हैं.
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ममता-अभिषेक ने लगाए सीमा खन्ना पर आरोप
पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस मामले में सवाल उठाए हैं. ममता बनर्जी ने कई बार EC के IT अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए. उन्होंने चुनाव आयोग की डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना पर भी आरोप लगाए.
अभिषेक बनर्जी ने भी सीमा खन्ना पर आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि 18 फरवरी, 2026 को उन पांच लोगों के प्रतिनिधिमंडल ने पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी से मुलाकात की थी. उन्होंने कहा, 'हमें ठीक-ठीक पता था कि ज्ञानेश कुमार लिस्ट में हेरफेर करने के लिए सीमा खन्ना और बैक एंड सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कैसे कर रहे थे और हमने उन्हें बताया. लेकिन उन्होंने कुछ नहीं किया.'
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CJP ने भी लगाए आरोप
CJP के सौरव दास ने आरोप लगाए कि वोटरों के नाम जोड़ने और हटाने का काम दिल्ली से किया जा रहा था. उनका कहना है कि इस काम के लिए इस्तेमाल होने वाले पोर्टल को सीमा खन्ना कंट्रोल कर रही थीं. सौरव का कहना है कि आम तौर पर वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार स्थानीय ERO के पास होना चाहिए. उनका आरोप है कि यह अधिकार स्थानीय अधिकारियों की जगह सीमा खन्ना के पास केंद्रीकृत था.
महुआ मोइत्रा ने भी घेरा
CJP के अलावा, TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सीमा खन्ना पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं. उनका दावा है कि सीमा खन्ना ने ERO और ब्लॉक-लेवल अधिकारियों को अंधेरे में रखकर वोटर लिस्ट में हेरफेर करने के लिए सॉफ्टवेयर के बैक-एंड से छेड़छाड़ की थी.