चुनाव आयोग (ECI) में पारदर्शी तरीके से कामकाज सुनिश्चित करने के लिए कई बदलाव किए गए हैं. अब आयोग की बैठकों का एजेंडा पहले से साझा किया जाएगा और बैठकों के मिनट्स यानी कार्यवाही का ब्योरा भी जारी किया जाएगा. पहले यह प्रक्रिया नहीं अपनाई जा रही थी. इसके अलावा, आयोग में काम करने वाले अधिकारियों को अब विदेश यात्रा पर जाने के लिए आयोग से पहले मंजूरी लेनी होगी, जबकि पहले ऐसी मंजूरी नहीं ली जाती थी.
नए आईटी मॉड्यूल को भी पहले अधिकारियों की एक कमेटी के पास भेजा जाएगा और वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही उसे आयोग के सामने रखा जाएगा. पहले यह मुद्दा चुनाव आयुक्तों और मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच विवाद की वजह बना था.
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वहीं, एसआईआर (SIR) के लिए ऑनलाइन फॉर्म से घोषणा पत्र का विकल्प हटा दिया गया है. यह बदलाव उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया गया है, जहां एसआईआर की प्रक्रिया अभी जारी है. अब यह घोषणा ऑनलाइन फॉर्म का हिस्सा नहीं होगी, बल्कि इसके लिए अलग से घोषणा पत्र जारी किया गया है.
एसआईआर के ऑनलाइन फॉर्म से अलग हुआ घोषणा पत्र
एसआईआर से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है. 4 नवंबर को जारी अपडेट के मुताबिक, आयोग ने 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में नए मतदाताओं के लिए ऑनलाइन फॉर्म 6 से अतिरिक्त घोषणा पत्र (Annexure-D) की बाध्यता अलग कर दी है. अब मतदाता पंजीकरण के ऑनलाइन फॉर्म में यह घोषणा शामिल नहीं होगी. इसके लिए अलग से घोषणा पत्र देना होगा. इस बदलाव का मकसद नए मतदाताओं के लिए पंजीकरण की प्रक्रिया को आसान बनाना और ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आने वाली अतिरिक्त परेशानी को कम करना है.
26 सितंबर की बैठक में लिए गए थे फैसले
इन बदलावों को लेकर 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की मौजूदगी में आयोग की उच्च स्तरीय बैठक हुई थी. इस बैठक में आंतरिक कामकाज को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने से जुड़े फैसलों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी गई थी. इन फैसलों की आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग और प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) के दस्तावेजों में दी गई है.
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बैठकों के एजेंडे और मिनट्स जारी करने का फैसला आयोग के भीतर जवाबदेही बढ़ाने के मकसद से लिया गया है. इससे आयोग की बैठकों में किन मुद्दों पर चर्चा हुई और क्या फैसले लिए गए, इसकी जानकारी उपलब्ध होगी. अधिकारियों की विदेश यात्रा के लिए आयोग की पूर्व मंजूरी अनिवार्य करने का फैसला भी इसी दिशा में उठाया गया कदम है.