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चुनाव आयोग ने किए 7 बड़े सुधार, अब फर्जी या डुप्लीकेट वोटर ढूंढना होगा आसान

चुनाव आयोग अब राजनीतिक दलों को मशीन रीडेबल वोटर्स रोल वाली मतदाता सूची देने के लिए तैयार हो गया है. आयोग अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के साथ जोड़े गए, हटाए गए और संशोधित किए गए नामों की सप्लीमेंट्री लिस्ट भी राजनीतिक दलों को देगा.

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राहुल गांधी का आरोप था कि EC जानबूझकर इमेज या फोटो फॉर्मेट में लिस्ट देता था. (Representational Photo- ITGD)
राहुल गांधी का आरोप था कि EC जानबूझकर इमेज या फोटो फॉर्मेट में लिस्ट देता था. (Representational Photo- ITGD)

विपक्षी दलों के भारी विरोध और अपनी आंतरिक बैठकों में उठे सवालों के बाद चुनाव आयोग ने बड़ा फैसला लिया है. आयोग अब राजनीतिक दलों को मशीन रीडेबल वोटर्स रोल यानी इंटरनेट पर सर्च करने योग्य 'Searchable' PDF वाली मतदाता सूची देने के लिए तैयार हो गया है. यह फैसला देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हो रहे 'स्पेशल समरी रिवीजन' (SSR) के तहत लागू किया गया है.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी का आरोप था कि चुनाव आयोग पहले जानबूझकर इमेज या फोटो फॉर्मेट (Scanned PDF) में लिस्ट देता था, जिससे फर्जी या डुप्लीकेट वोटरों को ढूंढना नामुमकिन हो जाता था, अब आयोग ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए 7 अहम बदलाव किए हैं.

मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को अब ड्राफ्ट और फाइनल वोटर लिस्ट, दोनों चरणों में हार्ड कॉपी के साथ-साथ 'सर्च करने योग्य PDF' (डिजिटल प्रारूप) दी जाएगी, जिससे वे कंप्यूटर पर आसानी से नाम खोज सकेंगे. हालांकि, निजता की सुरक्षा के लिए इस डिजिटल कॉपी में वोटरों की तस्वीरें नहीं होंगी.

चुनाव आयोग इस बार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के साथ जोड़े गए, हटाए गए और संशोधित किए गए नामों की सप्लीमेंट्री लिस्ट भी राजनीतिक दलों को देगा. यह सूची पहले नहीं दी जाती थी.

बड़े पैमाने पर फर्जी फॉर्म भरकर किसी खास वर्ग के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटवाने की शिकायतों के बाद आयोग ने फॉर्म-7 जमा करने की अधिकतम सीमा तय कर दी है.

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अब कोई भी व्यक्ति दावे और आपत्तियों की पूरी अवधि के दौरान अधिकतम 10 फॉर्म-7 ही जमा कर सकता है. वोटर लिस्ट में जिन मतदाताओं के नामों में कोई गड़बड़ी पाई जाएगी, उनके सत्यापन के लिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) खुद उनके घर जाएंगे. 

वोटरों को अब आधिकारिक दफ्तरों या सुनवाई (Hearings) में चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी. आयोग ने अपने सॉफ्टवेयर पोर्टल (ECINet/ERONet) में सुधार करते हुए इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर्स (EROs) को यह विकल्प दिया है कि वे फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर फ्लैग्ड वोटरों को बिना किसी अतिरिक्त दस्तावेज या सुनवाई के भी वैध घोषित कर सकें.

चुनाव आयोग के डिजिटल मैनेजमेंट और इसके बैकएंड डेटा सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों के बीच, एक स्वतंत्र IIT एक्सपर्ट कमेटी आयोग के डिजिटल पोर्टल की तकनीकी और सुरक्षा जांच (Review) करेगी. जिन युवाओं की उम्र 1 जनवरी 2027 को या उससे पहले 18 वर्ष हो रही है, उन्हें अग्रिम रूप से जोड़ने के लिए विशेष पंजीकरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे चुनावी राज्यों में कोई भी नया मतदाता न छूटे.

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