केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा टी. विजयन मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए प्रवर्तन निदेशालय (ED) के कोच्चि कार्यालय पहुंचीं. यह मामला उनकी बंद हो चुकी आईटी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और खनन कंपनी कोचिन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) से जुड़े कथित वित्तीय लेनदेन से संबंधित है.
ईडी द्वारा जारी नए समन के बाद वीणा विजयन सुबह करीब 10:30 बजे एजेंसी के दफ्तर पहुंचीं. उनके पहुंचने के दौरान ईडी कार्यालय के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा. वीणा अपनी गाड़ी से उतरकर सीधे कार्यालय के अंदर चली गईं. करीब 8.5 घंटे तक ईडी दफ्तर में रहने के बाद वह देर शाम को बाहर निकलीं. इससे पहले ईडी ने उन्हें 12 जून को पेश होने के लिए कहा था, लेकिन स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए उन्होंने उपस्थित होने में असमर्थता जताई थीत्र
एजेंसी ने उन्हें एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस से जुड़े लेनदेन के दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा था. इस मामले में ईडी लगातार पूछताछ कर रही है. केंद्रीय एजेंसी ने CMRL के संस्थापक ससिधरन कार्था की पत्नी और बेटे से 15 जून को पूछताछ की थी. वहीं, एक दिन पहले उनकी बेटी शिबी कार्था से भी इस मामले में सवाल-जवाब किए गए थे. ईडी की जांच उन आरोपों से जुड़ी है, जिनमें कहा गया है कि कोचिन मिनरल्स एंड रुटाइल लिमिटेड (CMRL) ने वीणा विजयन की कंपनी एक्सालॉजिक को बिना किसी सेवा के बदले लगभग 2.78 करोड़ रुपये का भुगतान किया था.
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एजेंसी का आरोप है कि CMRL के प्रबंध निदेशक ससिधरन कार्था द्वारा संचालित एक अन्य कंपनी एम्पावर इंडिया कैपिटल इन्वेस्टमेंट्स प्राइवेट लिमिटेड (EICPL) ने भी एक्सालॉजिक को 50 लाख रुपये का ऋण दिया था, जबकि कंपनी कथित तौर पर समय पर भुगतान करने में विफल रही थी. ईडी का कहना है कि वीणा विजयन और CMRL प्रबंधन ने इन लेनदेन के जरिए 'अपराध से अर्जित आय' यानी प्रोसिड्स ऑफ क्राइम उत्पन्न किए. प्रवर्तन निदेशालय ने यह मामला धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज किया है.
यह कार्रवाई गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) द्वारा अप्रैल 2025 में एर्नाकुलम की अदालत में दायर अभियोजन शिकायत के आधार पर की गई थी. कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय की जांच शाखा SFIO ने आयकर विभाग की रिपोर्ट के बाद CMRL के मामलों की जांच शुरू की थी. जनवरी 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी के दौरान कंपनी में कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता चला था, जिनमें लगभग 130 करोड़ रुपये के संदिग्ध और कथित फर्जी खर्च शामिल बताए गए थे.