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पत्नी को पीठ पर उठाकर कलेक्टर के दरबार पहुंचा पति, 10 साल का दर्द आंखों से छलका

पन्ना जिले में जनसुनवाई के दौरान एक मार्मिक तस्वीर सामने आई. गौरा गांव का निवासी पुष्पेंद्र सिंह अपनी दिव्यांग पत्नी नीलू राजा को पीठ पर बैठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचा. महिला ने आरोप लगाया कि पिछले 10 वर्षों से उसे राशन और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला. कलेक्टर उषा परमार ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया.

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जनसुनवाई में सामने आई मजबूरी और संघर्ष की तस्वीर. (Photo: Dilip Sharma/ITG)
जनसुनवाई में सामने आई मजबूरी और संघर्ष की तस्वीर. (Photo: Dilip Sharma/ITG)

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में आयोजित जनसुनवाई के दौरान एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया. गौरा गांव की रहने वाली दिव्यांग महिला नीलू राजा अपने पति पुष्पेंद्र सिंह की पीठ पर बैठकर कलेक्ट्रेट पहुंची. अपने बच्चों के साथ जनसुनवाई में पहुंची महिला ने कलेक्टर उषा परमार के सामने अपनी परेशानी रखी और बताया कि पिछले 10 वर्षों से उनका परिवार राशन और कई सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित है.

महिला ने बताया कि उसके पास पहले अति गरीबी रेखा का राशन कार्ड था, लेकिन पंचायत के कर्मचारियों ने उसे गरीबी रेखा की श्रेणी में बदल दिया. इसके बाद उसे आज तक राशन पर्ची नहीं मिली. राशन पर्ची नहीं मिलने के कारण पिछले 10 वर्षों से परिवार को नियमित राशन का लाभ नहीं मिल पा रहा है.

पति की पीठ पर बैठकर पहुंची जनसुनवाई

जनसुनवाई में पहुंची नीलू राजा चलने-फिरने में असमर्थ हैं. ऐसे में उनके पति पुष्पेंद्र सिंह उन्हें अपनी पीठ पर बैठाकर कलेक्ट्रेट लेकर पहुंचे. इस दौरान उनके बच्चे भी साथ थे. जनसुनवाई में पहुंची यह तस्वीर वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचती रही. महिला ने बताया कि परिवार को प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय योजना समेत किसी भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिला है. गांव में रोजगार के अवसर भी नहीं हैं, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती गई.

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भोपाल एम्स में चल रहा किडनी का इलाज

नीलू राजा ने बताया कि वह गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रही हैं. उनका किडनी का इलाज भोपाल एम्स में चल रहा है. इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहा है. उन्होंने कहा कि घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. परिवार के सामने रोजमर्रा का खर्च चलाना भी बड़ी चुनौती बन गया है.

कई दफ्तरों के चक्कर, फिर भी नहीं मिला समाधान

महिला ने आरोप लगाया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर सरपंच और सचिव से कई बार शिकायत की, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई. इसके बाद पंचायत, जनपद पंचायत, जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट और यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक भी अपनी शिकायत पहुंचाई. इसके बावजूद आज तक उनकी समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हुआ. जनसुनवाई में अपनी व्यथा बताते हुए महिला भावुक हो गई.

कलेक्टर ने दिया कार्रवाई का भरोसा

मामले को सुनने के बाद कलेक्टर उषा परमार ने इसे गंभीरता से लिया. उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए और महिला को राशन पर्ची बनवाने के साथ-साथ पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया. फिलहाल परिवार को उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही उनकी परेशानी का समाधान अब हो सकेगा और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाएगा.
 

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