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TMC, शिवसेना UBT के बाद अब सपा में टूट की आहट, बयानबाजी से बढ़ी सियासी बेचैनी

एक बार फिर दल-बदल और बगावत की चर्चाएं तेज हो गई हैं. एक तरफ शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के बागी होने की अटकलें हैं, तो दूसरी तरफ यूपी के मंत्री ओपी राजभर और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य समाजवादी पार्टी में टूट का दावा कर रहे हैं.

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Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav with Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray. (File photo: PTI)
Samajwadi Party chief Akhilesh Yadav with Shiv Sena (UBT) chief Uddhav Thackeray. (File photo: PTI)

दल-बदल से जुड़ी ताजा अटकलों ने देश की सियासत को गरमा दिया है. महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के भीतर संभावित बगावत की चर्चा जोरों पर है. वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओपी राजभर ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट हो सकती है.

तृणमूल कांग्रेस में टूट और शिवसेना UBT में बगावत की अटकलों के बीच राजभर का दावा चर्चा का विषय है. उनका कहना है कि सपा के कुछ सांसद बगावत की तैयारी में हैं. उन्होंने यहां तक दावा किया कि सपा के वरिष्ठ नेता सांसद रामगोपाल यादव इस पूरी कवायद के अगुवाई कर रहे हैं.

राजभर के मुताबिक, रामगोपाल यादव ने अमित शाह से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा है. उसमें उन सांसदों के नाम शामिल हैं, जो भविष्य में पार्टी छोड़ सकते हैं. हालांकि, इस दावे को लेकर कई सवाल भी उठ रहे हैं. जिस मुलाकात का जिक्र किया जा रहा है, उसका वीडियो पहले भी सामने आ चुका है.

वो पिछले साल मार्च का बताया जाता है. ऐसे में राजभर के दावे को लेकर संशय बना हुआ है. ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए साल 2016 के चर्चित बालू खनन घोटाले का भी जिक्र किया. इस मामले में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति पर गंभीर आरोप लगाए गए थे. 

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गायत्री प्रजापति फिलहाल गैंगरेप मामले में जेल में हैं. खनन घोटाले की जांच CBI कर रही है. राजभर का दावा है कि इसी जांच की वजह से समाजवादी पार्टी समय-समय पर केंद्र सरकार के प्रति नरम रुख अपनाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सदन में दिए गए एक बयान के जरिए संकेत दिए थे.

मोदी के बयान का हो रहा जिक्र

महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिलेश यादव को अपना मित्र बताते हुए कहा था कि उन्हें समय-समय पर सहयोग मिलता रहा है. राजभर इसी बयान को आधार बनाकर अपने राजनीतिक आरोपों को मजबूती देने की कोशिश कर रहे हैं. अपने बयान के समर्थन में तर्क दे रहे हैं.

वर्तमान में उत्तर प्रदेश से समाजवादी पार्टी के 37 लोकसभा सांसद और 4 राज्यसभा सदस्य हैं. यदि पार्टी में आधिकारिक टूट होती है तो लोकसभा में कम से कम 25 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 3 सांसदों का अलग होना जरूरी होगा. वरना दल-बदल विरोधी कानून के तहत सदस्यता खतरे में पड़ सकती है.

केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा दावा

इसी बीच यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी दावा किया है कि समाजवादी पार्टी के 26 सांसद बगावत के लिए तैयार बैठे हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी फिलहाल उन्हें अपने साथ लेने में रुचि नहीं दिखा रही है. सपा के साथ-साथ महाराष्ट्र की राजनीति में भी हलचल कम नहीं है. 

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शिवसेना UBT के कई सांसदों के बागी होने की अटकलों ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. इसका असर पार्टी संजय राउत की भाषा में भी दिखाई दिया. बगावत से नाराज राउत ने अपने ही सांसदों के लिए तीखे शब्दों का इस्तेमाल किया. उन्होंने कहा कि उनके बयान को काट-छांट कर नहीं पूरा दिखाया जाए.

शिवसेना UBT के 6 सांसद बागी 

सूत्रों के मुताबिक, लोकसभा में शिवसेना UBT के 9 सांसदों में से 6 सांसदों के बागी होने की चर्चा है. इनमें संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, नागेश पाटिल आष्टीकर, ओमराजे नाईक, संजय जाधव और भाऊसाहेब वाकचौरे के नाम शामिल बताए जा रहे हैं. इस तरह इन सांसदों की संख्या दो-तिहाई होगी. 

ऐसे में उन पर दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होगा. यही वजह है कि पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ी हुई है. संजय राउत को आशंका है कि यदि ये सांसद अलग होते हैं तो उन्हें रोक पाना मुश्किल होगा. उन्होंने दावा किया है कि बगावत की चर्चा में शामिल सांसदों को 50-50 करोड़ रुपये तक के ऑफर दिए गए हैं. 

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ सांसदों को चार्टर्ड विमान के जरिए दिल्ली भी लाया गया. हालांकि इन आरोपों के समर्थन में अभी तक कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है. दिलचस्प बात यह भी है कि राउत के साथ पार्टी के केवल तीन सांसद अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत ही मौजूद थे. 

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बुलाई गई सभी सांसदों की बैठक

शिवसेना UBT ने स्थिति को संभालने के लिए सभी सांसदों की बैठक बुलाई है. पार्टी की ओर से संकेत दिए गए हैं कि बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों के खिलाफ संगठनात्मक और कानूनी कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है. उधर बागी सांसद अरविंद सावंत ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा है.

उन्होंने बागी सांसदों की संभावित याचिका को स्वीकार नहीं करने की अपील की है. राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि क्या उद्धव ठाकरे की पार्टी एक बार फिर 2022 जैसी स्थिति का सामना करने जा रही है. 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 55 में से 40 विधायक अलग हो गए थे. 

फिर दोहराएगा 2022 का इतिहास?

इसके बाद पार्टी दो हिस्सों में बंट गई थी और महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी. अब सूत्रों का दावा है कि कुछ सांसद लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंप चुके हैं और अलग संसदीय समूह बनाने की तैयारी में हैं. माना जा रहा है कि यदि ऐसा होता है तो आगे चलकर ये सांसद शिंदे गुट के साथ भी जा सकते हैं.

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