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मतदाता सूची में अब विदेशी घुसपैठियों पर भी नजर, EC ने BLO को दिए नए निर्देश

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान बीएलओ को संदिग्ध विदेशी नागरिकों की पहचान कर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. जांच में मामला संदिग्ध लगने पर उसे नागरिकता कानून के तहत संबंधित अधिकारियों को भेजा जाएगा. यह प्रक्रिया वोटर लिस्ट को ज्यादा सटीक और अपडेट रखने के लिए की जा रही है.

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वोटर लिस्ट जांच में संदिग्ध विदेशियों पर नजर रखेंगे बीएलओ. (File Photo: PTI)
वोटर लिस्ट जांच में संदिग्ध विदेशियों पर नजर रखेंगे बीएलओ. (File Photo: PTI)

वोटर लिस्ट की जांच के दौरान अब संदिग्ध विदेशी घुसपैठियों की पहचान भी की जाएगी. निर्वाचन आयोग ने बूथ लेवल अफसरों (BLO) को इसके कड़े निर्देश जारी किए हैं. घर-घर जाकर सर्वे करने के दौरान अगर कोई संदिग्ध विदेशी निवासी मिलता है, तो उसकी जानकारी संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाई जाए. आयोग का कहना है कि यह कदम मतदाता सूची को ज्यादा सटीक और अपडेट रखने के लिए उठाया गया है.

चुनाव निकाय के नए नियमों के मुताबिक, संदिग्ध विदेशी नागरिकों से जुड़े इन मामलों को नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत आगे बढ़ाया जाएगा. मतदाता सूची के चल रहे विशेष व्यापक संशोधन (SIR) के बीच जमीनी स्तर पर वेरिफिकेशन करने की जिम्मेदारी बीएलओ को सौंपी गई है. इस पूरी प्रक्रिया पर स्वतंत्र रूप से विचार करने के लिए अधिकृत अधिकारियों को जरूरी अधिकार भी दे दिए गए हैं. इसके बाद संबंधित एजेंसियां अपने स्तर पर मामले की जांच करेंगी. दरअसल, मतदाता सूची की जांच के दौरान बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर सत्यापन करते हैं. इस प्रक्रिया में वे यह पता लगाते हैं कि मतदाता उसी पते पर रह रहा है या नहीं. 

बिहार में सामने आए थे ऐसे मामले

बता दें कि पिछले साल बिहार में चले इसी तरह के अभियान के दौरान वोटर डेटाबेस में बांग्लादेश, नेपाल और म्यांमार के कुछ नागरिकों की पहचान हुई थी. हालांकि आयोग ने तब तकनीकी सीमाओं और अपने तर्कों की वजह से उनकी संख्या सार्वजनिक नहीं की थी. इस बार बीएलओ को साफ कहा गया है कि वे फॉर्म जमा न करने वाले या गायब रहने वाले लोगों की पूरी पड़ताल करें. अगर कोई वोटर बिना किसी पुख्ता वजह के लंबे समय से लापता है, तो उसे संदिग्ध विदेशी नागरिक के रूप में चिह्नित किया जा सकता है.

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चुनाव आयोग ने 14 मई से देशभर में मतदाता सूची संशोधन के तीसरे चरण की शुरुआत की थी. इसमें 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों के करीब 36.73 करोड़ मतदाता शामिल हैं. घर-घर सत्यापन के लिए 3.94 लाख से ज्यादा बीएलओ तैनात किए गए हैं, जिनकी मदद के लिए राजनीतिक दलों के 3.42 लाख बूथ लेवल एजेंट भी लगाए गए हैं.

हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे पहाड़ी इलाकों में मौसम तथा बर्फबारी की स्थिति को देखते हुए यह अभियान बाद में चलाया जाएगा. वहीं, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में यह काम पहले ही पूरा हो चुका है. इसके दूसरे चरण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ियां रोकी गई थीं, जिसके तहत सूची से 60 लाख से ज्यादा मृत मतदाताओं के नाम हटाए गए थे. इस पूरी प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट को पूरी तरह पारदर्शी और शुद्ध बनाने का प्रयास किया जा रहा है.

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