धार भोजशाला विवाद में जुम्मे की नमाज के लिए ज़मीन आवंटन का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील हुजैफा अहमदी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विवादित स्थल के आसपास भी कई खाली ज़मीनें हैं लेकिन सरकार उन्हें जुम्मे की नमाज़ के लिए नहीं दे रही.
हुजैफा अहमदी का कहना है कि विवादित स्थल के आसपास खाली ज़मीन होने के बावजूद सरकार उन्हें दूर-दराज के प्लॉट दे रही है और अदालत के आदेशों का पालन नहीं हो रहा. अहमदी ने कोर्ट से मांग की है कि इस मामले में जल्द से जल्द सुनवाई की जाए. केंद्र की ओर से कहा गया कि एक अन्य वैकल्पिक स्थल भी उपलब्ध कराया गया है लेकिन मुसलिम पक्ष ने इससे भी इनकार कर दिया है.
भोजशाला के पास जुम्मे की नमाज के लिए ज़मीन आवंटन की मांग वाली याचिका को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सवालिया लहजे में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि वे मुस्लिम पक्ष को वैकल्पिक स्थल का विवरण क्यों नहीं देते.
यह भी पढ़ें: आंध्र के पूर्व मंत्री वेंकट नागेश्वर राव की ED जांच के खिलाफ अग्रिम जमानत की अर्जी सुप्रीम कोर्ट में खारिज
याचिकाकर्ता के वकील हुजैफा अहमदी ने कहा कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं हो रहा है. जो जगह सरकार बता रही है वह विवादित स्थल से डेढ़ किलोमीटर दूर है. उन्होंने बताया कि कलेक्टर ने आदेश पारित कर कहा है कि वे सिर्फ वही जगह आवंटित करेंगे.
इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि यह गलत कहा जा रहा है, फिर से एक और बैठक हुई है और उनके पास एक और जगह है. हालांकि इसपर अहमदी ने तर्क दिया कि दूसरी जगह भी बहुत दूर है और यह शराब भट्टी का हिस्सा है. अहमदी ने भोजशाला के पास स्थित दरगाह के पास वाली खाली जमीन देने की मांग की है. उन्होंने अंत में कहा कि किसी एक समुदाय द्वारा उन्हें दबाया नहीं जा सकता. फिलहाल मामले की अगसी सुनवाई अब गुरुवार को होगी.