धार भोजशाला (Dhar Bhojshala), मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित एक ऐतिहासिक और विवादित स्थल है. इसे परमार वंश के महान शासक राजा भोज द्वारा 11वीं शताब्दी में स्थापित एक विद्या केन्द्र माना जाता है. कहा जाता है कि यह स्थान संस्कृत, ज्योतिष, व्याकरण और दर्शन की शिक्षा का प्रमुख केन्द्र था, जहां दूर-दूर से विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते थे. भोजशाला में प्राप्त शिलालेखों में देवी सरस्वती की स्तुति और संस्कृत श्लोक मिलते हैं, जिससे इसके शैक्षिक और सांस्कृतिक महत्व की पुष्टि होती है.
समय के साथ इस स्थल का स्वरूप बदलता गया. इतिहासकारों के अनुसार, बाद के काल में यहां मस्जिद का निर्माण हुआ, जिसे कमाल मौला मस्जिद कहा जाता है. इसी कारण यह स्थान आज हिंदू और मुस्लिम समुदाय दोनों के लिए आस्था से जुड़ा हुआ है. एक ओर हिंदू समाज इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और गुरुकुल मानता है, वहीं मुस्लिम समाज इसे एक ऐतिहासिक मस्जिद के रूप में देखता है.
आज की चर्चा का केन्द्र भी यही विवाद है. हाल के वर्षों में भोजशाला के वैज्ञानिक सर्वेक्षण और उत्खनन की मांग तेज हुई है, ताकि इसके वास्तविक ऐतिहासिक स्वरूप का पता लगाया जा सके. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा किए जा रहे अध्ययन और अदालत में चल रही सुनवाई ने इस मुद्दे को फिर से राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है. लोग यह जानना चाहते हैं कि क्या यहां पहले सरस्वती मंदिर था, और बाद में उसका ढांचा बदलकर मस्जिद बनाई गई, या यह शुरू से ही एक इस्लामी संरचना थी.
धार भोजशाला केवल एक इमारत नहीं, बल्कि भारत के समृद्ध, बहुस्तरीय इतिहास का प्रतीक है.
धार की विवादित भोजशाला में एएसआई (ASI) के वैज्ञानिक सर्वे की रिपोर्ट ने हलचल तेज कर दी है. रिपोर्ट में परमार काल के एक विशाल मंदिर के अस्तित्व और उसके हिस्सों से वर्तमान ढांचे के निर्माण की बात कही गई है.
साल 1951 में 'प्राचीन और ऐतिहासिक स्मारक एवं पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष (राष्ट्रीय महत्व की घोषणा) अधिनियम' के तहत भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद को राष्ट्रीय महत्व का स्मारक घोषित किया गया था. इसी वजह से पूरी जांच बेहद सावधानी से की गई ताकि मौजूदा ढांचे को कोई नुकसान न पहुंचे.
धार की ऐतिहासिक भोजशाला विवाद पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने अपनी बहु प्रतिक्षित रिपोर्ट में लिखा है कि परिसर में प्राचीन हिंदू मंदिर होने के सदियों पुराने प्रमाण मिले हैं. वैज्ञानिक पद्धति से किए गए सर्वेक्षण में शिलालेख, स्थापत्य और अन्य सबूत इस विचार को पुष्ट करते हैं. रिपोर्ट और मुकदमे की विस्तार से जानकारी दे रहे हैं हिंदू पक्षकारों के वकील विष्णु शंकर जैन.
मध्य प्रदेश के भोजशाला मंदिर विवाद में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की सर्वे रिपोर्ट आने के बाद उच्च न्यायालय ने सभी पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं. कोर्ट ने कहा है कि पक्षकार दो सप्ताह के अंदर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएं. मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी, जिसमें उन आपत्तियों पर विस्तार से विचार किया जाएगा.
Dhar Bhojshala Dispute LIVE Updates: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार (जुमे की नमाज) एक ही दिन पड़ने से असमंजस जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय और स्थान के बंटवारे का एक विशेष फॉर्मूला तय कर शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया है. आज मौके पर बसंत पंचती की पूजा और नमाज दोनों हुईं.
मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी का पर्व आज विशेष उमंग और हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है. इस पावन दिन हिंदू समुदाय द्वारा मां वाग्देवी के तेल चित्र की स्थापना कर, सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा, महाआरती और धर्मसभा का भव्य आयोजन किया जा रहा है.
वसंत पंचमी के अवसर पर मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं ताकि सांप्रदायिक सौहार्द और शांति बनी रहे. इस दौरान पुलिस का अश्वारोही दल भी शहर की सड़कों पर मार्च कर रहा है. प्रमुख सूचना के अनुसार, दोपहर 1 से 3 बजे के बीच परिसर के एक निर्धारित स्थान पर सीमित संख्या में नमाज अदा की जाएगी.
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी के पावन पर्व को बड़े हर्षोल्लास और श्रद्धा से मनाया जा रहा है. इस अवसर पर हिंदू समुदाय मां वाग्देवी के तेल चित्र को स्थापित कर सूर्योदय से सूर्यास्त तक अखंड पूजा का आयोजन करता है. महाआरती और धर्मसभा भी इसी दौरान संपन्न होती हैं. दोपहर में नमाज के लिए भी समय दिया गया है. जानें क्या है भोजशाला विवाद?
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी का पर्व बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. इस पावन अवसर पर हिंदू समुदाय ने मां वाग्देवी के तेल चित्र की स्थापना की है और सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक अखंड पूजा, महाआरती और धर्मसभा का आयोजन किया जा रहा है.
मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला में वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर मां सरस्वती की पूजा-अर्चना शुरू हो चुकी है. इस विशेष दिन पर सुबह से ही वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए पूजन और हवन हो रहा है. इस दौरान ड्रोन से निगरानी की जा रही है. देखें एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.
इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में आप पहली बार धार भोजशाला के मुख्य गर्भगृह की झलक देख सकते हैं जहां मां सरस्वती की प्रतीकात्मक प्रतिमा स्थापित है. रिपोर्ट में बताया गया है कि श्रद्धालु किस प्रकार वहां जाकर पूजा-अर्चना करते हैं और इस स्थल का धार्मिक महत्व क्या है.
परमार राजाओं ने धार में जिस भोजशाल और सरस्वती मंदिर का निर्माण करवाया, वह सुल्तान शासनकाल में विध्वंस का शिकार हुई. उसे न सिर्फ तोड़ा गया, बल्कि, उसी भोजशाला पर एक मस्जिद तामीर करवा दी गई- कमाल मौला मस्जिद. जब जब जुमा यानी शुक्रवार को वसंत पंचमी होती है, धार की भोजशाला को लेकर माहौल गर्म होने लगता है. जबकि ये सिर्फ धार का नहीं, दो और भोजशालाओं का भी कड़वा अतीत है.
एमपी के धार स्थित भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसला दिया है. कोर्ट ने बसंत पंचमी के दिन हिंदू पक्ष को पूजा और मुस्लिम पक्ष को जुमे की नमाज़ की अनुमति दी है. हालांकि दोनों के लिए अलग स्थान, अलग रास्ते और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं.
मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला विवाद ने वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा और जुमा की नमाज को लेकर तनाव पैदा कर दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि दोनों धार्मिक आयोजनों को अलग-अलग समय पर आयोजित किया जाएगा. यह आदेश क्षेत्र में शांति और सद्भाव बनाए रखने के लिए दिया गया है. कोर्ट के इस निर्णय से दोनों धर्मों के अनुयायियों को सम्मान मिला है और संभव जोड़तोड़ से मतभेद कम होंगे. यह फैसला सामाजिक और धार्मिक समरसता के लिए अहम माना जा रहा है.
DHAR Ground Report: धार की भोजशाला में 23 जनवरी को बसंत पंचमी और जुमे की नमाज एक साथ होने के कारण भारी तनाव है. प्रशासन ने 8000 जवान तैनात किए हैं और इलाके को नो-फ्लाई जोन घोषित किया है.
मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला में सरस्वती पूजा की मांग वाली हिंदू संगठन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने दोनों पक्षों को परिसर साझा करने का निर्देश दिया है, जबकि मुस्लिम पक्ष को दोपहर एक से तीन बजे तक नमाज पढ़ने की मंजूरी दी है. कोर्ट ने प्रशासन को परिसर में बैरिकेडिंग करने का भी निर्देश दिया है.