दिल्ली में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत नोटिस पाने वाले कई प्रमुख मतदाताओं के विवरण का फील्ड वेरिफिकेशन कर लिया गया है. चुनाव अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद उनके नाम अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं.
बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, विदेश मंत्री एस जयशंकर, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत कई प्रमुख लोगों को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में ‘विसंगतियों’ को लेकर नोटिस जारी किए गए थे. इनमें से ज्यादातर को 2002 में दिल्ली में हुए पिछले SIR से ‘अनमैप्ड’ होने के कारण नोटिस दिया गया था. ऐसे ज्यादातर प्रमुख मतदाता नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र में वोटर थे.
पिछले कुछ दिनों में बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) समेत चुनाव अधिकारियों की टीमों ने ऐसे मतदाताओं के घर जाकर उनके विवरण का सत्यापन किया. अधिकारियों के मुताबिक, सत्यापन के बाद इन मतदाताओं के नाम 4 नवंबर को प्रकाशित होने वाली दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची में शामिल करने के लिए सुरक्षित रखे गए हैं.
क्यों जारी हुआ था नोटिस
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार, न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, घोषित पदों पर आसीन लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल और सार्वजनिक सेवाओं समेत विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के नाम अगर चुनावी डेटाबेस में चिन्हित थे और 31 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट रोल में नहीं मिले, तो उन्हें नोटिस जारी किए गए थे. अधिकारियों के मुताबिक, इसका उद्देश्य दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया के दौरान उनसे जरूरी दस्तावेज हासिल करना था.
33.13 लाख मतदाताओं का है नाम
दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97 लाख से ज्यादा मतदाताओं के नाम शामिल हैं, जबकि करीब 33.13 लाख मतदाताओं को उनके एन्यूमरेशन फॉर्म में विसंगतियों के कारण नोटिस के लिए चिन्हित किया गया है. इनमें बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की है, जिनके विवरण 2002 में तैयार की गई पिछली SIR की मतदाता सूची से मैच नहीं हो सके थे. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया जाएगा. किसी भी नाम को हटाने से पहले मतदाता को सुनवाई का अवसर देना और उचित कारण वाला अपील योग्य आदेश पारित करना जरूरी है.