दिल्ली हाई कोर्ट ने बुधवार को एक जनहित याचिका (PIL) खारिज कर दी, जिसमें केंद्र सरकार को शिक्षा के अधिकार की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण घोषित करने, शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करने और अभिव्यक्ति की पूर्ण स्वतंत्रता सुनिश्चित करने जैसे कई बड़े निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने याचिकाकर्ता से कहा कि अदालत के अधिकार क्षेत्र को लेकर उन्हें गलतफहमी है.
हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस ने कहा, "यह देखकर खुशी है कि आपको हमारी शक्तियों पर इतना भरोसा है, लेकिन हमें ऐसी कोई गलतफहमी नहीं है कि हमारे पास इस तरह की याचिकाएं स्वीकार करने की शक्ति है."
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि हाई कोर्ट सिर्फ किसी विशेष और ठोस विवाद पर ही आदेश दे सकता है. उन्होंने कहा, "हम हर विषय पर एक साथ सामान्य और व्यापक (Omnibus) आदेश जारी नहीं कर सकते."
इस दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत से पूछा कि आखिर कोर्ट क्या कर सकता है. इस पर केंद्र सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ने कहा कि पहले यह बताना होगा कि याचिकाकर्ता की व्यक्तिगत शिकायत क्या है.
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ASG ने कहा, "आप जिन अधिकारों की बात कर रहे हैं, उनमें से अधिकांश पहले से ही संविधान में मौजूद हैं. पहले यह बताइए कि आपकी वास्तविक मांग और व्यक्तिगत शिकायत क्या है."
अदालत ने पाया कि याचिका में किसी ठोस कानूनी विवाद या व्यक्तिगत अधिकार के उल्लंघन का स्पष्ट आधार नहीं बताया गया है. इसके बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी.