तमिलनाड़ु के चेन्नई में 8.17 करोड़ रुपये की निवेश ठगी के मामले में इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने सस्पेंड महिला पुलिस इंस्पेक्टर शीला मैरी समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. आरोपियों ने ज्यादा रिटर्न, सस्ते सोने के सिक्के और प्लॉट दिलाने का झांसा देकर पुलिसकर्मियों सहित 56 लोगों से करोड़ों रुपये निवेश कराए थे. इस मामले में फर्म का मालिक पहले ही गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस अब पूरे नेटवर्क और निवेशकों की रकम की रिकवरी की जांच कर रही है.
एक एजेंसी के मुताबिक पुलिस ने बताया कि यह मामला कोडुंगाइयूर स्थित एक निवेश फर्म से जुड़ा है. फर्म ने लोगों को कम समय में ज्यादा मुनाफा देने का झांसा दिया. इसके अलावा कम कीमत पर सोने के सिक्के और प्लॉट उपलब्ध कराने का लालच देकर बड़ी संख्या में लोगों से निवेश कराया गया. इस फर्जी योजना के जरिए पुलिसकर्मियों और आम नागरिकों समेत कुल 56 जमाकर्ताओं से करीब 8.17 करोड़ रुपये जुटाए गए.
मामले में आगे की जांच में जुटी पुलिस
जब निवेशकों को तय समय पर न तो मुनाफा मिला और न ही उनकी जमा राशि लौटाई गई, तब उन्होंने शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद 25 मई को भारतीय न्याय संहिता (BNS) और तमिलनाडु प्रोटेक्शन ऑफ इंटरेस्ट ऑफ डिपॉजिटर्स (TNPID) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. जांच के दौरान फर्म के मालिक प्रभु उर्फ प्रभु मणि को 9 जून को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था.
वहीं, इस मामले में नामजद अन्य आरोपी शीला मैरी, सेंथिलकुमार और कल्पना फरार थे. इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने लगातार छापेमारी और तलाश के बाद तीनों को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है. यह पता लगाया जा रहा है कि इस निवेश घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे. साथ ही निवेशकों की रकम की बरामदगी और अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान के लिए भी जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है.