चर्चित स्टार्टअप फाउंडर श्वेता (Shvetha) ने एक्स (X) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर दावा किया है कि भारत में "इंजीनियरिंग मतलब पक्की नौकरी" का फॉर्मूला साल 2020 में ही दम तोड़ चुका है. उन्होंने इस पूरे क्राइसिस (संकट) के लिए तीन बड़े 'अक्यूज्ड' यानी गुनहगारों को कटघरे में खड़ा किया है.
श्वेता ने देश के इंजीनियरिंग कॉलेजों पर कड़ा प्रहार करते हुए लिखा कि कॉलेज छात्रों से फीस तो साल 2026 की वसूल रहे हैं (करीब 12 लाख रुपये), लेकिन उन्हें सिलेबस साल 2015 का पढ़ा रहे हैं. लगभग एक दशक पुराने इस ढर्रे के कारण छात्र उन कॉन्सेप्ट्स को सीखने में चार साल गंवा रहे हैं, जिन्हें आज चैटजीपीटी (ChatGPT) जैसे एआई टूल्स चंद सेकेंड्स में खुद जेनरेट और ऑटोमेट कर सकते हैं.
माता-पिता और छात्रों को भी ठहराया 'दोषी'
फाउंडर ने केवल कॉलेजों को ही नहीं, बल्कि माता-पिता और छात्रों की सोच को भी कटघरे में खड़ा किया. उन्होंने लिखा कि पेरेंट्स आज भी इस पुरानी धारणा में जी रहे हैं कि कंप्यूटर साइंस दिला दी, तो बच्चा सीधे अमेरिका चला जाएगा या लाखों का पैकेज पाएगा. इस चक्कर में वे बिना सोचे-समझे भारी लोन ले रहे हैं, जबकि महामारी के बाद और एआई बूम के इस दौर में हायरिंग का पूरा ट्रेंड बदल चुका है.
उन्होंने कहा कि छात्र आंखें बंद करके भेड़चाल का हिस्सा बन रहे हैं. वे यह नहीं देख रहे कि जिस 3.5 लाख रुपये के शुरुआती सालाना पैकेज के लिए वे चार साल और लाखों रुपये लगा रहे हैं, वो पैकेज पिछले 10 साल से टस से मस नहीं हुआ है.
श्वेता ने लिखा कि मार्केट बदल गया, एआई आगे बढ़ गया, हायरिंग के तरीके बदल गए, लेकिन तुम्हारी मानसिकता नहीं बदली. अब तो जाग जाओ.
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए 4 साल का 'सक्सेस फॉर्मूला'
इस क्राइसिस से बचने के लिए फाउंडर ने केवल कमियां ही नहीं गिनाईं, बल्कि आज के एआई दौर में टिके रहने के लिए छात्रों को एक प्रैक्टिकल रोडमैप भी दिया है.
फर्स्ट ईयर (1st Year): कोडिंग के बेसिक फंडामेंटल्स मजबूत करें. कम से कम एक लैंग्वेज पर महारत हासिल करें और प्लेसमेंट सीजन का इंतजार किए बिना पहले साल से ही GitHub प्रोफाइल बनाना शुरू कर दें.
सेकंड ईयर (2nd Year): केवल ऑनलाइन ट्यूटोरियल देखकर प्रोजेक्ट कॉपी न करें. खुद के प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स बनाएं और जरूरत पड़ने पर स्टार्टअप्स में अनपेड (बिना सैलरी की) इंटर्नशिप करने से भी न हिचकिचाएं.
थर्ड ईयर (3rd Year): किसी एक फील्ड में स्पेशलाइजेशन चुनें जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सिक्योरिटी या एम्बेडेड सिस्टम्स. ऐसी इंटर्नशिप ढूंढें जो आगे चलकर प्री-प्लेसमेंट ऑफर (PPO) में बदल सके.
फाइनल ईयर (4th Year): केवल कॉलेज के कैंपस प्लेसमेंट के भरोसे न बैठें. ऑफ-कैंपस नौकरियों के लिए एक्टिव रहें, अपना पोर्टफोलियो मजबूत रखें और जॉब वैकेंसी आते ही तुरंत अप्लाई करना सीखें.
ये वायरल पोस्ट देश के एजुकेशन सिस्टम के लिए एक वेक-अप कॉल है. एआई के इस दौर में अब केवल 'डिग्री का कागज' काम नहीं आएगा, बल्कि आपको खुद को इंडस्ट्री की जरूरतों के हिसाब से अपस्किल करना ही होगा.