भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने वैश्विक चुनौतियों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के खुलने को वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन के लिए एक बेहद स्वागत योग्य कदम बताया है. उन्होंने कहा कि भारत अमेरिका-ईरान के बीच हुए MoU का स्वागत करता है. हमें उम्मीद करते हैं कि ये काम करेगा. इससे ऊर्जा सुरक्षा को मदद मिलेगी.
मंगलवार को ब्रिक्स NSA की बैठक में अपने शुरुआती संबोधन में अजीत डोभाल ने भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और आर्थिक तनावों के असर का जिक्र करते हुए चुनौतियों से निपटने में इस समूह की अहम भूमिका पर जोर दिया. डोभाल की अध्यक्षता में हो रही इस बैठक में चीन के विदेश मंत्री वांग यी, रूस के NSA सर्गेई शोइगु, ईरान के सुरक्षा अधिकारी गदीर निज़ामीपुर और ब्रिक्स के अन्य शीर्ष सुरक्षा अधिकारी शामिल हो रहे हैं.
ईरान-अमेरिका के MoU का भारत ने किया स्वागत
डोभाल ने कहा, 'भारत अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU (समझौता ज्ञापन) का स्वागत करता है. हम इसे लेकर उम्मीद करते हैं कि ये काम करेगा. इससे ऊर्जा सुरक्षा में मदद मिलेगी.'
अजीत डोभाल ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज के दोबारा खुलने को एक बहुत बड़ा सकारात्मक विकास करार दिया. उन्होंने रेखांकित किया कि इस समुद्री मार्ग के खुलने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन से जुड़ी तमाम रुकावटें पूरी तरह समाप्त हो जाएंगी और वैश्विक बाजारों में उर्वरक (खाद) तथा रसायनों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रही भारी कमी को दूर किया जा सकेगा.
उन्होंने कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खुलना एक बहुत ही स्वागत योग्य घटनाक्रम है. इससे सप्लाई चेन की बाधाएं दूर होंगी और उर्वरक (खाद) व रसायनों जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रही भारी कमी की समस्या का समाधान होगा.'
डोभाल ने बैठक में कहा कि मौजूदा वक्त बहुत उथल-पुथल भरा है. दुनिया भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, आर्थिक दबावों और डिसरप्टिव टेक्नोलॉजी से जूझ रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि न सिर्फ खतरे बढ़ रहे हैं, बल्कि मौजूदा संस्थागत तंत्र इन समस्याओं का समाधान करने में अपर्याप्त साबित हो रहे हैं.
क्या है ब्रिक्स की भूमिका
उन्होंने कहा कि बहुपक्षवाद (Multilateralism) कमजोर हो रहा है. ऐसी स्थिति में BRICS को बड़ी भूमिका निभानी होगी.
डोभाल ने याद दिलाया कि BRICS को उभरती अर्थव्यवस्थाओं के अनौपचारिक समूह के रूप में शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर को बढ़ावा देना, आर्थिक सहयोग मजबूत करना और ग्लोबल साउथ की आवाज को मजबूत करना है.
40फीसदी GDP का प्रतिनिधित्व
मूल रूप से ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ शुरू हुए इस संगठन का साल 2024 में विस्तार कर मिस्र, इथियोपिया, ईरान और यूएई को शामिल किया गया था, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी इसका हिस्सा बना. वर्तमान में ये 11 देशों का एक शक्तिशाली समूह है जो दुनिया की लगभग 49.5 प्रतिशत आबादी, 40 प्रतिशत वैश्विक जीडीपी और 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करता है.
आतंकवाद और सुरक्षा नीति
अजीत डोभाल ने बताया कि इस कॉन्क्लेव (सम्मेलन) के दौरान आतंकवाद विरोधी अभियानों पर बने दो ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों के परिणामों पर भी विस्तृत चर्चा की जाएगी. उन्होंने सदस्य देशों को नए सुरक्षा खतरों के प्रति सचेत रहने की सलाह दी, क्योंकि गैर-पारंपरिक खतरे अब राष्ट्रीय सीमाओं को पार कर चुके हैं और उन्होंने पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को मात देने वाले तंत्र विकसित कर लिए हैं.