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'द इडियट' से 'तेहरान' तक... अबान की कार में मिली किताबें और अली की अधूरी कहानी

झांसी पुलिस के मुताबिक, फॉरेंसिक टीम को अबान की कार के अंदर सिगरेट के पैकेट, जूते और दो किताबें मिलीं, जिनमें फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की "द इडियट" और मर्जान कमाली की "द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान" शामिल हैं, और पुलिस का कहना है कि अबान यह सामान अपने भाई अली के लिए ले जा रहा हो सकता है.

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अबान की कार से दो किताबें फॉरेंसिक टीम को मिली हैं. (Photo- ITG)
अबान की कार से दो किताबें फॉरेंसिक टीम को मिली हैं. (Photo- ITG)

अतीक अहमद के सबसे छोटे बेटे अबान अहमद की झांसी-कानपुर हाईवे पर सड़क हादसे में मौत हो गई थी. हादसे के बाद जब फोरेंसिक टीम ने दुर्घटनाग्रस्त कार की जांच की तो उसमें सिगरेट के पैकेट, जूते समेत कई सामान मिले. लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उन दो किताबों की हो रही है, जो कार से बरामद हुईं.

किताबों में एक रूसी लेखक फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की मशहूर किताब द इडियट और दूसरी ईरानी मूल की अमेरिकी लेखिका मर्जान कमाली का उपन्यास द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान है. पुलिस के मुताबिक, ये किताबें अबान अपने भाई अली के लिए लेकर जा रहा था.

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द इडियट में मासूमियत और रिश्तों की कहानी

फ्योदोर दोस्तोयेव्स्की की द इडियट का मुख्य किरदार प्रिंस लेव मिश्किन है. वह बेहद संवेदनशील, दयालु और साफ दिल वाला इंसान है. कहानी में उसकी मासूमियत की टक्कर ऐसे समाज से होती है, जहां पैसा, लालच, सामाजिक हैसियत और निजी स्वार्थ रिश्तों पर भारी पड़ते हैं. किताब का एक बड़ा सवाल यही है कि क्या कोई बेहद अच्छा और मासूम इंसान ऐसे समाज में टिक सकता है.

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कहानी मिश्किन के रिश्तों, प्रेम, ईर्ष्या, मानसिक पीड़ा और इंसानी कमजोरियों के इर्द-गिर्द आगे बढ़ती है. नास्तास्या फिलिप्पोवा और अग्लाया येपांचिन जैसे किरदारों के साथ उसके रिश्ते उपन्यास को और जटिल बनाते हैं.

तेहरान की किताब में अधूरी रह गई मोहब्बत

दूसरी किताब द स्टेशनरी शॉप ऑफ तेहरान की कहानी 1953 के तेहरान में शुरू होती है. इसमें रोया और बहमन नाम के दो युवा एक स्टेशनरी की दुकान पर मिलते हैं और प्यार में पड़ जाते हैं. दोनों की कहानी उस समय आगे बढ़ती है जब ईरान राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहा था. शादी से ठीक पहले राजनीतिक हिंसा और तख्तापलट जैसी घटनाएं दोनों को अलग कर देती हैं.

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इसके बाद रोया अपनी जिंदगी आगे बढ़ाती है, लेकिन बहमन से जुड़े सवाल उसके मन में बने रहते हैं. करीब छह दशक बाद उसे उन सवालों के जवाब तलाशने का मौका मिलता है. उपन्यास में प्यार और बिछड़ने के साथ राजनीति, पलायन, परिवार, यादों और अतीत के असर को भी दिखाया गया है.

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