आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि 'मैं दिमागी नक्सल हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं, मुझे इस पर गर्व है.'
अरविंद केजरीवाल ने एक वीडियो शेयर करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के हिसाब से दिमागी नक्सली कौन है, जो इस देश में प्रश्न उठाने की हिम्मत करता है.
उन्होंने कहा कि जो सड़ी-गली व्यवस्था को बदलना चाहता है, जो अच्छे सरकारी स्कूल चाहता है, जो अच्छे सरकारी अस्पताल चाहता है, जो बिजली चाहता है, पानी चाहता है, सीवर चाहता है, ड्रेनेज चाहता है, अच्छी व्यवस्था चाहता है, भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना देखता है, वो प्रधानमंत्री के हिसाब से दिमागी नक्सली है.
वीडियो में केजरीवाल ने आगे कहा कि आज अगर भगत सिंह जिंदा होते तो PM मोदी भगत सिंह को भी दिमागी नक्सली बोलते. आज अगर बाबा साहेब आंबेडकर जिंदा होते, जिन्होंने सबकी बराबरी के लिए लड़ाई लड़ी थी, तो उन्हें भी प्रधानमंत्री नहीं छोड़ते.
अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'मैं प्रधानमंत्री जी को कहना चाहता हूं कि मैं अरविंद केजरीवाल, आपके हिसाब से दिमागी नक्सली हूं, क्योंकि मैं देशभक्त हूं और मुझे इस बात का गर्व है. अगर देश के खिलाफ कोई कुछ करेगा या कोई कुछ बोलेगा, केजरीवाल अपनी पूरी ताकत से उसका मुकाबला करेगा.'
बता दें, 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहा कि जंगलों में हथियार उठाने वाले नक्सलियों के खिलाफ देश ने बड़ी सफलता हासिल की है, लेकिन अब भी ऐसे 'दिमागी नक्सली' मौजूद हैं, जो विचारधारा के जरिए देश में अशांति फैलाने के मौके तलाश रहे हैं.
अब 'दिमागी नक्सल' बयान पर सियासत तेज हो गई है. इस बीच कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के 'मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व' वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी आक्रमक है. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा भी चिदंबरम के इस बयान को लेकर उनपर निशाना साध रहे हैं.
दिमागी नक्सली बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस शब्द को लेकर बहस शुरू हो गई. कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इस शब्द को ही मजाक और राजनीतिक व्यंग्य का हिस्सा बना दिया. इंस्टाग्राम पर 'दिमागी नक्सल पार्टी' नाम का एक नया पेज सामने आया. इस हैंडल पर 1.85 लाख फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं.