सीजेपी संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा है कि नरेंद्र मोदी वोट डिलीट करके और वोट चोरी करके प्रधानमंत्री बने हैं. गुरुवार को बैंगलुरु में सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके, यूट्यूबर ध्रुव राठी और अभिनेता-कार्यकर्ता प्रकाश राज एक विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. इसमें SIR को रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई है.
अभिजीत दिपके ने सुप्रीम कोर्ट पर भी निशाना साधा. बैंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या अब भी सुप्रीम कोर्ट से उम्मीद की जा सकती है. इसके जवाब में उन्होंने कहा, "सुप्रीम कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद कैसे करें, सुप्रीम कोर्ट ने खुद कहीं न कहीं...डेमोक्रेसी के कत्ल में कहीं न कहीं अपने भी हाथ खून में रंगे हैं. जो बंगाल में हुआ वो सबने देखा, क्या कहा था सुप्रीम कोर्ट ने? कोई बात नहीं, इस बार नहीं कर सकते तो अगली कर लेंगे."
अभिजीत दिपके ने आगे कहा कि ऐसा कैसे हो सकता है, नरेंद्र मोदी को बोल दीजिए कोई बात नहीं, इस बार चुनाव नहीं लड़िए, अगली बार लड़िए, बोलोगे आप मोदी को, वोटर्स को आप बोल रहे हो इस बार आप वोट नहीं कर सकते हो तो कोई बात नहीं, क्या सुनेंगे मोदी?
ऐतिहासिक फ्रीडम पार्क में सिविल सोसायटी और सीजेपी द्वारा आयोजित 'पीपुल्स ट्रिब्यूनल'में दिपके ने आरोप लगाया कि एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम हटाने का उद्देश्य भाजपा का विरोध करने वालों को मताधिकार से वंचित करना है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर लोकतंत्र को ''कमजोर'' करने का भी आरोप लगाया.
10 अक्तूबर को दिल्ली में विशाल प्रदर्शन की घोषणा करते हुए दिपके ने कहा कि अगर मुंबई में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो सकता है, अगर बैंगलुरु में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हो सकता है तो अमित शाह लोगों को जंतर-मंतर पर इकट्ठा होने की इजाज़त क्यों नहीं दे रहे हैं? जंतर-मंतर भारत के लोगों का है. यह विरोध प्रदर्शन के लिए तय की गई जगह है.
CJP एक्टिविस्ट दिपके ने देश को अस्थिर करने के आरोपों को खारिज किया और कहा, हम देश को कैसे अस्थिर कर रहे हैं? अगर इससे देश अस्थिर होता है, तो महात्मा गांधी सबसे बड़े अस्थिर करने वाले थे. क्या आप यही कहना चाहते हैं? महात्मा गांधी ने सत्याग्रह के ज़रिए अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ लड़ाई लड़ी थी. हम भी वही कर रहे हैं. हम वोट हटाने और इस धोखाधड़ी के ख़िलाफ़ सत्याग्रह कर रहे हैं.
दिपके ने कहा कि वे बस स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग कर रहे हैं. लेकिन जब तक SIR है और ज्ञानेश कुमार CEC प्रमुख के पद पर हैं, तब तक आज़ाद और निष्पक्ष चुनाव मुमकिन नहीं है. जब तक चुनाव आयुक्त की नियुक्ति का कोई निष्पक्ष और बिना भेदभाव वाला तरीका नहीं अपनाया जाता तब तक ऐसा नहीं हो पाएगा.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा बढ़ाये जाने पर अभिदीत दिपके ने कहा कि उन्हें जेल के अंदर होना चाहिए.
इस रैली को यूट्यूबर ध्रुव राठी ने भी संबोधित किया. पश्चिम बंगाल का ज़िक्र करते हुए राठी ने दावा किया कि विधानसभा चुनावों से पहले वोटर लिस्ट से लगभग 70,000 वोटरों के नाम हटा दिए गए थे और चुनाव नतीजों के बाद उन्हें फिर से जोड़ दिया गया.
उन्होंने दावा किया, "वे असली और वैध वोटर थे. चुनाव से पहले और चुनाव के बाद वे वोटर लिस्ट में थे, लेकिन वोटिंग के समय वे लिस्ट में नहीं थे."
बिहार में, राठी ने दावा किया कि वोटर लिस्ट से लगभग 65 लाख नाम हटा दिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने प्रभावित लोगों के नाम और पते तब तक ज़ाहिर नहीं किए, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट ने यह जानकारी सार्वजनिक करने का आदेश नहीं दिया.
उन्होंने आरोप लगाया, "जब तक कोई चुनाव आयोग से ऐसी जानकारी ज़ाहिर करने के लिए नहीं कहता, तब तक वह खुद से कुछ भी नहीं बताता। इसमें कोई पारदर्शिता नहीं है. जरा भी पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं है."
उन्होंने कहा, "इसीलिए मैं कहता हूँ: 'वोट चोर, गद्दी छोड़'. इसीलिए हम कहते हैं कि CEC कुमार को इस्तीफ़ा देना चाहिए."
एक्टर और एक्टिविस्ट प्रकाश राज ने SIR प्रक्रिया को खत्म करने की मांग की. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सिर्फ़ वोट हटाने का मामला नहीं है, बल्कि नागरिकों की गरिमा और अधिकारों पर हमला है.