जंगल में पैदा हुआ बाघ का एक बच्चा. कुछ वक्त बाद वह अपने जन्म वाले जंगल से निकलता है और दूसरे जंगल में जा पहुंचता है. उसे न किसी ने रास्ता दिखाया, न किसी गाड़ी ने वहां पहुंचाया. वह खुद जंगलों के बीच से अपना रास्ता तय करता हुआ महाराष्ट्र के पेंच टाइगर रिजर्व तक पहुंच गया. 29 अक्टूबर को यह बाघ का बच्चा पेंच के चोरबहुली गेट के पास दिखाई दिया. उसकी पहचान बाघिन F2 के बच्चे के तौर पर हुई है. उसका जन्म उमरेड-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य के गोठणगांव इलाके में हुआ था.
अब इस खबर ने वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद दी है. उन्हें लगता है कि बाघों के लिए दो जंगलों के बीच आने-जाने का कोई प्राकृतिक रास्ता काम कर रहा हो सकता है. लेकिन कहानी में एक पेंच भी है. अभी यह पक्का नहीं है कि बाघ ने पेंच को अपना नया घर बना लिया है या वह यहां से गुजर रहा है.
बाघ की जिंदगी में एक वक्त ऐसा आता है, जब उसे अपना अलग इलाका तलाशना पड़ता है. वह हमेशा मां के साथ नहीं रहता. बड़ा होने पर उसे अपने रहने, शिकार करने और घूमने के लिए नई जगह चाहिए होती है. ऐसे में युवा बाघ अपने जन्म वाले इलाके से निकलकर दूसरे जंगलों की तरफ जा सकते हैं. इसे बाघों का प्राकृतिक फैलाव यानी टाइगर डिस्पर्सल कहा जाता है.
महाराष्ट्र में दिखा यह बच्चा भी शायद इसी तलाश में निकला है. पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर अक्षय गजभिये के मुताबिक, बाघ अपने लिए सही इलाका तलाश रहा हो सकता है. अधिकारी अभी उसकी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं. गजभिये ने कहा कि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि बाघ पेंच में ही रहेगा या सिर्फ यहां से गुजर रहा है.
उमरेड से पेंच तक कौन सा रास्ता तय किया?
अब सवाल है कि यह बाघ का बच्चा एक जंगल से दूसरे जंगल तक पहुंचा कैसे? वन विभाग ने एक संभावित रास्ते का अनुमान लगाया है. इसके मुताबिक, बाघ कुही, भंडारा, रामटेक, पवनी, पवनी बफर और फिर NH-44 के रास्ते चोरबहुली तक पहुंचा हो सकता है. यह अभी एक संभावित रास्ता है. इसकी पूरी पुष्टि नहीं हुई है. इसके लिए बाघ की गतिविधियों पर नजर रखनी होगी और वैज्ञानिक तरीके से जांच करनी होगी.
आखिर ये वाइल्डलाइफ कॉरिडोर क्या है?
इसे ऐसे समझिए. मान लीजिए दो बड़े जंगल हैं. दोनों में बाघ रहते हैं, लेकिन उनके बीच खेत, सड़कें, गांव और दूसरी रुकावटें हैं. अब अगर किसी युवा बाघ को एक जंगल से दूसरे जंगल जाना है, तो वह किस रास्ते से जाएगा? जंगलों के बीच मौजूद वह प्राकृतिक रास्ता, जिससे बाघ और दूसरे जंगली जानवर एक जगह से दूसरी जगह जा सकें, वाइल्डलाइफ कॉरिडोर कहलाता है.
बाघों के लिए ऐसे रास्ते बहुत जरूरी हैं. क्योंकि हर बाघ को अपना इलाका चाहिए. जब कोई युवा बाघ बड़ा होता है, तो वह अपने लिए नई जगह तलाश सकता है. अगर जंगलों के बीच सुरक्षित रास्ता नहीं होगा, तो उसका सफर मुश्किल और खतरनाक हो सकता है. सड़कें, बस्तियां और जंगलों का कटना इन रास्तों को तोड़ सकता है. ऐसे में बाघों का एक-दूसरे से अलग-थलग पड़ना भी चिंता की बात है.
पेंच में बाघ के लिए क्या तैयारी है?
पेंच टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर अक्षय गजभिये ने इस घटना को पेंच के लिए एक पॉजिटिव साइन बताया है. उनका कहना है कि विभाग की प्रॉयरिटी जंगल को सुरक्षित और बाघों के रहने लायक बनाए रखना है. वन विभाग के मुताबिक, चोरबहुली वन क्षेत्र में लगातार गश्त की जा रही है.
यह भी पढ़ें: शहडोल के जंगल बाघों और हाथियों के लिए क्यों हैं खास? बांधवगढ़ से अचानकमार तक जुड़ते हैं नेचुरल कॉरिडोर
जंगल की सुरक्षा के साथ-साथ वहां पानी बचाने, वन क्षेत्र में छोटे बांध बनाने और स्थानीय लोगों को संरक्षण के काम से जोड़ने की कोशिशें भी हुई हैं. इन कोशिशों का मकसद है कि जंगल में वन्यजीवों के लिए बेहतर माहौल बना रहे. ताकि बाघों को भोजन, पानी और रहने के लिए सही जगह मिल सके.
क्या अब पेंच में ही रहेगा यह बाघ? इसका जवाब अभी किसी के पास नहीं है. वन विभाग के अधिकारी खुद कह रहे हैं कि बाघ की मौजूदगी पर नजर रखी जा रही है. वह पेंच में अपना इलाका बना सकता है या फिर आगे किसी दूसरी जगह की तलाश में निकल सकता है. लेकिन उसकी यह मौजूदगी एक बड़ी बात की तरफ इशारा जरूर करती है.
बाघों के संरक्षण का मतलब सिर्फ जंगल के भीतर उनकी गिनती करना नहीं है. यह भी देखना जरूरी है कि वे एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित पहुंच पा रहे हैं या नहीं. फिलहाल, उमरेड-करहांडला में जन्मे इस बाघ के बच्चे ने पेंच में दस्तक देकर एक उम्मीद जगाई है. अब वन विभाग की निगरानी बताएगी कि यह सिर्फ एक बाघ का सफर था या महाराष्ट्र के दो बड़े जंगलों के बीच किसी प्राकृतिक रास्ते की कहानी भी.