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शहडोल के जंगल बाघों और हाथियों के लिए क्यों हैं खास? बांधवगढ़ से अचानकमार तक जुड़ते हैं नेचुरल कॉरिडोर

शहडोल के जंगल मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों को जोड़ने वाले वन्यजीव गलियारों के लिए अहम हैं. जानिए बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों की आवाजाही में इन जंगलों की भूमिका...

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शहडोल के जंगलों से गुजरते हैं बाघ और हाथी.(Photo:ITG)
शहडोल के जंगलों से गुजरते हैं बाघ और हाथी.(Photo:ITG)

मध्य प्रदेश का शहडोल जिला अपनी समृद्ध वन संपदा और जैव विविधता के लिए जाना जाता है. यहां के घने जंगल बाघों, हाथियों, तेंदुओं और भालुओं समेत कई वन्यजीवों की आवाजाही के लिए प्राकृतिक मार्ग का काम करते हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों के बीच स्थित होने के कारण शहडोल के जंगल वन्यजीव संरक्षण में अहम भूमिका निभाते हैं.

शहडोल खुद टाइगर रिजर्व नहीं है, लेकिन इसका वन क्षेत्र बांधवगढ़, कान्हा और संजय गांधी टाइगर रिजर्व के साथ छत्तीसगढ़ के अचानकमार टाइगर रिजर्व से जुड़े वन्यजीव गलियारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है. खासतौर पर दक्षिण वन मंडल का क्षेत्र वन्यजीवों की आवाजाही में अहम कड़ी माना जाता है.

बाघों और हाथियों के लिए क्यों जरूरी हैं शहडोल के जंगल?

शहडोल के जंगलों में साल के वन, प्राकृतिक जल स्रोत और भोजन की उपलब्धता वन्यजीवों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करते हैं. बाघ अपने क्षेत्र का विस्तार करने और नए आवास की तलाश में दूसरे जंगलों तक जा सकते हैं. वहीं, हाथी अपने पारंपरिक रास्तों से लंबी दूरी तय करते हैं.

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इस दौरान शहडोल के जंगल वन्यजीवों को एक वन क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक पहुंचने में मदद करते हैं. इन प्राकृतिक मार्गों के कारण अलग-अलग जंगलों में रहने वाले वन्यजीवों के बीच आवाजाही और संपर्क बना रह सकता है.

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बांधवगढ़ तक पहुंचते हैं छत्तीसगढ़ के हाथी

उमरिया जिले का बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व बाघों के लिए प्रसिद्ध है. यहां हाथियों की मौजूदगी भी वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम है.

छत्तीसगढ़ से आने वाले हाथियों की अनूपपुर और शहडोल के वन क्षेत्रों से होते हुए बांधवगढ़ तक आवाजाही इन जंगलों के महत्व को दर्शाती है. साल 2018 के आसपास बांधवगढ़ क्षेत्र में हाथियों का आगमन शुरू होने के बाद से उनकी मौजूदगी यहां वन्यजीव संरक्षण का अहम पहलू बनी हुई है.

वन्यजीव गलियारे क्या होते हैं?

वन्यजीव गलियारे ऐसे प्राकृतिक रास्ते होते हैं, जिनके जरिए जानवर एक जंगल से दूसरे जंगल तक आ-जा सकते हैं. इन रास्तों में जंगलों के अलावा नदियां, पहाड़ियां, गांव और आबादी वाले क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं.

इन गलियारों के सुरक्षित रहने से वन्यजीवों के अलग-अलग प्राकृतिक आवासों के बीच संपर्क बना रहता है. इससे उन्हें भोजन, पानी और नए आवास की तलाश में आवाजाही करने में मदद मिलती है. हालांकि, जंगलों की कटाई, निर्माण कार्य और दूसरी मानवीय गतिविधियों से इन रास्तों में बाधा आ सकती है. इससे वन्यजीवों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और इंसानों तथा जानवरों के बीच टकराव का खतरा बढ़ सकता है.

वन्यजीवों की मौजूदगी वाले क्षेत्रों में सावधानी जरूरी

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बाघों और हाथियों की आवाजाही वाले इलाकों में ग्रामीणों को सतर्क रहने की जरूरत है. जंगल या गांव के आसपास कोई वन्यजीव दिखाई देने पर उसके करीब जाने, उसे घेरने या उकसाने से बचना चाहिए. ऐसी स्थिति में वन विभाग को सूचना देना जरूरी है.

वन क्षेत्रों में प्राकृतिक आवास, पानी और भोजन की उपलब्धता बनाए रखना भी वन्यजीव संरक्षण का अहम हिस्सा है.

शहडोल, अनूपपुर और उमरिया के जंगल मध्य प्रदेश की प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. इन वन क्षेत्रों और छत्तीसगढ़ के जंगलों के बीच प्राकृतिक गलियारों को सुरक्षित रखना बाघों, हाथियों और अन्य वन्यजीवों के संरक्षण के साथ जैव विविधता बनाए रखने के लिए भी जरूरी है.

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