मध्य प्रदेश के सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में स्थित पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park, Madhya Pradesh) भारत के प्रमुख वन्यजीव अभयारण्यों में से एक है. यह पार्क अपने घने जंगलों, समृद्ध जैव विविधता और बाघों के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है. पेंच नदी के नाम पर बने इस राष्ट्रीय उद्यान का उल्लेख महान लेखक रुडयार्ड किपलिंग की प्रसिद्ध रचना द जंगल बुक से भी जोड़ा जाता है, जिसने इसे विश्वभर में पहचान दिलाई.
पेंच नेशनल पार्क का कुल क्षेत्रफल लगभग 758 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पार्क क्षेत्र और बफर जोन शामिल हैं. यहां की भौगोलिक बनावट में घने साल और सागौन के जंगल, घास के मैदान, छोटी पहाड़ियां और नदी-नाले शामिल हैं, जो वन्यजीवों के लिए आदर्श प्राकृतिक आवास प्रदान करते हैं.
यह पार्क रॉयल बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए जाना जाता है. इसके अलावा यहां तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ता (धोल), नीलगाय, चीतल, सांभर, गौर और जंगली सूअर जैसे अनेक वन्यजीव पाए जाते हैं. पक्षी प्रेमियों के लिए भी पेंच किसी स्वर्ग से कम नहीं है, क्योंकि यहां 300 से अधिक प्रजातियों के पक्षी देखे जा सकते हैं, जिनमें मोर, किंगफिशर, ईगल और हॉर्नबिल प्रमुख हैं.
पर्यटकों के लिए पेंच नेशनल पार्क में जीप सफारी का विशेष आकर्षण है, जिसके माध्यम से जंगल की गहराइयों में जाकर वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक वातावरण में देखा जा सकता है. पार्क का सबसे उपयुक्त समय अक्टूबर से जून के बीच माना जाता है, जबकि गर्मियों में बाघ दर्शन की संभावनाएं अधिक होती हैं.
पेंच नेशनल पार्क न केवल पर्यटन का प्रमुख केंद्र है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता और प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है. प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों में रुचि रखने वालों के लिए यह स्थान एक यादगार अनुभव प्रदान करता है.
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