पुणे में आगामी दही हांडी और गणेशोत्सव से पहले पुणे पुलिस ने ध्वनि स्तर पर प्रतिबंध लगाने और प्रत्येक गणेश मंडल को सिर्फ चार साउंड बॉक्स, दो टॉप और दो बेस स्पीकर इस्तेमाल करने की अनुमति देने का फैसला किया है. इस फैसले से गणेश मंडलों के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ-साथ साउंड इक्विपमेंट एसोसिएशन के सदस्यों में भी नाराजगी है.
साउंड एसोसिएशन के सदस्यों का कहना है कि पुलिस ने जल्दबाजी में फैसला लिया है और ये प्रतिबंध अनुचित और व्यावहारिक नहीं हैं. उनका कहना है कि साउंड सिस्टम का इस्तेमाल लंबे समय से गणेशोत्सव का हिस्सा रहा है और अचानक इस तरह के प्रतिबंध लागू करना तकनीकी रूप से संभव नहीं है. उनके मुताबिक, त्योहार के दौरान बड़ी भीड़ को कवर करने के लिए चार स्पीकर पर्याप्त नहीं होंगे.
गणेश मंडलों ने यह भी सवाल उठाया है कि ऐसे सख्त प्रतिबंध सिर्फ पुणे में ही क्यों प्रस्तावित किए जा रहे हैं, जबकि मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में कथित तौर पर ऐसे प्रतिबंध नहीं लगाए जा रहे हैं. उन्होंने मांग की है कि इस साल के उत्सव को प्रस्तावित प्रतिबंधों से मुक्त रखा जाए और नए नियम 1 जनवरी 2027 से लागू किए जाएं.
नागरिक समूहों ने तेज आवाज वाले उत्सवों का विरोध किया
इस मुद्दे पर ध्वनि प्रदूषण को लेकर चिंतित नागरिकों की ओर से भी विरोध शुरू हो गया है. पिछले सप्ताह पुणे नगर निगम ने विभिन्न गणेश मंडलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी. बैठक के दौरान DJ और साउंड सिस्टम पर आपत्ति जताने वाले पुणे के IT प्रोफेशनल विद्यानंद बापट को कथित तौर पर मंडल के सदस्यों ने बाहर जाने के लिए कहा.
बैठक से बाहर आने के बाद बापट ने मीडिया से कहा कि गणेशोत्सव के दौरान ध्वनि का स्तर अक्सर तय सीमा से अधिक हो जाता है, जिससे बुजुर्गों और अन्य निवासियों को परेशानी होती है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा सिर्फ ध्वनि प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि बड़े स्तर पर होने वाले समारोह और भीड़ यातायात और वाहनों की आवाजाही को भी प्रभावित करते हैं. विवाद के बाद जागरूक नागरिकों ने रविवार को पुणे में मार्च निकाला और त्योहारों के दौरान अत्यधिक शोर को लेकर चिंता जताई. प्रदर्शन में BJP के कुछ सक्रिय सदस्य भी मौजूद थे.
BJP नेताओं ने गणेश मंडलों का समर्थन किया
पुणे BJP के शहर अध्यक्ष धीरज घाटे, विधायक हेमंत रासने और मेयर मंजुषा नागपुरे ने गणेश मंडलों का समर्थन किया और भरोसा दिलाया कि शहर की त्योहार परंपराओं में कोई रुकावट नहीं आएगी. घाटे ने कहा कि पुणे का गणेशोत्सव दुनियाभर में देखा जाता है और सवाल उठाया कि अगर पारंपरिक ढोल-ताशा प्रस्तुतियों का भी विरोध किया जाए तो सार्वजनिक समारोह की परंपरा कैसे कायम रहेगी.
मेधा कुलकर्णी का अलग रुख
हालांकि, BJP की राज्यसभा सांसद मेधा कुलकर्णी ने शहर के कई अन्य BJP नेताओं से अलग रुख अपनाया है. उन्होंने DJ और बड़े स्तर पर ढोल-ताशा प्रस्तुतियों का विरोध किया और कहा कि सिर्फ परंपरा के नाम पर कुछ प्रथाओं को सही नहीं ठहराया जा सकता. उन्होंने कहा कि त्योहार और अवसर मनाते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो. उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव मनाने का किसी व्यक्ति के आस्तिक या नास्तिक होने से कोई संबंध नहीं है. अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर दूसरों को परेशानी पहुंचाता है और यह जानते हुए भी ऐसा करता रहता है कि लोग परेशान हो रहे हैं, तो वह असली नास्तिक है. उन्होंने यह भी कहा कि नवरात्रि, गणेशोत्सव और विभिन्न जयंती समारोहों में जिस तरह DJ बजाए जा रहे हैं, वह गलत है.
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पुणे गणेशोत्सव विवाद पर कहा कि पुणे में त्योहारों को पूरी तरह सांस्कृतिक तरीके से मनाने की क्षमता है. उन्होंने पुणे के लोगों से इस विवाद से दूर रहने और पूरे महाराष्ट्र को यह दिखाने की अपील की कि गणेशोत्सव पूरी तरह सांस्कृतिक तरीके से कैसे मनाया जा सकता है.