नेपाल में आए विनाशकारी सैलाब के बीच महाराष्ट्र के विरार निवासी प्रदीप तेंदुलकर बाल-बाल बच गए. कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले प्रदीप जिस होटल में रुके थे, उसे उन्होंने हादसे से महज चार-पांच घंटे पहले ही छोड़ दिया था. उनके निकलते ही आई तेज बाढ़ में वह पूरा होटल ताश के पत्तों की तरह बह गया. कुछ घंटों के इसी फासले ने उनकी जान बचा ली.
प्रदीप तेंदुलकर 22 अगस्त को विरार से अपनी यात्रा पर निकले थे. वह फिलहाल करीब 18,500 फीट की ऊंचाई पर मौजूद डोलमा ला पास सुरक्षित पहुंच चुके हैं और उनका सफर आगे बढ़ रहा है.
पीछे छूट गया तबाही का मंजर
जिस जगह प्रदीप कुछ देर पहले चाय पी रहे थे और आराम कर रहे थे, वहां अब सिर्फ मलबा बचा है. आगे बढ़ने के बाद जब उन्हें अपने होटल के बह जाने की खबर मिली, तो वह सन्न रह गए. हादसे पर दुख जताते हुए प्रदीप ने कहा कि 'हमारी जान तो बच गई, लेकिन इस त्रासदी में लोगों का जो नुकसान हुआ है, वह बेहद दर्दनाक है'.
रास्ते टूटने से बाकी यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें
सैलाब की वजह से कई मुख्य रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे पीछे से आ रहे कैलाश मानसरोवर यात्रियों का सफर अटक गया है. प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को निकालने के लिए भारत, नेपाल और चीन की टीमें लगातार राहत-बचाव में जुटी हैं.
इस घटना के बाद वसई-विरार के लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता थी. हालांकि, वसई-विरार के महापौर अजीव पाटील ने बताया कि नेपाल की इस घटना में शहर का कोई भी नागरिक प्रभावित नहीं हुआ है.
फिलहाल प्रदीप तेंदुलकर की कैलाश मानसरोवर यात्रा जारी है. जिस होटल में वह ठहरे थे, उसके बह जाने की घटना ने उनकी यात्रा को एक ऐसा अनुभव जरूर दे दिया है, जिसमें कुछ घंटों का अंतर जिंदगी और मौत के बीच का फासला बन गया.