महाराष्ट्र में कम बारिश और पानी की कमी की चिंता के बीच राज्य सरकार ने प्लांटेशन साइट्स की देखभाल के लिए 90.72 लाख रुपये की मंजूरी दी है. राज्य के 358 में से 304 तालुका सूखा प्रभावित घोषित किए गए हैं. सरकार ने साफ किया है कि यह रकम केवल उन जगहों के लिए जारी होगी, जहां कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित हैं.
राजस्व और वन विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, यह राशी 2026-27 के दौरान पंचायत वन, रकम 2026-27 के दौरान पंचायत वन, बेल वन और अमृत वन में लगाए गए पौधों के चौथे साल की देखभाल के लिए दी गई है. ये प्लांटेशन साइट्स राज्य के अलग-अलग जिलों में 227 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हैं.
कुल रकम में से 42.80 लाख रुपये पुणे फॉरेस्ट डिपार्टमेंट को दिए गए हैं. इसके बाद नागपुर को 20.80 लाखऔर छत्रपति संभाजीनगर को 20.76 लाख रुपये मिले हैं. पौधों की देखभाल, सुरक्षा और रखरखाव का काम लोकल सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और बायो-डाइवर्सिटी मैनेजमेंट कमिटी करेंगी.
नए शासनादेश में महाराष्ट्र के अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक, बजट, योजना और विकास, को तय शर्तों का पालन करने और रकम के इस्तेमाल का सर्टिफेकट सात दिन के अंदर जारी करने को कहा गया है.
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राज्य सरकार ने सोमवार को उन 304 तालुकाओं में मिट्टी और जल संरक्षण के काम कराने का आदेश जारी किया था, जहां 2026 के खरीफ मौसम के दौरान सूखे से जुड़े मिले थे. इनमें पानी सोखने वाले गड्ढे बनाना, जलाशयों से गाद निकालना और छोटे बांधों की मरम्मत करना शामिल है.
आजादी के 75वें वर्षगांठ पर शुरू किया पहल
महाराष्ट्र सरकार ने 2023 में आजादी का अमृत महोत्सव के तहत पौधारोपण की यह पहल शुरू की थी. इसे आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर शुरू किया गया था. इस पहल के तीन हिस्से अमृत वन, पंचायतन वन और बेल वन हैं. अमृत वन के तहत 75 बड़े शहरों और प्रमुख शहरी केंद्रों में स्थानीय निकाय या वन विभाग की जमीन पर देशी प्रजातियों के पेड़ों वाले खास शहरी वन उद्यान बनाने का लक्ष्य है.
पंचायतन वन के तहत हर जिले के 25 चुने हुए गांवों में पेड़ों के समूह विकसित किए जाने हैं. इनमें सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण और स्थानीय पर्यावरण के अनुकूल पांच प्रजातियों के पेड़ लगाए जाने हैं, ताकि बायो-डाइवर्सिटी को बढ़ावा दिया जा सके.