महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नई दिल्ली में मुलाकात की. करीब एक घंटे चली इस बैठक में महाराष्ट्र में गंभीर सूखे की स्थिति और किसानों के सामने पैदा हुई चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई.
शिंदे के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र में पानी की उपलब्धता, खेती की स्थिति और पशुओं के लिए चारे की व्यवस्था की जानकारी ली. प्रधानमंत्री ने राज्य को केंद्र की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया. शिंदे ने कहा कि संकट की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र को केंद्र से पर्याप्त सहायता मिलने की उम्मीद है.
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में किसानों को हर साल कुल 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है. इसमें 6 हजार रुपये केंद्र की शेतकरी सम्मान योजना के तहत और 6 हजार रुपये महाराष्ट्र की नमो शेतकरी योजना के तहत दिए जाते हैं.
शिंदे ने पिछले साल भारी बारिश के दौरान किसानों को दी गई सरकारी मदद का जिक्र करते हुए कहा कि जब किसान मुश्किल में हैं, तब सरकार सहायता देने में पीछे नहीं हटेगी. उन्होंने कहा, “सरकारी खजाने पर किसानों का पहला अधिकार है. जब किसान संकट में होंगे, तब सरकार सहायता देने में कोई कमी नहीं रखेगी.” उन्होंने भरोसा जताया कि किसानों की दिवाली सूखे के संकट से प्रभावित नहीं होने दी जाएगी और सरकार उनकी मदद के लिए हरसंभव कदम उठाएगी.
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विधान परिषद चुनाव पर क्या बोले शिंदे?
विधान परिषद चुनाव को लेकर शिंदे ने बताया कि महायुति समन्वय समिति की बैठक में पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से मंगेश चिवटे की उम्मीदवारी पर चर्चा हुई है. पार्टी की ओर से उन्हें एबी फॉर्म जारी कर दिया गया है और चिवटे मंगलवार को अपना नामांकन दाखिल करेंगे.
महाराष्ट्र में मंत्रिमंडल विस्तार के सवाल पर शिंदे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एनडीए के प्रमुख नेता हैं और उचित समय पर इस संबंध में फैसला लिया जाएगा.
उद्धव पर साधा निशाना
एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे गुट पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि चुनाव में जनता द्वारा खारिज किए गए लोग अब दूसरों को “दफनाने” की बात कर रहे हैं. भारतीय पायलट स्मित मछार का जिक्र करते हुए शिंदे ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को अपनी प्रेरणा बताया और संकट के समय हनुमान चालीसा का पाठ किया. शिंदे ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ नेताओं ने पहले हनुमान चालीसा का पाठ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की थी.
शिंदे ने हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट को निशाना बनाए जाने की कोशिशों की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान देने वालों को याद रखना चाहिए कि उन्हें भी जनता ने चुनकर नहीं भेजा है. उन्होंने कहा, “शीशे के घरों में रहने वालों को दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकने चाहिए.”