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बारामती में सुनेत्रा पवार को कांग्रेस की चुनौती, क्या है इसके पीछे की रणनीति?

बारामती उपचुनाव ने महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है, जहां कांग्रेस पार्टी ने महा विकास अघाड़ी की परंपराओं से अलग रास्ता अपनाते हुए उम्मीदवार उतार दिया. इस फैसले से गठबंधन के भीतर भरोसे की कमी खुलकर सामने आई है.

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे. (File Photo: PTI)
कांग्रेस नेता राहुल गांधी, एनसीपी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और शिवसेना (यूबीटी) चीफ उद्धव ठाकरे. (File Photo: PTI)

महाराष्ट्र की बारामती विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ एक स्थानीय चुनाव नहीं रह गया है, बल्कि राज्य की बदलती राजनीति का केंद्र बन गया है. कांग्रेस ने डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को उम्मीदवार बनाकर, परंपरागत 'निर्विरोध' राजनीति से अलग रुख अपनाया है. आकाश मोरे, पूर्व एमएलसी विजय राव मोरे के बेटे हैं और प्रभावशाली धनगर समुदाय से आते हैं.

यह​ दिखाता है कि कांग्रेस अपने मजबूत गढ़ को वापस हासिल करने के इरादे से यह उपचुनाव लड़ रही है. कांग्रेस का यह कदम महा विकास अघाड़ी (MVA) के भीतर बढ़ती खाई को भी उजागर करता है. साल 2024 में हुए लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद, विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के बाद कांग्रेस अब राज्य में गठबंधन पर निर्भर रहने की रणनीति पर पुनर्विचार कर रही है. 

नागपुर और नंदुरबार जैसे इलाकों में अपनी पकड़ मजबूत करने के बाद पार्टी अब स्वतंत्र पहचान बनाने की ओर बढ़ रही है. सीट बंटवारे में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के साथ तनाव भी बढ़ा है, खासकर बीएमसी चुनाव में कथित तौर पर एमएनएस के साथ नजदीकी को लेकर. राहुरी सीट पर भी सियासी हलचल देखने को मिली, जहां एनसीपी (एसपी) के गोविंदराव मोकाटे ने नामांकन दाखिल किया.

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यह भी पढ़ें: अजित पवार का प्लेन कैसे हुआ क्रैश? बारामती विमान हादसे पर AAIB की जांच रिपोर्ट आई सामने

इससे पहले भाजपा नेताओं ने निर्विरोध चुनाव की कोशिश की थी, लेकिन मामला सुलझ नहीं सका. यहां तक कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन प्राजक्त तनपुरे ने अंतिम फैसला टाल दिया. इस पूरे घटनाक्रम में महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल की बारामती से दूरी भी चर्चा का विषय रही. उन्होंने राजनीतिक संतुलन बनाए रखने और बारामती मेंसंभावित सहानुभूति लहर से बचने के लिए यह कदम उठाया. बता दें कि बारामती सीट एक विमान हादसे में अजित पवार की मौत के कारण रिक्त हुई है और उनकी पत्नी सुनेत्रा यहां से उपचुनाव लड़ रही हैं.

बारामती में उम्मीदवार उतारने के कांग्रेस के फैसले पर उसके गठबंधन सहयोगियों की प्रतिक्रियाएं भी आई हैं. शिवेसना (यूबीटी) के नेता संजय राउत ने कहा कि बारामती पवार परिवार का गढ़ है और कांग्रेस का फैसला उनका अपना है. वहीं शरद पवार ने लोकतांत्रिक रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी पार्टी को उम्मीदवार उतारने का पूरा अधिकार है. दूसरी ओर, अजित पवार के बेटे पार्थ पवार ने कांग्रेस को चेतावनी दी कि इस फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी.

इसका जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद वर्षा गायकवाड़ ने कहा कि राजनीति धमकियों से नहीं चलती और हर किसी को चुनाव लड़ने का अधिकार है. बारामती उपचुनाव में नाम वापसी की समयसीमा नजदीक है, लेकिन कांग्रेस अपने दम पर ताकत आजमाने के लिए तैयार दिख रही है, भले ही इससे महा विकास अघाड़ी के भीतर तनाव और बढ़ जाए.

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