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झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता, 20 लाख का इनामी नक्सली रवींद्र गंझू गिरफ्तार

झारखंड में नक्सलवाद के खिलाफ ऑपरेशन फ्लश आउट अब अंजाम पर पहुंचता दिख रहा है. ऑपरेशन ऑक्टोपस के जरिए गढ़वा यानी छत्तीसगढ़-झारखंड बॉर्डर पर स्थित बूढ़ा पहाड़ को नक्सलमुक्त करवाने, झुमरा रेंज को फ्री करने के बाद अब सुरक्षाबलों को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है. राज्य पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड लिस्ट में शामिल प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) के जोनल कमांडर 20 लाख के इनामी रवींद्र गंझू को गिरफ्तार कर लिया गया है.

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रवींद्र गंझू ने अमित शाह के दौरे वाले दिन की थी 4 जवानों की हत्या. (Photo: Representational )
रवींद्र गंझू ने अमित शाह के दौरे वाले दिन की थी 4 जवानों की हत्या. (Photo: Representational )

झारखंड पुलिस और सुरक्षा बलों को नक्सल विरोधी अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है. पुलिस ने 20 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) के रीजनल कमेटी सदस्य रवींद्र गंझू को लातेहार जिले से गिरफ्तार कर लिया है. झारखंड पुलिस ने मंगलवार को इसकी आधिकारिक पुष्टि की. गिरफ्तारी के दौरान उसके कब्जे से एक AK-47 राइफल और बड़ी संख्या में जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. सुरक्षा एजेंसियां इसे झारखंड में माओवादी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी सफलता मान रही हैं.

गंझू पर 20 लाख रुपये का था इनाम
रवींद्र गंझू पर झारखंड सरकार ने 15 लाख रुपये और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. पुलिस को उसके लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित हेसला गांव के पास होने की गुप्त सूचना मिली थी. इसके बाद सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया. रवींद्र गंझू झारखंड के सबसे वांछित माओवादी नेताओं में शामिल रहा है. वह 22 नवंबर 2019 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के झारखंड दौरे के दौरान हुए नक्सली हमले का मुख्य आरोपी है.

रवींद्र गंझू, जिसे पुलिस ने किया है गिरफ्तार. (FIle Photo: ITG)

22 नवंबर के दिन चंदवा-लुकैया क्षेत्र में घात लगाकर किए गए हमले में चार पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे. जांच में खुलासा हुआ था कि पुलिस की गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए स्थानीय लोगों को महज 5-5 हजार रुपये दिए गए थे. इसके आधार पर नक्सलियों ने जवानों पर हमला किया था. जांच एजेंसियों के अनुसार, रवींद्र गंझू ने यह हमला अपनी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद बदले की भावना से कराया था. उस पर हत्या, लेवी वसूली, पुलिस पर हमले और अन्य गंभीर मामलों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं. वह लंबे समय से लातेहार, लोहरदगा और गुमला के जंगलों में सक्रिय था और सुरक्षा एजेंसियों की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था.

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रवींद्र गंझू से पुलिस कर रही है पूछताछ
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि रवींद्र गंझू से पूछताछ के दौरान माओवादी संगठन के नेटवर्क, हथियारों के ठिकानों, फंडिंग चैनल और अन्य सक्रिय नक्सलियों के बारे में अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है. फिलहाल उसे सुरक्षित स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है.

अधिकारियों का मानना है कि उसकी गिरफ्तारी से झारखंड में माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है. पिछले कुछ वर्षों में लगातार चलाए गए अभियानों के कारण राज्य में नक्सली गतिविधियों में काफी कमी आई है. अब सारंडा के कुछ इलाकों को छोड़कर अधिकांश क्षेत्र नक्सल प्रभाव से मुक्त बताए जा रहे हैं. एक समय था, जब राज्य के 24 के 24 जिलों में नक्सलियों का प्रभाव था. रवींद्र गंझू की गिरफ्तारी को इसी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है.

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