रांची में दुर्गा पूजा के दौरान हर साल आकर्षक पंडाल बनाए जाते हैं. इस बार पूजा समिति ने कुछ अलग करने का फैसला किया है. मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले लोगों को इस बार गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम पर सजा पंडाल देखने को मिलेगा. पंडाल के अंदर गोलगप्पों से की गई सजावट खास आकर्षण होगी. आयोजकों का मानना है कि यह अनोखा कॉन्सेप्ट लोगों को पसंद आएगा. गोलगप्पे और झालमुड़ी केवल खाने-पीने की चीजें नहीं हैं, बल्कि इनसे जिंदगी के अनुभवों को भी जोड़ा जा रहा है. जीवन में कभी खट्टे तो कभी मीठे अनुभव आते हैं. गोलगप्पे का स्वाद भी कुछ ऐसा ही एहसास कराता है. वहीं, झालमुड़ी अपने तीखे और चटपटे स्वाद के लिए जानी जाती है. इस तरह पंडाल की थीम स्वाद के साथ जीवन के अलग-अलग रंगों को भी सामने रखती है.
आयोजन समिति के आयोजक कुंदन सिंह के मुताबिक, शुक्ला कॉलोनी, हिनू में कमिटी की बैठक हुई थी. इसमें चर्चा की गई कि जगह बदलने के बाद पंडाल में ऐसा क्या किया जाए, जो लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने. इसी विचार के बाद गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम पर पंडाल सजाने का फैसला लिया गया. इसे तैयार करने और सजाने में बंगाल के कारीगर भी जुटे हैं.
बंगाल की झालमुड़ी और दुर्गा पूजा का खास कनेक्शन
झालमुड़ी बंगाल के लोकप्रिय खाद्य पदार्थों में शामिल है. हाल के दिनों में बंगाल चुनाव के दौरान भी झालमुड़ी चर्चा में रही थी. रांची की दुर्गा पूजा में बंगाल की संस्कृति और परंपराओं की झलक पहले से देखने को मिलती रही है. इस बार झालमुड़ी और गोलगप्पे की थीम के जरिए इस जुड़ाव को एक नया रूप देने की कोशिश की गई है.
बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को पसंद आने की उम्मीद
आयोजन समिति के सदस्य शंभू को उम्मीद है कि इस बार का पंडाल दर्शनार्थियों को पसंद आएगा. गोलगप्पे और झालमुड़ी की थीम हर उम्र के लोगों के लिए दिलचस्प हो सकती है. समिति को भरोसा है कि अनोखी सजावट लोगों को मां दुर्गा के दर्शन के साथ पंडाल देखने के लिए भी आकर्षित करेगी. रांची में दुर्गा पूजा भव्य आयोजन और आकर्षक पंडालों के लिए जानी जाती है. इस बार गोलगप्पे और झालमुड़ी की अनोखी थीम ने उत्सुकता बढ़ा दी है. अब देखना होगा कि स्वाद और संस्कृति का यह मेल दर्शनार्थियों को कितना पसंद आता है.